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सैलरी मिलते ही पहले खुद को दें पैसे, आर्थिक विशेषज्ञ शरद कोहली ने बताया बचत का अनोखा फार्मूलाव्यापार
6 सित॰ 2026, 7:18 pm (20 मिनट पहले)· 3

सैलरी मिलते ही पहले खुद को दें पैसे, आर्थिक विशेषज्ञ शरद कोहली ने बताया बचत का अनोखा फार्मूला

जानेमाने अर्थशास्त्री शरद कोहली ने सलाह दी है कि सैलरी मिलते ही सबसे पहले अपने भविष्य के लिए निवेश की राशि अलग कर लेनी चाहिए, न कि पहले सारे खर्च चुकाने चाहिए।

नौकरीपेशा लोगों के जीवन में हर महीने वेतन आने के साथ ही खर्चों की लंबी फेहरिस्त भी सामने आ जाती है। खाते में पैसे आते ही यह तय होने लगता है कि दूध वाले का भुगतान कितना करना है और किराने के सामान पर कितनी राशि खर्च होगी। अधिकतर लोग अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा रोजाना की जरूरतों और बिलों को चुकाने में ही खर्च कर देते हैं। हालांकि वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि पैसों के प्रबंधन का यह पुराना तरीका पूरी तरह से गलत है और इससे भविष्य सुरक्षित नहीं हो पाता है।

खुद के लिए कमाने का क्या अर्थ है

जानेमाने अर्थशास्त्री और बाजार विशेषज्ञ शरद कोहली ने एक बातचीत के दौरान इस पारंपरिक सोच पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने तीखे अंदाज में कहा है कि अधिकांश लोग केवल दूध वाले, किराना व्यापारी और कैब चालकों की जेब भरने के लिए ही दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। उनका यह बयान पहली नजर में थोड़ा अटपटा लग सकता है क्योंकि ये सभी सेवाएं व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में खुद ही इस्तेमाल करता है। लेकिन इसका गहरा अर्थ यह है कि लोग अपनी गाढ़ी कमाई का अधिकांश हिस्सा तुरंत खर्च कर देते हैं और खुद के लिए कुछ भी नहीं बचा पाते हैं।

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पारंपरिक खर्च करने की आदत को बदलना जरूरी

विशेषज्ञ के अनुसार यदि आप अपने आने वाले कल को आर्थिक रूप से मजबूत और सुरक्षित बनाना चाहते हैं, तो आपको पैसे खर्च करने के अपने तरीके में बदलाव लाना होगा। अमूमन लोगों की यह आदत होती है कि वे महीने की शुरुआत में सारे बिल चुकाते हैं और महीने के अंत में जो राशि बचती है, उसे बचाने की सोचते हैं। लेकिन यह तरीका बिल्कुल उल्टा है। नियम यह होना चाहिए कि सैलरी हाथ में आते ही सबसे पहले निवेश या बचत की जाने वाली रकम को अलग कर लिया जाए और बाकी बचे हुए पैसों से ही अपने सारे महीनेभर के खर्च चलाए जाएं।

निवेश और बजट का व्यावहारिक गणित

इस बात को उदाहरण के जरिए समझें तो यदि किसी व्यक्ति की मासिक आय 40,000 रुपये है, तो उसे सबसे पहले उस आय का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा यानी 8,000 रुपये सीधे निवेश या बचत के रूप में अलग निकाल लेना चाहिए। इसके बाद जो शेष 32,000 रुपये बचते हैं, उसी सीमा के भीतर उसे अपने परिवार के सभी जरूरी खर्चों को प्रबंधित करना चाहिए। कई लोग यह सवाल उठा सकते हैं कि जब पूरे 40,000 रुपये में महीने का खर्च चलाना मुश्किल होता है, तो 32,000 रुपये में कैसे काम चलेगा। इस पर विशेषज्ञ का स्पष्ट कहना है कि ऐसी स्थिति में व्यक्ति को अपनी जीवनशैली और फिजूलखर्ची को सीमित करना होगा, तभी उसका भविष्य सुरक्षित हो सकता है।

बचत सुरक्षित रखने का अनोखा उपाय

आप जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी रकम क्यों न कमा लें, लेकिन अंत में वही धन आपके काम आएगा जिसे आपने आज बचाकर रखा है। लोगों की गलत मानसिकता यह होती है कि वे पहले सारे शौक और खर्चे पूरे करते हैं और बचत को प्राथमिकता नहीं देते। इस आदत को सुधारने के लिए एक बेहद दिलचस्प सुझाव भी दिया गया है कि जिस बैंक खाते में आप अपनी बचत के पैसे जमा करते हैं, उस खाते का एटीएम कार्ड या तो नष्ट कर देना चाहिए या कहीं दूर रख देना चाहिए। इससे आपके मन में कभी भी उन पैसों को अचानक से निकाल कर खर्च करने का लालच नहीं आएगा और आपका भविष्य आर्थिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित बना रहेगा।

सवाल-जवाब

सैलरी आते ही सबसे पहले क्या करना चाहिए?
सैलरी आते ही सबसे पहले खुद के लिए यानी भविष्य के निवेश और बचत के लिए पैसे अलग निकाल लेने चाहिए।
विशेषज्ञ के अनुसार 40,000 रुपये की सैलरी पर कितना निवेश करना चाहिए?
40,000 रुपये की सैलरी का 20 प्रतिशत यानी करीब 8,000 रुपये निवेश के लिए अलग कर देना चाहिए।
खर्चे पूरे न होने की स्थिति में क्या कदम उठाना चाहिए?
कम पैसों में गुजारा करने के लिए अपनी जरूरतें और फिजूलखर्ची सीमित करनी पड़ती है।
बचत के पैसों को खर्च होने से कैसे बचाएं?
बचत खाते का एटीएम कार्ड तोड़कर फेंक देना चाहिए ताकि मन में उन पैसों को खर्च करने का विचार न आए।
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