राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सियासत में 1 नवंबर को एक बड़ा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिलने वाला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में रामलीला मैदान में आयोजित होने जा रहे विशाल शक्ति प्रदर्शन की काट के लिए भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी रणनीति तैयार कर ली है। एक तरफ जहां कांग्रेस विपक्षी गठबंधन के बड़े चेहरों के साथ भारी भीड़ जुटाने की तैयारी में है, वहीं भाजपा ने उसी तारीख को दिल्ली की सड़कों पर समानांतर मार्च निकालकर विपक्ष को घेरने का खाका खींचा है।
रामलीला मैदान में विपक्षी एकजुटता और 10 लाख का दावा
कांग्रेस पार्टी 1 नवंबर को रामलीला मैदान में एक व्यापक रैली का आयोजन करने जा रही है, जिसे सफल बनाने के लिए पार्टी संगठन पूरी ताकत झोंक रहा है। इस राजनीतिक सभा में विपक्षी दलों के गठबंधन 'इंडिया' के शीर्ष घटक दल भी मंच साझा करेंगे। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी सहित कई प्रमुख विपक्षी नेताओं के इस कार्यक्रम में शामिल होने की रूपरेखा तय हुई है। कांग्रेस नेतृत्व का दावा है कि इस सभा में करीब 10 लाख लोग एकत्रित होंगे, जिसके जरिए केंद्र सरकार के खिलाफ एक साझा राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया जाएगा।
हरिनगर में भाजपा का विरोध मार्च और पीड़ितों की भागीदारी
कांग्रेस की इस बड़ी सभा के समानांतर भाजपा ने भी जवाबी मोर्चा खोलने का फैसला किया है। पार्टी 1 नवंबर को ही दिल्ली के हरिनगर इलाके में सुबह 11 बजे से एक विरोध मार्च निकालेगी। इस प्रदर्शन में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ पार्टी के प्रमुख सिख चेहरे भी अगुवाई करेंगे। विशेष बात यह है कि इस मार्च में 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित और उनके परिजन बड़ी संख्या में शामिल होंगे। आयोजन को लेकर चल रही तैयारियों के मुताबिक, लगभग 5 हजार लोग इस प्रदर्शन में भागीदारी निभाएंगे, जिससे उसी दिन राजधानी के दो अलग-अलग हिस्सों में दोनों प्रमुख दलों की राजनीतिक सरगर्मी चरम पर रहेगी।



















