फर्रुखाबाद के इस प्राचीन शिव मंदिर में एक साथ होते हैं बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, महाभारत काल से जुड़ा है गहरा इतिहासपुणे प्लांट में बनने लगी लैंड रोवर डिफेंडर, कीमतों में 34 लाख रुपये तक की भारी कटौतीसावन में बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम क्या है, एक गलती से बेकार हो सकती है पूजाबायोलॉजी में क्रांतिकारी बदलाव के दावों पर एन्थ्रोपिक की नई रिपोर्टरिज़र्व बैंक ऑफ़ न्यूज़ीलैंड 3 प्रतिशत कर सकता है ब्याज दर, मुद्रास्फीति और वैश्विक दबावों के बीच नीतिगत समीक्षा पर टिकी नज़रेंक्विंस की मेरिनो वूल टी-शर्ट बाजार में क्यों मचा रही है धूमवियतनाम में आर्थिक रफ्तार 2027 तक रहेगी तेज, 11 फीसदी तक पहुंच सकती है विकास दरअमेरिकी डॉलर के मुकाबले थाई बात तीन महीने के निचले स्तर पर फिसला, बैंक ऑफ थाईलैंड की बैठक पर टिकी नजरेंयमन से मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद रियाद में धमाके, उधर होर्मुज में तेल टैंकर में लगी आगड्यून: पार्ट थ्री का फाइनल ट्रेलर रिलीज, पॉल अत्रेइदेस और चानी के बीच भयंकर टकराव की झलक
लाहौर से मुंबई पहुंचे देव आनंद ने संघर्ष से रचा इतिहास और बने सदाबहार सुपरस्टारबॉलीवुड
26 सित॰ 2026, 4:23 am (32 दिन पहले)· 3

लाहौर से मुंबई पहुंचे देव आनंद ने संघर्ष से रचा इतिहास और बने सदाबहार सुपरस्टार

26 सितंबर 1923 को जन्मे देव आनंद ने 1943 में बिना किसी सहारे के मुंबई आकर अपनी राह बनाई और छह दशकों तक हिंदी सिनेमा पर राज किया।

भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग में अपनी खास शैली, बुलंद आवाज और जुदा चाल से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले देव आनंद का जीवन संघर्ष और सफलता की एक अद्भुत मिसाल है। बिना किसी गॉडफादर के मुंबई पहुंचे धरमदेव पिशोरीमल आनंद ने अपने लगन और सिनेमा के प्रति अटूट प्यार के बल पर छह दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। केवल एक अभिनेता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी निर्माता, निर्देशक और लेखक के रूप में भी उन्होंने हिंदी फिल्म जगत को एक नया मोड़ दिया।

लाहौर से मुंबई का कठिन सफर और शुरुआती संघर्ष

देव आनंद का जन्म 26 सितंबर 1923 को हुआ था। उन्होंने लाहौर से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद साल 1943 में वे अपने सपनों को सच करने के लिए मुंबई आ गए। उस समय उनके पास न तो अधिक पैसे थे और न ही फिल्म उद्योग में कोई मार्गदर्शक या जानकार व्यक्ति था। अपनी जीविका चलाने के लिए उन्हें एक साधारण नौकरी करनी पड़ी और लगभग दो वर्षों तक मुंबई की सड़कों और स्टूडियो के चक्कर काटने पड़े। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अभिनय के अपने लक्ष्य से कभी ध्यान नहीं भटकने दिया।

ये भी पढ़ें

जिद्दी फिल्म से मिली पहचान और नवकेतन फिल्म्स की नींव

देव आनंद को अभिनय का पहला अवसर साल 1946 में प्रदर्शित फिल्म 'हम एक हैं' में मिला। हालांकि, उन्हें असली पहचान और स्टारडम साल 1948 में आई फिल्म 'जिद्दी' से हासिल हुई। इस फिल्म की सफलता ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं की कतार में ला खड़ा किया। फिल्मों में अपनी स्थिति मजबूत करने के बाद उन्होंने कलात्मक स्वतंत्रता और नए विचारों को बढ़ावा देने के लिए अपने बड़े भाई चेतन आनंद के साथ मिलकर 'नवकेतन फिल्म्स' बैनर की स्थापना की। इस बैनर के माध्यम से उन्होंने न केवल कालजयी फिल्मों का निर्माण किया बल्कि सिनेमा जगत को कई नए प्रतिभावान कलाकार भी सौंपे।

स्वर्णिम दौर और विजय आनंद के साथ ऐतिहासिक जोड़ी

1950 और 1960 का दशक देव आनंद के करियर का सबसे बेहतरीन दौर माना जाता है। इस अवधि में उन्होंने 'बाजी', 'जाल', 'टैक्सी ड्राइवर', 'काला पानी', 'काला बाजार', 'गाइड' और 'ज्वेल थीफ' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। निर्देशक विजय आनंद के साथ उनकी जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कुछ सबसे यादगार कृतियां दीं। दोनों भाइयों ने मिलकर 'गाइड', 'ज्वेल थीफ', 'काला बाजार' और 'जॉनी मेरा नाम' जैसी कालजयी फिल्मों का निर्माण किया। इनमें से 'गाइड' को उनके करियर की सबसे महान फिल्म माना जाता है, जिसने भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया मानदंड स्थापित किया।

निर्देशन में कदम और सिनेमा के प्रति जीवनपर्यंत समर्पण

अभिनय के शिखर पर पहुंचने के बाद देव आनंद ने निर्देशन और निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने 'प्रेम पुजारी' और 'हरे राम हरे कृष्णा' जैसी सामाजिक और प्रासंगिक फिल्मों का निर्देशन किया तथा सिनेमा में नए चेहरों को आगे आने का मौका दिया। वह जीवन के अंतिम पड़ाव तक फिल्मों को लेकर बेहद उत्साहित रहे। साल 2011 में आई फिल्म 'चार्जशीट' उनके निर्देशन में बनी अंतिम फिल्म थी। अपने 88वें जन्मदिन के अवसर पर भी उन्होंने यह विश्वास दोहराया था कि जब तक उनका शरीर और मस्तिष्क उनका साथ देगा, वे फिल्में बनाना और नया काम करना जारी रखेंगे।

राष्ट्रीय सम्मान और अंतिम विदाई

हिंदी सिनेमा में उत्कृष्ट योगदान के लिए देव आनंद को अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें 'काला पानी' और 'गाइड' फिल्मों में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवॉर्ड मिला। साल 1991 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा गया। भारत सरकार ने साल 2001 में उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' से अलंकृत किया और साल 2002 में सिनेमा के सर्वोच्च पुरस्कार 'दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड' प्रदान किया। 3 दिसंबर 2011 को लंदन में 88 वर्ष की आयु में इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

सवाल-जवाब

देव आनंद का वास्तविक नाम क्या था?
उनका वास्तविक नाम धरमदेव पिशोरीमल आनंद था।
देव आनंद मुंबई कब आए थे?
वे साल 1943 में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद मुंबई पहुंचे थे।
देव आनंद की पहली फिल्म कौन सी थी?
उनकी पहली फिल्म साल 1946 में आई 'हम एक हैं' थी।
देव आनंद को किस फिल्म से बड़ी पहचान मिली?
साल 1948 में आई फिल्म 'जिद्दी' से उन्हें एक बड़े स्टार के रूप में पहचान मिली।
देव आनंद को कौन से राष्ट्रीय पुरस्कार मिले?
उन्हें 2001 में पद्म भूषण और 2002 में दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Meera Joshi@meera-joshi·31 दिन पहले

बिना किसी गॉडफादर के मुंबई आकर छह दशक तक राज करना कमाल है। इतनी असफलता और संघर्ष के बाद भी उन्होंने कभी अपना आत्मविश्वास कैसे नहीं खोया?

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·31 दिन पहले

देव साहब का स्टाइल और उनका संघर्ष दोनों ही कमाल के थे। लाहौर से आकर बिना किसी गॉडफादर के छह दशक तक सिनेमा पर राज करना हर किसी के बस की बात नहीं। गाइड और टैक्सी ड्राइवर जैसी फिल्में आज भी सिनेमाघरों में हाउसफुल चल सकती हैं, अगर इन्हें दोबारा रिलीज़ किया जाए।

Kavya Nair@kavya-nair·31 दिन पहले

स्नेहा जी, बिल्कुल सही कहा आपने! देव साहब की 'गाइड' की लोकेशन्स और उनका वह अंदाज आज भी किसी को भी मुंबई का सफर शुरू करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

Tanvi Desai@tanvi-desai·31 दिन पहले

क्या सच में दो साल में बिना किसी के सब कुछ मिल गया था? इतनी आसानी से यकीन नहीं होता।

Aisha Khan@aisha-khan·31 दिन पहले

तनवी जी, दो साल संघर्ष करना तब बहुत बड़ी बात थी, कोई आसान नहीं था उनके लिए।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp