सिनेमा जगत के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन के 84वें जन्मदिन के अवसर पर फिल्म निर्माता इम्तियाज अली ने उनके प्रति गहरा सम्मान प्रकट किया है। इम्तियाज अली ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमिताभ बच्चन जैसा कलाकार दूसरा कोई नहीं हो सकता। खुद को उस पीढ़ी का हिस्सा मानते हुए जिसका जन्म भारत में बच्चन के दौर में हुआ, 55 वर्षीय निर्देशक ने उम्मीद जताई कि भविष्य में किसी दिन उन्हें इस महान अभिनेता के साथ एक पूर्ण फिल्म में निर्देशन का अवसर जरूर मिलेगा। पांच दशक से भी अधिक लंबे समय तक फैले अपने करियर में अमिताभ बच्चन ने अभिनय की जो अमिट छाप छोड़ी है, उसने कई पीढ़ियों के फिल्मकारों को प्रेरित किया है।
शुरुआती हिचक और विज्ञापन निर्देशन का अनुभव
इम्तियाज अली ने अपने शुरुआती दिनों के संकोच को साझा करते हुए बताया कि एक समय उन्हें ऐसा महसूस होता था कि वह कभी अमिताभ बच्चन जैसे विराट कद के अभिनेता को निर्देशित नहीं कर पाएंगे। उनके अनुसार, महानायक का व्यक्तित्व और सिनेमाई रुतबा इतना बड़ा था कि उनके साथ काम करने की कल्पना भी कठिन लगती थी। हालांकि, जब उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ एक विज्ञापन फिल्म का निर्देशन करने का मौका मिला, तब उनका यह डर और धारणा पूरी तरह बदल गई। इस छोटे प्रोजेक्ट पर साथ काम करने के अनुभव ने उनकी हिचक दूर की और अब वह उनके साथ किसी बड़े फिल्मी प्रोजेक्ट पर काम करने का सपना संजोए हुए हैं। उनका मानना है कि ऐसे कलाकार के युग में पैदा होना ही अपने आप में एक बड़ा सौभाग्य है।
लातूर के स्कूल में साहित्य और शिक्षा का उत्सव
अमिताभ बच्चन के 84वें जन्मदिन को केवल फिल्मी गलियारों में ही नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के ग्रामीण हिस्से में भी बेहद अनोखे तरीके से मनाया गया। लातूर जिले के अहमदपुर स्थित डॉ. हरिवंश राय बच्चन विद्यालय ने इस खास दिन को पारंपरिक केक काटने या मोमबत्तियां जलाने के बजाय साहित्य, कविता, संगीत और शिक्षा के एक बड़े उत्सव में बदल दिया। कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन के नाम पर स्थापित इस शिक्षण संस्थान ने “मधुशाला से ज्ञानशाला” नामक एक विशेष पहल का आयोजन किया। इस आयोजन के जरिए स्कूल की 20वीं वर्षगांठ भी साथ में मनाई गई, जिसने पूरे माहौल को ज्ञानवर्धक और प्रेरक बना दिया।
ग्रामीण छात्रों के लिए रचनात्मक और डिजिटल पहल
अहमदपुर के इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवेश के स्कूली बच्चों के बीच हिंदी साहित्य, रचनात्मक सोच और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना था। डॉ. हरिवंश राय बच्चन की कालजयी रचनाओं की प्रेरणा से जुड़े इस आयोजन में बच्चों को कला, नवाचार और आधुनिक शिक्षण से जोड़ा गया। इस तरह सुपरस्टार के जन्मदिन का जश्न केवल मनोरंजन तक सीमित न रहकर समाज में सकारात्मक बदलाव, साहित्यिक चेतना और नई पीढ़ी की शिक्षा को समर्पित एक सार्थक मंच बन गया।


















