2 करोड़ रुपये के छोटे से बजट में बनी फिल्म हनुमान अंश ने बॉक्स ऑफिस पर वो कर दिखाया है जिसकी उम्मीद खुद बनाने वालों को भी नहीं थी। नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित यह फिल्म अब लगातार सुर्खियां बटोर रही है, लेकिन इसकी असली कहानी सिर्फ पर्दे पर नहीं, बल्कि इसके सेट पर बीते दिनों में छिपी है, जहां काम से ज्यादा भक्ति को तरजीह दी गई। ट्रेड सर्कल में भी इतने कम बजट की फिल्म का यह उलटफेर हैरानी की बात बना हुआ है, खासकर उस दौर में जब बड़े बजट की कई फिल्में सिनेमाघरों में दर्शक जुटाने के लिए जूझ रही हैं।
सेट पर भक्ति और अनुशासन का सख्त माहौल
फिल्म के लेखक और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने खुलासा किया कि शूटिंग के दौरान सेट का माहौल किसी आम फिल्मी सेट से बिल्कुल अलग रखा गया था। फिल्म की आध्यात्मिक भावना बनी रहे, इसके लिए टीम ने पूरी शूटिंग के दौरान खुद पर कुछ सख्त पाबंदियां लगाईं थीं। सेट पर गाली-गलौज करने की इजाजत नहीं थी, मांसाहारी खाना पूरी तरह बैन था और शराब को भी हमेशा सेट से दूर रखा गया। विशाल का कहना है कि टीम हर सुबह हनुमान चालीसा का पाठ करके ही कैमरा ऑन करती थी और दिनभर की शूटिंग खत्म होने पर शाम को भी यही परंपरा दोहराई जाती थी। उनके मुताबिक भक्ति और अनुशासन के इस मेल ने सेट पर आई हर छोटी-बड़ी अड़चन को आसानी से सुलझा दिया। इस अनुशासन ने कलाकारों और तकनीशियनों दोनों को पूरी शूटिंग के दौरान किरदार से भावनात्मक रूप से जुड़े रहने में भी मदद की।
'जय संतोषी मां' से मिली प्रेरणा
द रौनक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि उन्हें इस तरह की फिल्म बनाने की प्रेरणा जय संतोषी मां से मिली। उन्होंने कहा, जय संतोषी मां भारतीय सिनेमा की सबसे कामयाब फिल्मों में गिनी जाती है, लेकिन बहुत कम लोगों को इसकी असली कहानी पता है। विशाल ने बताया कि करीब डेढ़ साल से वह इस विषय पर सोच रहे थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि बॉलीवुड में इस तरह के भक्ति प्रधान सिनेमा की एक बड़ी कमी है। उन्होंने याद दिलाया कि शोले के साथ रिलीज हुई वह फिल्म अपने बजट से करीब 100 गुना ज्यादा कमाकर उस दौर की सबसे मुनाफे वाली भारतीय फिल्म बन गई थी। उनके मन में यह सवाल बार-बार उठता था कि इतना बड़ा जॉनर भारतीय सिनेमा से अचानक गायब क्यों हो गया और इतने दशकों में उसी तर्ज पर आगे फिल्में क्यों नहीं बनीं।
निर्देशक ने नहीं ली एक रुपया फीस, खुद रहे व्रत पर
हनुमान अंश के निर्माण और निर्देशन, दोनों जिम्मेदारियां संभालने वाले विशाल चतुर्वेदी ने यह भी साफ किया कि इस प्रोजेक्ट से उन्होंने खुद के लिए कोई कमाई नहीं रखी। उन्होंने कहा, मैं इस फिल्म का निर्माता और निर्देशक दोनों हूं, फिर भी मैंने एक रुपये की फीस भी नहीं ली। इतना ही नहीं, फिल्म रिलीज होने से पहले साढ़े चार महीने तक विशाल खुद सिर्फ फलाहार पर रहे, यह निजी अनुशासन उन्होंने टीम के नियमों के साथ-साथ खुद पर भी लागू किया। सेट पर भी सिर्फ शुद्ध शाकाहारी खाना परोसा जाता था, ताकि शूटिंग के पहले दिन से आखिरी दिन तक पूरी टीम फिल्म की भावना के साथ जुड़ी रहे। विशाल की यह निजी साधना बताती है कि उनके लिए यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक व्यावसायिक फिल्म नहीं बल्कि सीधे उनकी अपनी आस्था से जुड़ा काम था।
10 लाख से शुरू होकर 100 करोड़ के करीब पहुंची कमाई
सीमित संसाधनों और महज 2 करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई हनुमान अंश ने पहले दिन सिनेमाघरों से केवल 10 लाख रुपये जुटाए थे। लेकिन दर्शकों के बीच बनी मुंहजुबानी चर्चा ने इसकी कमाई को हर गुजरते दिन के साथ ऊपर धकेला और अब यह फिल्म कुल मिलाकर 100 करोड़ रुपये के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच चुकी है। इतने छोटे बजट से इतनी बड़ी कमाई तक का यह सफर फिल्म को साल 2026 की अब तक की सबसे बड़ी स्लीपर हिट फिल्मों की कतार में सबसे आगे खड़ा कर देता है। फिल्म में लीड रोल शोभिवन सत्य ने निभाया है, और रिलीज के हफ्तों बाद भी सिनेमाघरों में लगातार बढ़ता दर्शकों का हुजूम बताता है कि इसकी पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है।



















