पंकज त्रिपाठी, अली फजल और दिव्येंदु शर्मा की फिल्म 'मिर्जापुर: द मूवी' सिनेमाघरों में जबरदस्त कमाई कर रही है और सीरीज के फैंस का प्यार दर्शकों को थिएटर तक खींच ला रहा है। इस फिल्म में बीना त्रिपाठी का किरदार निभाने वालीं रसिका दुग्गल ने अब बताया है कि शो में उनके इंटीमेट सीन्स आखिर परदे पर कैसे उतारे गए।
सेट पर मौजूद खास शख्स से मिली राहत
रसिका ने कहा कि बोल्ड सीन्स फिल्माते वक्त इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर के होने से उन्हें बहुत भरोसा मिला और वह बिना किसी संकोच के सहज होकर अपना काम कर पाईं। एएनआई से बातचीत में उन्होंने समझाया कि आजकल शूटिंग सेट्स पर इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर्स का होना आम बात है और यह कलाकारों की गरिमा बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी भी है। इनकी वजह से किसी भी कलाकार की निजी सीमाओं को पार नहीं किया जाता और हर किसी की सुविधा का ख्याल रखा जाता है। अपनी बात को उदाहरण से समझाते हुए एक्ट्रेस ने कहा, "यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी डांस नंबर के लिए कोरियोग्राफर और एक्शन सीन के लिए फाइट मास्टर होता है."
वर्कशॉप में पहले से तय होती हैं सीमाएं
रसिका ने बताया कि शूटिंग शुरू होने से पहले ही वर्कशॉप आयोजित की जाती हैं, जहां यह स्पष्ट कर लिया जाता है कि उनके लिए या उनके सह-कलाकार के लिए किन चीजों के साथ सहजता है और किनके साथ नहीं। निर्देशक अपनी सोच के मुताबिक दृश्य को किस तरह पर्दे पर उतारना चाहते हैं, इस पर भी आपसी बातचीत के जरिए ही राय बनाई जाती है, ताकि किसी को झिझक महसूस ना हो।
असहजता होने पर निकाला जाता है दूसरा रास्ता
उनके मुताबिक अगर किसी कलाकार को किसी खास दृश्य में असहजता महसूस होती है, तो टीम उस भावनात्मक असर को बनाए रखते हुए ही उसे फिल्माने का कोई वैकल्पिक तरीका खोज निकालती है। रसिका के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया अब बड़े सलीके और पेशेवर अंदाज में संभाली जाती है, और सेट पर इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर का मौजूद होना एक बेहतरीन कदम है, जिससे हर कलाकार को राहत मिलती है।
पहले से पता होता है सेट पर क्या होगा
एक्ट्रेस ने यह भी बताया कि अब कलाकारों को पहले से जानकारी दी जाती है कि किस दृश्य की शूटिंग कैसे होगी, और वे चाहें तो कम लोगों की मौजूदगी वाला सेट भी मांग सकते हैं। उनके मुताबिक पहले जब यह भूमिका किसी इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर के पास नहीं होती थी, तब भी यह जिम्मेदारी किसी न किसी की ही होती थी, मगर कलाकारों को यह साफ नहीं होता था कि अपनी बात किसके सामने रखें। रसिका ने कहा कि अब एक ही व्यक्ति यह तय करता है कि बंद सेट पर कौन मौजूद रहेगा और किसे वहां रुकने की जरूरत नहीं है, और जिन्हें जरूरत नहीं होती उन्हें फौरन सेट से बाहर भेज दिया जाता है।
पहले सीजन में नहीं था यह चलन
रसिका दुग्गल ने यह भी याद किया कि जब 'मिर्जापुर' के पहले सीजन की शूटिंग हो रही थी, तब भारत में इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर रखने का रिवाज ज्यादा प्रचलित नहीं था, हालांकि पश्चिमी देशों में यह व्यवस्था पहले से मौजूद थी। उनके अनुसार उस दौर में किस्मत से उनकी टीम और डायरेक्टर्स इतने संवेदनशील थे कि उन्होंने खुद ही यह जिम्मा उठाया और ध्यान रखा कि उन्हें हर फ्रेम और हर शॉट की पूरी जानकारी पहले से मिल जाए।
निर्देशक ने पहले ही दी थी ना कहने की आजादी
उन्होंने आगे बताया कि शूट शुरू होने से पहले ही निर्देशक ने उनसे खुलकर बातचीत की थी और उन्हें यह पूरी छूट दी गई थी कि अगर किसी बात पर असहजता महसूस हो तो वह साफ मना कर सकती हैं। रसिका के मुताबिक उस समय भी सबकुछ बड़ी सहूलियत से संभल गया था, लेकिन इसके बावजूद सेट पर इंटीमेसी को-ऑर्डिनेटर की मौजूदगी की अहमियत को कमतर नहीं आंका जा सकता, क्योंकि यह आज के दौर में बेहद जरूरी हो चुका है।


















