मुंबई में आयोजित एक विशेष पुस्तक विमोचन समारोह के दौरान मंच पर जब जया बच्चन और प्रसिद्ध लेखक-निर्देशक गुलजार आमने-सामने आए, तो दोनों के बीच की पुरानी आत्मीयता साफ झलक रही थी। इस कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन भी उपस्थित थे। डॉक्टर पी. जगन्नाथ की पुस्तक 'डीआर ब्लू: ए कैंसर सर्जन्स जर्नी इनटू द ह्यूमन साइड ऑफ हीलिंग' के लोकार्पण के अवसर पर जया बच्चन काफी प्रसन्न मुद्रा में नजर आईं और गुलजार के साथ उनकी बातचीत के पलों ने वहां मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया। यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि हिंदी सिनेमा के उस सुनहरे दौर की याद दिला रही थी जब दोनों ने मिलकर कई यादगार प्रोजेक्ट्स पर काम किया था।
सिनेमाई सफर की शुरुआती कड़ी बनी फिल्म गुड्डी
जया बच्चन और गुलजार के आपसी संबंधों की जड़ें फिल्मी सेट पर ही मजबूत हुई थीं। जब जया बच्चन ने हिंदी फिल्म उद्योग में अपना करियर शुरू किया और अपने सहज अभिनय से एक नई पहचान गढ़ रही थीं, तभी उनका संपर्क गुलजार से हुआ। वर्ष 1971 में ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी फिल्म 'गुड्डी' इस रचनात्मक साझेदारी का पहला बड़ा पड़ाव साबित हुई। इस फिल्म में जया बच्चन ने शीर्षक किरदार यानी गुड्डी की मुख्य भूमिका निभाई थी, जिसने उन्हें रातोंरात दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया था।
फिल्म 'गुड्डी' के संवाद गुलजार ने ही लिखे थे। इसके साथ ही उन्होंने इस फिल्म के लिए एक ऐसा अमर गीत रचा जो आज भी भारतीय जनमानस में रचा-बसा है। 'हमको मन की शक्ति देना' शीर्षक वाला यह प्रार्थना गीत दशकों बाद भी देश भर के अनेक स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभाओं में गाया जाता है। संवाद और अभिनय के इस मेल ने दोनों कलाकारों के बीच एक मजबूत रचनात्मक तालमेल की नींव रख दी थी।
बतौर निर्देशक गुलजार की फिल्मों में जया की मुख्य भूमिका
गुलजार ने जब स्वतंत्र रूप से निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा, तो उन्होंने अपनी शुरुआती दो महत्वपूर्ण फिल्मों में मुख्य भूमिका के लिए जया बच्चन पर ही भरोसा जताया। वर्ष 1972 में प्रदर्शित हुई फिल्म 'कोशिश' इस कड़ी का सबसे संवेदनशील उदाहरण है। गुलजार के निर्देशन में बनी इस फिल्म में जया बच्चन और संजीव कुमार ने मुख्य किरदार निभाए थे। फिल्म में जया बच्चन ने आरती माथुर नाम की मूक-बधिर युवती का किरदार निभाया, जबकि संजीव कुमार ने हरि की भूमिका अदा की थी। समाज में दिव्यांग दंपती के संघर्ष, उनके जीवन के उतार-चढ़ाव और आपसी रिश्ते की गहराई को इस कहानी के केंद्र में रखा गया था।
उसी वर्ष यानी 1972 में ही गुलजार के निर्देशन में बनी एक और क्लासिक फिल्म 'परिचय' सामने आई, जिसमें जया बच्चन ने रमा रॉय का अहम किरदार निभाया। इस फिल्म में उनके साथ जितेंद्र और प्राण जैसे दिग्गज कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। 'परिचय' की कहानी पारिवारिक रिश्तों, अनुशासनात्मक संघर्षों, बच्चों के मनोविज्ञान और भावनात्मक जुड़ाव के महत्व को बड़ी ही सादगी से पर्दे पर प्रस्तुत करती है।
बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रहीं दोनों क्लासिक फिल्में
निर्देशन के स्तर पर गुलजार और अभिनय के स्तर पर जया बच्चन का यह संयोजन टिकट खिड़की पर भी बेहद कामयाब साबित हुआ। वर्ष 1972 में रिलीज हुईं 'कोशिश' और 'परिचय', दोनों ही फिल्मों को दर्शकों और समीक्षकों की भरपूर सराहना मिली। इन दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट का दर्जा हासिल किया और समय के साथ भारतीय सिनेमा के इतिहास में क्लासिक कृतियों के रूप में दर्ज हो गईं। गंभीर मानवीय संवेदनाओं को व्यावसायिक सफलता के साथ जोड़ने का यह एक दुर्लभ उदाहरण बना।
बच्चन परिवार से गुलजार का दशकों पुराना नाता
गुलजार का यह गहरा संबंध सिर्फ जया बच्चन तक ही सीमित नहीं रहा है, बल्कि पूरे बच्चन परिवार के साथ उनके रिश्ते कई दशकों पुराने हैं। अमिताभ बच्चन के साथ भी उनका पेशेवर जुड़ाव सिनेमाई जगत में लंबे समय से बना हुआ है। दोनों ने अलग-अलग भूमिकाओं और रचनात्मक स्तरों पर एक साथ काम किया है। इसके अलावा साहित्य, कविता और कलात्मक सिनेमा के प्रति दोनों की गहरी रुचि ने इस व्यक्तिगत और पेशेवर संबंध को और भी अधिक मजबूत बनाया है।



















