भारतीय सिनेमा के परिदृश्य में निर्देशक और निर्माता विपुल अमृतलाल शाह की पहचान एक संवेदनशील और साहसी कथाकार के रूप में रही है। रंगमंच और छोटे पर्दे से अपना रचनात्मक सफर शुरू करने वाले इस फिल्ममेकर ने जब बड़े पर्दे पर कदम रखा, तो उन्होंने पारंपरिक फॉर्मूला फिल्मों से हटकर एकदम अनूठा कंटेंट पेश किया। बीते दो दशकों के दौरान उन्होंने बतौर निर्देशक और निर्माता ऐसी कई यादगार और कल्ट फिल्मों का निर्माण किया, जिन्होंने न केवल बॉक्स ऑफिस पर अपनी छाप छोड़ी बल्कि उनमें काम करने वाले कलाकारों के करियर को भी नई दिशा प्रदान की। सिनेमा के अलग-अलग जॉनर में हाथ आजमाना और किरदारों को गहराई से उभारना उनकी कार्यशैली का सबसे प्रमुख पहलू रहा है।
विविध जॉनर की कहानियां और किरदारों की सशक्त रचना
विपुल अमृतलाल शाह के सिनेमाई सफर का सबसे मजबूत पहलू यह रहा है कि उन्होंने खुद को किसी एक खास ढांचे में सीमित नहीं रखा। जहां एक तरफ उन्होंने बैंक डकैती जैसी हाई-कॉन्सेप्ट थ्रिलर पर काम किया, वहीं दूसरी ओर एक असाध्य बीमारी से जूझ रहे पिता और लापरवाह बेटे के भावनात्मक द्वंद्व को भी पर्दे पर उतारा। इसके अलावा क्रॉस-कल्चरल रोमांटिक ड्रामा और बड़े कैनवास की म्यूजिकल कहानियों को भी उन्होंने उतनी ही सहजता से दर्शकों के सामने रखा। उनकी बनाई कहानियों की विशेषता यह रही कि वे सितारों के आभा मंडल के पीछे छिपने के बजाय उनकी अभिनय क्षमताओं को निखारकर पटकथा को जीवंत बनाती हैं।
अमिताभ बच्चन के साथ जटिल भूमिकाओं का निर्माण
सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन के साथ काम करने के लिए किसी भी निर्देशक में स्पष्ट दृष्टि और गहरे आत्मविश्वास की दरकार होती है। विपुल अमृतलाल शाह ने यह हुनर अपने करियर के शुरुआती दौर में ही साबित कर दिखाया था। वर्ष 2002 में रिलीज हुई फिल्म आंखें में उन्होंने अमिताभ बच्चन को विजय सिंह राजपूत नाम के एक बेहद जटिल, सनकी और नकारात्मक तेवर वाले बैंक मैनेजर के किरदार में पेश किया, जिसकी योजना तीन दृष्टिहीन व्यक्तियों से बैंक लुटवाने की होती है। इसके बाद वर्ष 2005 में आई फिल्म वक्त: द रेस अगेंस्ट टाइम में उन्होंने पारिवारिक रिश्तों की एक नई परत खोली। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने एक ऐसे बीमार पिता का किरदार निभाया था जो अपने जीवन के अंतिम दिनों में अपने गैर-जिम्मेदार बेटे को आत्मनिर्भर बनाने की भावनात्मक जंग लड़ता है।
अक्षय कुमार के साथ बनी ब्लॉकबस्टर फिल्मों की फेहरिस्त
वर्ष 2000 के दशक में विपुल अमृतलाल शाह और अक्षय कुमार की साझेदारी ने मुख्यधारा के व्यावसायिक सिनेमा को नया आयाम दिया। दोनों ने मिलकर आंखें और वक्त: द रेस अगेंस्ट टाइम जैसी फिल्मों में साथ काम किया, लेकिन वर्ष 2007 में आई नमस्ते लंदन ने इस जोड़ी की ताकत को पूरी इंडस्ट्री में स्थापित कर दिया। इस फिल्म में अक्षय कुमार ने ठेठ पंजाबी युवक अर्जुन सिंह की भूमिका निभाई, जिसके संवाद, मासूमियत और भावनात्मक अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया। बाद के वर्षों में इस रचनात्मक साझेदारी ने निर्माता के तौर पर भी सफलता के झंडे गाड़े, जब विपुल शाह ने सिंह इज किंग और हॉलिडे जैसी सुपरहिट एक्शन और मनोरंजक फिल्मों का निर्माण किया।
कैटरीना कैफ के करियर को मिली नई ऊंचाई
बॉलीवुड की मुख्यधारा की फिल्मों में अभिनेत्री कैटरीना कैफ की मजबूत स्थिति बनाने में विपुल अमृतलाल शाह के प्रोजेक्ट्स का अहम योगदान माना जाता है। वर्ष 2007 में प्रदर्शित फिल्म नमस्ते लंदन में उन्होंने कैटरीना को जस्मीत उर्फ जैज के किरदार में प्रस्तुत किया। यह एक ऐसी लड़की की कहानी थी जो ब्रिटिश संस्कृति और भारतीय परंपराओं के बीच खुद को उलझा हुआ महसूस करती है। अक्षय कुमार के साथ कैटरीना की पर्दे पर जोड़ी को दर्शकों ने जबरदस्त सराहा। इसके ठीक बाद वर्ष 2008 में विपुल शाह के प्रोडक्शन में बनी ब्लॉकबस्टर फिल्म सिंह इज किंग ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन किया और इसने कैटरीना कैफ को इंडस्ट्री की शीर्ष अभिनेत्रियों की कतार में मजबूती से स्थापित कर दिया।
सलमान खान का अलग अंदाज और म्यूजिकल कैनवास
वर्ष 2009 में बड़े पर्दे पर आई म्यूजिकल ड्रामा फिल्म लंदन ड्रीम्स में निर्देशक विपुल अमृतलाल शाह ने सलमान खान को एकदम नए तेवर में पेश किया। इस कहानी में सलमान खान ने मन्नू नाम के एक बेहद प्रतिभाशाली, जिंदादिल और बेपरवाह संगीतकार का किरदार निभाया, जो अपने बचपन के दोस्त के रॉक बैंड में शामिल होने के लिए यूनाइटेड किंगडम का सफर तय करता है। निर्देशक ने सलमान के स्वाभाविक स्टारडम और चार्म को एक ऐसे किरदार में ढाला, जिसमें दोस्ती की मासूमियत, कला के प्रति जुनून और दिल को छू लेने वाली भावनात्मक गहराई एक साथ देखने को मिली।
अजय देवगन की संजीदगी और दो सितारों का संतुलन
फिल्म लंदन ड्रीम्स की वास्तविक ताकत सलमान खान और अजय देवगन के बीच की केमिस्ट्री और उनके किरदारों का टकराव था। फिल्म में अजय देवगन ने अर्जुन नाम के एक ऐसे संगीतकार की भूमिका निभाई, जो अपनी कला और लंदन के वेम्बली स्टेडियम में शो करने के सपने को लेकर जुनूनी, महत्वाकांक्षी और हद दर्जे तक गंभीर रहता है। एक ही फिल्म के भीतर दो विशाल कद के अभिनेताओं की उपस्थिति को संभालना किसी भी निर्देशक के लिए कठिन चुनौती होती है, लेकिन विपुल अमृतलाल शाह ने दोनों कलाकारों के स्क्रीन टाइम और उनके आंतरिक संघर्षों को संतुलित रूप से पेश किया। जहां सलमान की भूमिका में चंचलता थी, वहीं अजय देवगन की संजीदा अदाकारी ने कहानी में तनाव और गंभीरता बनाए रखी।



















