फिल्म जगत में कलाकारों की जीवनशैली और उनके भोजन करने के तौर-तरीके अक्सर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाते हैं। इसी कड़ी में अभिनेत्री राधिका मदान अपने खानपान में किए गए खास बदलावों की वजह से ध्यान खींच रही हैं। उन्होंने साझा किया है कि वह अपने दैनिक आहार से चीनी और दूध को पूरी तरह बाहर कर चुकी हैं, जबकि गेहूं का सेवन बेहद सीमित मात्रा में ही करती हैं। इस बदलाव के बीच उन्होंने किसी अत्यधिक कठोर नियम को अपनाने के बजाय घर में तैयार सादे भोजन और अपनी आदतों में सुधार पर प्रमुखता से बल दिया है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सामान्य लोगों को भी अपनी थाली से इन चीजों को पूरी तरह हटा देना चाहिए।
चीनी की अत्यधिक खपत और उससे जुड़े शारीरिक जोखिम
दैनिक जीवन में मिठास का अत्यधिक इस्तेमाल धीरे-धीरे शरीर के विभिन्न अंगों पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगता है। बाजार में मिलने वाली मिठाइयों, मीठे पेयों और प्रसंस्कृत पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में छिपी अतिरिक्त शर्करा शरीर में बिना किसी ठोस पोषण के गैर-जरूरी कैलोरी का अंबार लगा देती है। लंबे वक्त तक लगातार ऐसी चीजों का सेवन करने से शरीर का वजन अनियंत्रित गति से बढ़ने लगता है, दांतों की बाहरी परत खराब होकर उनमें सड़न पैदा हो सकती है और टाइप-2 डायबिटीज जैसी चयापचय से जुड़ी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इन सभी खतरों का यह कतई अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि हर स्वस्थ व्यक्ति को आज ही से चीनी का एक-एक दाना छोड़ देना अनिवार्य है। स्वास्थ्य के नजरिए से सबसे समझदारी भरा कदम यह होता है कि आप बाहर से मिलाई जाने वाली अतिरिक्त चीनी की दैनिक मात्रा पर सख्त नियंत्रण रखें। बाजार के डिब्बाबंद और मीठे शरबतों या कोल्ड ड्रिंक्स के स्थान पर सादा पानी, नींबू पानी या बिना किसी मिठास वाले प्राकृतिक विकल्पों को प्राथमिकता देना एक संतुलित शुरुआत साबित हो सकता है।
दूध को भोजन से हटाने से पहले समझें शारीरिक जरूरतें
पारंपरिक भारतीय खानपान में दूध को संपूर्ण पोषण का एक बड़ा माध्यम माना गया है, क्योंकि इससे शरीर को आवश्यक कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन बी12 की अच्छी खुराक मिलती है। इसके बावजूद समाज में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसके पाचन तंत्र को दूध में मौजूद प्राकृतिक शर्करा यानी लैक्टोज को पचाने में खासी दिक्कत पेश आती है। चिकित्सकीय भाषा में इस शारीरिक स्थिति को लैक्टोज इनटॉलरेंस के नाम से पहचाना जाता है। ऐसे लोगों को थोड़ा सा भी दूध पीने के बाद पेट फूलने, अत्यधिक गैस बनने, मरोड़ उठने, दर्द होने या दस्त लगने जैसी असहज स्थितियों का सामना करना पड़ता है।
कुछ व्यक्तियों में दूध में मौजूद खास प्रोटीन के कारण एलर्जी की समस्या भी देखने को मिलती है। जब किसी व्यक्ति को ऐसी कोई प्रमाणित शारीरिक समस्या हो, तब निश्चित रूप से डॉक्टर के परामर्श पर दूध से दूरी बनाना सेहत के लिए जरूरी हो जाता है। लेकिन यदि आपका पेट दूध को पूरी तरह आसानी से पचा लेता है और कोई परेशानी नहीं होती, तो केवल किसी चलन की देखादेखी इसे छोड़ देना समझदारी नहीं है। जो लोग किसी कारणवश दूध नहीं ले रहे हैं, उन्हें कैल्शियम और प्रोटीन की कमी से बचने के लिए अपनी खुराक में दही, पनीर, कैल्शियम युक्त फोर्टिफाइड सोया पेय और अन्य पौष्टिक विकल्पों को जरूर जोड़ना चाहिए।
गेहूं का सेवन घटाने से पहले अपनी पाचन क्षमता परखें
भारतीय रसोई में गेहूं की रोटियां ऊर्जा और कार्बोहाइड्रेट का सबसे प्राथमिक जरिया रही हैं, जिनसे शरीर को ऊर्जा के साथ-साथ कुछ मात्रा में आहारीय फाइबर भी प्राप्त होता है। हालांकि मैदे जैसे रिफाइंड आटे से तैयार व्यंजनों की तुलना में साबुत गेहूं और अन्य मोटे अनाजों से बनी चीजें सेहत के लिए कहीं अधिक गुणकारी साबित होती हैं। कुछ व्यक्तियों को सीलिएक रोग जैसी गंभीर समस्या होती है या फिर गेहूं के सेवन से जुड़ी अन्य चिकित्सकीय जटिलताएं होती हैं, जहां शरीर गेहूं को बिल्कुल स्वीकार नहीं कर पाता।
ऐसे रोगियों को अनिवार्य रूप से चिकित्सीय देखरेख में गेहूं से पूरी तरह दूरी बनानी पड़ती है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को कोई बीमारी या चिकित्सकीय अड़चन नहीं है, तो गेहूं को पूरी तरह त्यागने की कोई बाध्यता नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति अपनी पसंद से गेहूं की मात्रा कम कर रहा है, तो उसे पोषक तत्वों और फाइबर का संतुलन बनाए रखने के लिए ज्वार, बाजरा, रागी, ओट्स और विभिन्न अन्य साबुत अनाजों को अपने भोजन में प्रमुखता से शामिल करना चाहिए।
क्या हर किसी को अपनाना चाहिए ऐसा सेलिब्रिटी डाइट प्लान?
राधिका मदान ने अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और शारीरिक अनुभव के आधार पर यह निर्णय लिया है, लेकिन जो बात एक व्यक्ति के शरीर पर सटीक बैठती है, वह हर किसी के लिए मुफीद हो यह कतई जरूरी नहीं है। हर इंसान की शारीरिक बनावट, उसकी उम्र, दिनभर की शारीरिक मेहनत, समग्र स्वास्थ्य और पोषण की आवश्यकताएं एक-दूसरे से काफी अलग होती हैं।
किसी भी प्रसिद्ध हस्ती की थाली की हूबहू नकल करके दूध, चीनी या गेहूं पर अचानक पाबंदी लगाने के बजाय अपने शरीर की वास्तविक जरूरतों को समझना अधिक महत्वपूर्ण है। एक संतुलित दैनिक दिनचर्या में घर का बना ताजा भोजन, ताजे मौसमी फल, हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल होना ही संपूर्ण स्वास्थ्य की असली बुनियाद है।


















