मुंबई में हुए 26/11 के आतंकवादी हमले के मुकदमे में अजमल कसाब को फांसी के फंदे तक पहुंचाने वाले मशहूर विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम के जीवन और ऐतिहासिक कानूनी संघर्ष पर आधारित सिनेमाई ड्रामा बड़े पर्दे पर दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है। राजकुमार राव अभिनीत इस अदालती ड्रामा फिल्म 'प्रहार: द उज्ज्वल निकम स्टोरी' को हरी झंडी देने से पहले वरिष्ठ अधिवक्ता ने प्रोडक्शन टीम के सामने बेहद कड़े दिशा-निर्देश तय किए थे। एक हालिया साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अपनी जिंदगी या अदालत की कार्यवाही को किसी काल्पनिक या अतिरंजित चश्मे से पर्दे पर नहीं देखना चाहते थे।
सच्चे घटनाक्रम और वास्तविक नामों के इस्तेमाल की सख्त शर्त
इस कानूनी गाथा को फिल्माने की सहमति देने के दौरान उज्ज्वल निकम ने सबसे बुनियादी बात यह रखी कि कहानी में किसी भी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा नायक बनाकर पेश करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उनका साफ मानना था कि अदालती रिकॉर्ड की प्रामाणिकता से कोई समझौता न हो और न्यायिक प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारियों और गवाहों के असली नामों को ही संवादों में जगह मिले। निर्माताओं ने इस शर्त का सम्मान करते हुए कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं।
इसी सिलसिले में फिल्म की टीम ने उस ऐतिहासिक फैसले से जुड़ी हर प्रमुख कानूनी हस्ती से बाकायदा अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी प्राप्त की। इनमें न्यायाधीश मदन लक्ष्मणदास तहलियानी भी शामिल रहे, जिन्होंने 6 मई 2010 को अपने ऐतिहासिक फैसले में आतंकी अजमल कसाब को मौत की सजा मुकर्रर की थी। पूरी प्रक्रिया को कानूनी रूप से पारदर्शी रखने के बाद ही पटकथा को अंतिम रूप दिया गया था।
राजकुमार राव के अभिनय और अदालती तेवर से हैरान रह गए वकील
स्क्रीन पर अपनी भूमिका निभाने वाले अभिनेता राजकुमार राव के काम को देखकर वरिष्ठ वकील बेहद प्रभावित नजर आए। उन्होंने अभिनेता के रूपांतरण की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा,
"मैं राजकुमार राव की दाद देना चाहूंगा, उन्होंने स्क्रीन पर बिल्कुल उज्ज्वल निकम को जी लिया है।"निकम ने साझा किया कि वास्तविक जिंदगी में बेहद शांत और शालीन दिखने वाले राजकुमार ने अदालत के कटघरे में जिस आक्रामकता और तार्किक ऊर्जा के साथ दलीलें पेश की हैं, वह दृश्य देखकर साथी वकील भी दंग रह गए। कई साथी वकीलों ने तो उनसे यह तक पूछ लिया कि क्या अभिनेता ने उनके साथ रहकर महीनों तक यह शैली सीखी है।
मुलाकात के बिना पुराने वीडियो फुटेज से तैयार हुआ कानूनी किरदार
दिलचस्प पहलू यह रहा कि शूटिंग के आगाज से पूर्व अभिनेता और वकील के बीच प्रत्यक्ष मुलाकात संभव नहीं हो सकी थी। दोनों के अत्यधिक व्यस्त कार्यक्रम के चलते व्यक्तिगत कार्यशालाएं नहीं हो पाई थीं। इस चुनौती से पार पाने के लिए राजकुमार राव ने तकनीक और अभिलेखीय सामग्रियों का सहारा लिया।
राजकुमार राव ने उज्ज्वल निकम की पुरानी अदालती बहसों, प्रेस वार्ताओं और जिरह के पुराने वीडियो फुटेज को घंटों देखकर उनकी शारीरिक भाषा, हाथ के इशारे और तल्ख दलीलों के लहजे को बारीकी से समझा। इसी गहन शोध के दम पर उन्होंने खुद को वरिष्ठ वकील के रूप में पूरी तरह ढाल लिया।
स्टार कास्ट और सिनेमाघरों में प्रदर्शन की तय तारीख
मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले तैयार की गई इस बायोग्राफिकल कोर्टरूम ड्रामा का निर्देशन अविनाश अरुण ने संभाला है। इस फिल्म में 26/11 के भीषण आतंकी हमले के बाद अजमल कसाब के खिलाफ लड़ी गई देश की सबसे बड़ी न्यायिक लड़ाई के हर मोड़ को दर्शाया गया है। मुख्य भूमिका में राजकुमार राव के अलावा पर्दे पर वामिका गब्बी, जयदीप अहलावत, सिकंदर खेर और आशीष विद्यार्थी जैसे मंझे हुए कलाकार अहम किरदारों में दिखाई देंगे। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है।



















