साल 1989 में रिलीज हुई फिल्म बटवारा का निर्देशन जाने-माने फिल्म निर्माता जे. पी. दत्ता ने किया था। इस फिल्म की कहानी और अभिनय के साथ-साथ इसके संगीत ने भी दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा था। विशेष रूप से फिल्म का लोकगीत थारे वास्ते रे ढोला उस दौर का सबसे बड़ा हिट साबित हुआ और आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय है।
तीन प्रमुख गायिकाओं की अनोखी जुगलबंदी
इस गीत की सबसे बड़ी खासियत इसकी गायकी थी। उस समय की तीन प्रसिद्ध पार्श्व गायिकाओं अलका याग्निक, अनुराधा पौडवाल और कविता कृष्णमूर्ति ने एक साथ आकर इस गाने में अपने सुर दिए थे। एक ही रचना में तीन प्रमुख महिला गायिकाओं का शामिल होना हिंदी सिनेमा संगीत की एक दुर्लभ और ऐतिहासिक घटना मानी जाती है। प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने इस गीत की धुन तैयार की थी, जिसमें राजस्थानी लोक संगीत का बेहतरीन समावेश किया गया था।
परदे पर तीन अभिनेत्रियों की सुरीली अभिव्यक्ति
फिल्म में इस गीत को तीन प्रमुख अभिनेत्रियों अमृता सिंह, पूनम ढिल्लो और डिंपल कपाड़िया पर फिल्माया गया था। गीत के दृश्यों में तीनों अभिनेत्रियां अपने-अपने साजन की याद में अपनी भावनाएं व्यक्त करती नजर आती हैं। शानदार संगीत, अर्थपूर्ण बोल और तीनों अभिनेत्रियों के प्रभावशाली अभिनय की बदौलत यह गाना भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में एक अमर रचना बन गया।



















