किसी दूसरे देश से आकर भारतीय फिल्म उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन 1990 और 2000 के दशक में अपनी मनमोहक अदाकारी, असाधारण सुंदरता और बेहतरीन नृत्य शैली से मनीषा कोइराला ने बॉलीवुड की अग्रिम पंक्ति की अभिनेत्रियों में अपना स्थान पक्का किया। हिंदी सिनेमा के अलावा उन्होंने तमिल, तेलुगु, मलयालम और नेपाली भाषा की कई फिल्मों में भी अपनी कला का लोहा मनवाया है।
नेपाल के शाही राजनीतिक परिवार से संबंध
मनीषा कोइराला का जन्म 16 अगस्त 1970 को नेपाल की राजधानी काठमांडू में हुआ था। उनका संबंध नेपाल के बेहद प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से रहा है। उनके पिता प्रकाश कोइराला नेपाल सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और उनकी माता का नाम सुषमा कोइराला है। उनके पारिवारिक प्रभाव और राजनीतिक साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके दादाजी विश्वेश्वर प्रसाद कोइराला नेपाल के प्रधानमंत्री पद पर आसीन रह चुके हैं। इतने बड़े राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखने के बावजूद उन्होंने अपने करियर के लिए अभिनय के क्षेत्र को चुना।
बॉलीवुड में ब्लॉकबस्टर डेब्यू और सिनेमाई सफर
वर्ष 1991 में प्रसिद्ध निर्देशक सुभाष घई की ब्लॉकबस्टर फिल्म सौदागर से मनीषा कोइराला ने अपने बॉलीवुड करियर की शुरुआत की थी। इस पहली ही फिल्म की विशाल सफलता और उनके अभिनय की सराहना ने उन्हें रातों-रात इंडस्ट्री की उभरती हुई शीर्ष अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपने अभिनय करियर में कई बेहतरीन फिल्मों की झड़ी लगा दी, जिनमें 1942: ए लव स्टोरी, बॉम्बे, खामोशी: द म्यूजिकल, दिल से.. और कंपनी जैसी कालजयी फिल्में शामिल हैं। हाल के दिनों में उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई मशहूर वेब सीरीज हीरामंडी: द डायमंड बाजार में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
पुरस्कार, सम्मान और अभिनय क्षमता
डेब्यू फिल्म से मिली अपार शोहरत के बाद मनीषा कोइराला ने अपने अभिनय के दम पर आलोचकों का दिल जीता। फिल्म कंपनी में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें फिल्मफेयर क्रिटिक्स बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार दिया गया था। अपने सफल सिनेमाई सफर के दौरान उन्होंने अब तक तीन बार फिल्मफेयर क्रिटिक्स बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड और एक फिल्मफेयर OTT पुरस्कार हासिल किया है, जो उनकी बेहतरीन अदाकारी को दर्शाते हैं।
कैंसर से जंग, तलाक और व्यक्तिगत जीवन
जब मनीषा कोइराला का फिल्मी करियर सफलता की ऊंचाइयों पर था, तभी उनके व्यक्तिगत जीवन में मुश्किलों का दौर शुरू हुआ। साल 2010 में उन्होंने नेपाल के व्यवसायी सम्राट दहल से विवाह किया, हालांकि यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चल सका और वर्ष 2012 में दोनों का तलाक हो गया। इसी वर्ष 2012 में उन्हें स्टेज-4 ओवेरियन कैंसर होने का पता चला। इस गंभीर स्थिति के बाद उन्होंने अमेरिका के न्यू यॉर्क में अपना इलाज कराया। अपने मजबूत हौसले और सही इलाज के बल पर उन्होंने कैंसर को मात दी और वर्ष 2013 से वह पूरी तरह कैंसर-मुक्त हैं।
कैंसर जागरूकता और सामाजिक योगदान
गंभीर बीमारी से उबरने के बाद मनीषा कोइराला आज के समय में लाखों महिलाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन चुकी हैं। वह कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक मंचों पर खुलकर अपने विचार रखती हैं। इसके अलावा वह सोशल मीडिया पर भी महिलाओं के स्वास्थ्य और कल्याण से संबंधित विषयों पर सक्रियता से संवाद करती हैं।



















