राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले से लोकतांत्रिक निष्ठा की एक बेहद प्रेरणादायी और संघर्षपूर्ण तस्वीर सामने आई है. जिले की धमोतर पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाले कर्मी गांव के निवासियों ने दिखा दिया कि बुनियादी सुविधाओं का अभाव और भौगोलिक बाधाएं भी उनके मताधिकार के संकल्प को डिगा नहीं सकतीं. चारों तरफ से पानी और बीहड़ों से घिरे होने के बावजूद, यहां के महिला और पुरुष मतदाताओं ने पंचायतीराज चुनाव में बढ़-चढ़कर मतदान किया और अपने नागरिक कर्तव्य को निभाया.
बुनियादी सुविधाओं से महरूम 250 की आबादी वाला गांव
कर्मी गांव की कुल आबादी लगभग 250 लोगों की है, लेकिन यह छोटा सा इलाका आज भी आधुनिक विकास की रोशनी से पूरी तरह वंचित है. यहां रहने वाले बाशिंदे सड़क संपर्क, नियमित बिजली आपूर्ति और स्वास्थ्य जैसी प्राथमिक जरूरतों के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं. मुख्यधारा से कटे रहने के कारण स्थानीय आबादी का रोजमर्रा का जीवन बेहद कठिन बना हुआ है, फिर भी चुनावी प्रक्रिया में उनकी हिस्सेदारी किसी बड़े शहर से कम नजर नहीं आई.
मतदान केंद्र तक 13 किलोमीटर का जोखिम भरा सफर
इस गांव के मतदाताओं के लिए वोट डालने का सफर किसी बड़ी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था. मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को कुल 13 किलोमीटर की लंबी और खतरनाक यात्रा पूरी करनी पड़ी. इस रास्ते का पहला पड़ाव जाखम बांध का गहरा पानी है, जिसे पार करने के लिए ग्रामीणों को करीब 3 किलोमीटर तक नाव का सहारा लेना पड़ा. पानी के इस जोखिम भरे रास्ते के बाद भी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं, क्योंकि नाव से उतरने के बाद लगभग 10 किलोमीटर का सफर घने जंगलों के बीच बने कच्चे और पथरीले रास्तों से पैदल या सीमित साधनों के जरिए तय करना पड़ा.
प्रशासनिक फेरबदल के बाद भी हालात जस के तस
प्रशासनिक व्यवस्था पर नजर डालें तो कर्मी गांव पूर्व में ग्राम पंचायत ग्यासपुर का हिस्सा हुआ करता था. बाद में परिसीमन और प्रशासनिक पुनर्गठन के दौरान नई ग्राम पंचायत अनूपपुर बनाई गई, जिसमें कर्मी गांव को सम्मिलित कर लिया गया. प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव होने और नई पंचायत का गठन होने के बावजूद गांव की जमीनी हकीकत नहीं बदली. भौगोलिक दुश्वारियां और बुनियादी ढांचे की कमी आज भी वैसी ही बनी हुई है जैसी वर्षों पहले थी.
ग्रामीणों का अदम्य जज्बा और स्थायी समाधान की मांग
तमाम संकटों और प्रशासनिक बेरुखी को दरकिनार करते हुए, पंचायत चुनाव के दिन मतदाताओं में गजब का उत्साह देखा गया. जान जोखिम में डालकर पानी और जंगल का रास्ता पार करने वाले इन मतदाताओं ने अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए वोट का सहारा लिया. मतदान के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग उठाई है कि उनकी सड़क और सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी समस्याओं की ओर फौरन ध्यान दिया जाए, ताकि भविष्य में उन्हें अपनी मूलभूत जरूरतों और नागरिक अधिकारों के लिए इस कदर संघर्ष न करना पड़े.



















