साल 1991 में आई माधुरी दीक्षित, सलमान खान और संजय दत्त की फिल्म साजन सिर्फ अपनी कहानी की वजह से नहीं, बल्कि अपने गानों की वजह से भी बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी. लॉरेंस डिसूजा के निर्देशन में बनी इस फिल्म का हर गाना उस दौर में जबरदस्त हिट हुआ था और आज भी लोग इन्हें गुनगुनाते नजर आते हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म का सबसे मशहूर गाना असल में शूटिंग खत्म होने के बाद, आखिरी वक्त पर फिल्म में जोड़ा गया था.
महज 36 दिन में पूरी हुई शूटिंग, दो आवाजों ने भरा जादू
आईएमडीबी के मुताबिक, फिल्म साजन की पूरी शूटिंग सिर्फ 36 दिन में निपटा ली गई थी, जो उस दौर के हिसाब से भी बेहद तेज रफ्तार मानी जाती है. फिल्म में सलमान खान के किरदार को अपनी आवाज एसपी बालासुब्रमण्यम ने दी थी, जबकि संजय दत्त के किरदार के लिए पार्श्व गायन कुमार सानू ने किया था. इन दोनों दिग्गज गायकों की आवाज ने फिल्म के गानों को उस समय के दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया था.
पोस्ट प्रोडक्शन में डायरेक्टर को खली एक कमी
अप्रैल 1991 तक फिल्म साजन की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी थी और फिल्म पोस्ट प्रोडक्शन के दौर में पहुंच चुकी थी. लेकिन इसी दौरान निर्देशक लॉरेंस डिसूजा को महसूस हुआ कि फिल्म के म्यूजिक में अभी भी कोई एक चीज कमी है. उन्हें ऐसा साउंडट्रैक चाहिए था जो सुनने में जोशीला हो और साथ ही दर्शकों को पहली ही बार में पसंद आ जाए. यही सोच आगे चलकर फिल्म के सबसे बड़े गाने की वजह बनी.
नदीम-श्रवण से मांगा गया खास पेपी गाना
इसी कशमकश के बीच लॉरेंस डिसूजा उस दौर की मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर जोड़ी नदीम-श्रवण के पास पहुंचे. उन्होंने दोनों को फिल्म साजन की पूरी कहानी सुनाई और एक ऐसा गाना तैयार करने की फरमाइश की जो शानदार होने के साथ-साथ पेपी और एनर्जेटिक भी हो. निर्देशक की इसी फरमाइश के बाद नदीम-श्रवण ने गाना देखा है पहली बार तैयार किया, जो आगे चलकर फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया.
रिलीज के बाद बन गया सदाबहार गाना
देखा है पहली बार गाने ने रिलीज के बाद ऐसा असर छोड़ा कि यह बॉलीवुड के सदाबहार गानों की फेहरिस्त में शामिल हो गया. फिल्म साजन की कामयाबी के साथ-साथ यह गाना नदीम-श्रवण के पूरे करियर के सबसे शानदार गीतों में भी गिना जाने लगा. दिलचस्प बात यह है कि यह गाना शुरुआत में फिल्म की स्क्रिप्ट का हिस्सा ही नहीं था, फिर भी आज इसके बिना फिल्म साजन की कल्पना करना लगभग नामुमकिन जैसा लगता है. यह गाना अब फिल्म का इतना अहम हिस्सा बन चुका है कि इसके बिना फिल्म को याद करना ही मुश्किल हो जाता है.
यानी जिस गाने को आज दर्शक फिल्म साजन की असली पहचान मानते हैं, वह बनने से महज एक कदम दूर रह गया था. अगर निर्देशक लॉरेंस डिसूजा को आखिरी वक्त पर साउंडट्रैक में वह कमी महसूस नहीं होती और उन्होंने नदीम-श्रवण से नया गाना बनाने की गुजारिश नहीं की होती, तो शायद देखा है पहली बार गाना कभी बन ही नहीं पाता और फिल्म का यह सबसे यादगार पल हमेशा के लिए अधूरा रह जाता.



















