फिल्म ‘रामायण: राइज ऑफ ए लीजेंड’ के वैवाहिक गीत ‘मंगल रंग’ को लेकर श्रोताओं और समीक्षकों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। प्रभु श्री राम और माता जानकी के विवाह प्रसंग पर आधारित इस रचना को लेकर सोशल मीडिया और संगीत समीक्षकों के बीच मिलीजुली राय देखने को मिल रही है। कई समीक्षकों का यह तर्क है कि इस गीत की धुन में सूफी और कव्वाली शैली का प्रभाव झलकता है, जिसे वे एक प्राचीन हिंदू महाकाव्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के अनुकूल नहीं मानते। इतना ही नहीं, संगीत प्रेमियों का एक वर्ग इसकी तुलना एआर रहमान के कालजयी सूफी गीत ‘कुन फाया कुन’ से करते हुए यह कह रहा है कि इसमें जाने-पहचाने पुराने सुरों के ढांचे को दोहराया गया है। मूल हिंदी ट्रैक में अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल के सुर सजे हैं, जबकि दक्षिण भारतीय भाषाओं में अन्य कलाकारों ने अपनी आवाज दी है।
गीत के मिजाज और रचनात्मक स्वतंत्रता पर गायक का दृष्टिकोण
इस पूरे वाद-विवाद के बीच गीत के कन्नड़ रूपांतरण ‘मंगला संगम’ को अपनी आवाज देने वाले पार्श्व गायक अरमान मलिक ने पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से अपनी सोच साझा की है। उनका मानना है कि किसी भी कलात्मक रचना की व्याख्या हर व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत दृष्टि और समझ के अनुसार करता है। अरमान के शब्दों में,
"कोई सुनने वाला संगीत को किस तरह समझता है, यह हमेशा उसकी अपनी सोच पर निर्भर करता है और कला का स्वभाव ही यही है।"उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपोजिशन के निर्माण के दौरान पूरी संगीत टोली का एकमात्र उद्देश्य प्रभु राम और माता सीता के पावन प्रेम की रूहानियत को पूरी गरिमा के साथ व्यक्त करना था। एक गायक के नाते उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता इस पवित्र क्षण के प्रति पूर्ण आदर और निष्ठा बनाए रखने की थी।
रणबीर कपूर और साई पल्लवी के अभिनय का प्रभाव
अरमान मलिक ने पर्दे पर मुख्य पात्रों को जीवंत करने वाले कलाकारों रणबीर कपूर और साई पल्लवी के समर्पण की भी मुक्तकंठ से सराहना की। उनका कहना है कि इतने पूजनीय ऐतिहासिक और धार्मिक चरित्रों को निभाना किसी भी अभिनेता के लिए एक बेहद गंभीर दायित्व होता है। दोनों ही कलाकारों के स्वभाव में एक नैसर्गिक शिष्टता और गरिमा है, जो सीधे कैमरे के माध्यम से दर्शकों के दिलों को छू लेती है। उनका मानना है कि पार्श्व गायक केवल धुन में छिपे भावों की नींव तैयार करता है, लेकिन जब स्क्रीन पर मौजूद कलाकार उस भावना को गहराई से आत्मसात करते हैं और उनकी आंखों में वह सच्चाई दिखती है, तभी कोई गीत पूरी तरह जीवंत होकर अपने मूल उद्देश्य को सिद्ध करता है।
बचपन के सपने और करियर का नया मुकाम
इस बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ना गायक के लिए केवल एक पेशेवर काम नहीं, बल्कि उनके बरसों पुराने अरमानों की पूर्ति जैसा है। अपने शुरुआती दौर से ही वे हिंदी सिनेमा के दिग्गज रोमांटिक चेहरों के लिए गाना चाहते थे। रणबीर कपूर की ऑन-स्क्रीन आवाज बनना उनके लिए एक निजी उपलब्धि है, क्योंकि उनकी पीढ़ी के युवाओं के लिए रणबीर ने पर्दे पर रोमांस और मानवीय भावनाओं को नए आयाम दिए हैं। यह सफर इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि अरमान ने अपनी किशोरावस्था में निर्देशक नितेश तिवारी की लोकप्रिय फिल्म ‘चिल्लर पार्टी’ में बाल गायक के रूप में काम किया था। सालों बाद उसी निर्देशक के इतने विशाल कैनवास वाले प्रोजेक्ट में वापसी करना उनके लिए भावनात्मक रूप से बहुत खास अनुभव रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह इच्छा भी जताई कि भविष्य में उन्हें शाहरुख खान के लिए भी एक रोमांटिक गाना गाने का मौका मिले।
रहमान के साथ साझेदारी और कन्नड़ श्रोताओं से जुड़ाव
इस ट्रैक के जरिए अरमान मलिक ने संगीतकार एआर रहमान के मार्गदर्शन में पहली बार कन्नड़ भाषा में गायन किया है। ऑस्कर विजेता संगीत निर्देशक के साथ काम करने के अनुभव को असाधारण बताते हुए उन्होंने कहा कि जब रहमान जैसा पारखी संगीतकार किसी खास धुन के लिए आपकी गायकी पर भरोसा जताता है, तो कलाकार को उनकी दृष्टि पर बिना किसी संशय के विश्वास करना चाहिए। अरमान ने यह भी रेखांकित किया कि कर्नाटक के संगीत प्रेमियों के साथ उनका रिश्ता हमेशा से बेहद आत्मीय और गहरा रहा है। दक्षिण के श्रोताओं से मिले स्नेह के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि इतने प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट के लिए कन्नड़ में सुर सजाना उनके दिल के बेहद करीब रहा है।



















