भारतीय सिनेमा के इतिहास में सत्तर के दशक के कई रोमांटिक तराने आज भी अपनी ताजगी बनाए हुए हैं। किसी अजनबी चेहरे से अचानक हुई मुलाकात और फिर अनजाने में पनपते प्रेम के एहसास को दर्शाने वाला ऐसा ही एक मधुर गीत उस दौर की खास पहचान बन चुका है। बिना किसी पूर्व परिचय या रिश्ते के शुरू हुई यह कहानी धीरे-धीरे दिल के तारों को छू लेती है। किशोर कुमार की गायकी ने पहली नजर के आकर्षण और अनकही मोहब्बत को जिस सलीके से सुरों में पिरोया, वह आज भी संगीत प्रेमियों को अपनी ओर खींच लेता है।
राजेश खन्ना और ज़ीनत अमान की पर्दे पर सहज केमिस्ट्री
यह सदाबहार रचना साल 1974 में रिलीज हुई फिल्म 'अजनबी' का बेहद लोकप्रिय गीत 'एक अजनबी हसीना से' है। इस फिल्म में राजेश खन्ना और ज़ीनत अमान की मुख्य जोड़ी नजर आई थी। पर्दे पर इन दोनों कलाकारों की सहज अदाकारी और भावुक अंदाज ने इस ट्रैक को हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित रोमांटिक नगमों की फेहरिस्त में शामिल कर दिया। दृश्य के दौरान दोनों का तालमेल इतना स्वाभाविक लगता है कि दर्शक देखते ही उस सुनहरे दौर के आकर्षण में डूब जाते हैं। निर्देशक शक्ति सामंत ने इस पूरे दृश्य और गाने के एक-एक फ्रेम को बड़ी नफासत और भावनात्मक गहराई के साथ कैमरे में कैद किया था।
किशोर कुमार की चुलबुली गायकी और पंचम दा का संगीत
इस गीत की सबसे बड़ी ताकत किशोर कुमार की गायकी रही, जिसमें उन्होंने रोमांस के साथ हल्की शरारत और कोमलता का अनूठा संतुलन बनाया। वहीं धुन तैयार करने की कमान आर.डी. बर्मन यानी पंचम दा के हाथों में थी। उन्होंने एक बेहद सरल, सहज और हमेशा याद रह जाने वाली मेलोडी तैयार की। गीतकार आनंद बख्शी के लिखे बोल इस रचना का मूल आधार बने। शुरुआती झिझक, किसी अनजाने चेहरे के प्रति गहरा आकर्षण और मन में उठने वाली नई उमंगों को उन्होंने बहुत ही सीधे, सरल और असरदार शब्दों में बयां किया था।
1974 की इस रिलीज में दिखा दो अलग मिजाज के सितारों का संगम
शक्ति सामंत के निर्देशन में बनी फिल्म 'अजनबी' की कहानी और गानों दोनों को ही रिलीज के समय दर्शकों ने हाथों-हाथ लिया था। 1974 के उस दौर में राजेश खन्ना हिंदी फिल्म जगत के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में शुमार थे, जबकि ज़ीनत अमान अपनी आधुनिक छवि और नई शैली के दम पर अपनी एक अलग पहचान स्थापित कर रही थीं। इन दो बिल्कुल अलग तरह के कलाकारों का एक साथ स्क्रीन पर आना ही इस पूरे गीत के आकर्षण को कई गुना बढ़ा देता है।
भारी-भरकम संवादों के बिना केवल अहसासों से रची गई मोहब्बत
'एक अजनबी हसीना से' की खूबी यह है कि इसमें प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए किसी बनावटी या भारी-भरकम संवाद का सहारा नहीं लिया गया। केवल एक छोटी सी मुलाकात, चेहरे पर उभरते सच्चे भाव और पार्श्व में गूंजती किशोर कुमार की सुरीली आवाज इस पूरे दृश्य को जादुई बनाने के लिए काफी साबित हुई। कई दशक बीत जाने के बावजूद, जब भी सत्तर के दशक के प्रेम गीतों की चर्चा होती है, यह गीत सुनते ही पुराने दौर का वही मासूम और गहरा रोमांस फिर से जीवंत हो उठता है।



















