फिल्म निर्देशक नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही भव्य फिल्म रामायण को लेकर चर्चाएं बेहद तेज हो गई हैं। हाल ही में इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की पहली झलक सामने आने के बाद जहां दर्शक बेहद उत्साहित नजर आ रहे थे, वहीं अब इसके मुख्य कलाकारों को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पौराणिक महाकाव्य पर आधारित इस फिल्म में भगवान राम का किरदार निभा रहे अभिनेता रणबीर कपूर की कास्टिंग पर सवाल उठाए जा रहे हैं। अभिनेत्री निकिता रावल ने रणबीर कपूर को इस पावन भूमिका में चुने जाने पर गहरा विरोध जताया है और जनता से इस प्रोजेक्ट का बहिष्कार करने का आह्वान किया है।
बीफ वाले पुराने बयान को लेकर निकिता रावल ने जताई आपत्ति
एक हालिया साक्षात्कार के दौरान निकिता रावल ने रणबीर कपूर के चयन पर अपनी कड़ी असहमति व्यक्त की। उनका कहना था कि रणबीर कपूर इस पवित्र और मर्यादा पुरुषोत्तम के चरित्र को निभाने के लिए उपयुक्त कलाकार नहीं हैं। अभिनेत्री ने तर्क दिया कि जिस व्यक्ति ने सार्वजनिक तौर पर अतीत में बीफ यानी गोमांस खाने की बात स्वीकार की हो, वह पर्दे पर प्रभु राम का रूप कैसे धर सकता है। निकिता रावल के अनुसार, मेकर्स द्वारा लिया गया यह फैसला करोड़ों श्रद्धालुओं और सनातन धर्म में विश्वास रखने वाले लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
कास्टिंग के फैसले पर मेकर्स को घेरते हुए निकिता रावल ने कहा, "जो इंसान खुलेआम बीफ खाने की बात कह चुका है, वह इस पवित्र किरदार के योग्य नहीं है।" उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से जुड़े कलाकार को मर्यादा पुरुषोत्तम राम के रूप में प्रस्तुत करना धार्मिक भावनाओं और चरित्र की गरिमा का अपमान है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि इस संवेदनशील मुद्दे पर तमाम हिंदू संगठन आखिर चुप क्यों हैं।
सार्वजनिक माफी की मांग और सोशल मीडिया पर बहिष्कार का आह्वान
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए निकिता रावल ने स्पष्ट किया कि भले ही अन्य लोग इस विषय पर मौन रहें, लेकिन वह अपनी आवाज उठाती रहेंगी। उनका मानना है कि यह केवल किसी कलाकार की व्यक्तिगत पसंद का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों नागरिकों की अटूट धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ प्रश्न है। उन्होंने जोर देकर कहा कि रणबीर कपूर को अपने पुराने बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। अभिनेत्री ने कहा कि किसी बड़े किरदार को पर्दे पर जीवंत करने के साथ-साथ जनता की भावनाओं का सम्मान करना भी उतना ही आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने फिल्म के बहिष्कार की मांग करते हुए सोशल मीडिया पर बॉयकॉट अभियान चलाने की बात कही है।
श्री रामलीला महासंघ ने भी पहले दी थी चेतावनी
गौरतलब है कि नितेश तिवारी की फिल्म रामायण को लेकर विरोध का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले श्री रामलीला महासंघ ने भी फिल्म के निर्माताओं को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी जारी की थी। महासंघ ने मेकर्स से यह मांग रखी थी कि सिनेमाघरों में प्रदर्शन से पूर्व इस फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग उनके प्रतिनिधियों के लिए आयोजित की जाए। संगठन का कहना था कि यदि फिल्म में सनातन संस्कृति, पौराणिक संदर्भों या धार्मिक तथ्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या गलत चित्रण पाया गया, तो वे इसके खिलाफ व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।



















