अभिनेता विवेक ओबेरॉय इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित और मेगा बजट फिल्म 'रामायण' को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। इस पौराणिक फिल्म में वह विद्युत्जिह्व का नेगेटिव किरदार निभा रहे हैं। कुछ समय पहले ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि विवेक ओबेरॉय ने 'रामायण' फिल्म के लिए मिलने वाली अपनी पूरी फीस कैंसर से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए दान करने का फैसला किया है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब अभिनेता अपनी दरियादिली या किसी अन्य वजह से चर्चा में आए हों, बल्कि उनका फिल्मी करियर दो दशक से भी ज्यादा लंबा हो चुका है। उन्होंने साल 2002 में निर्देशक राम गोपाल वर्मा की चर्चित फिल्म 'कंपनी' के जरिए बॉलीवुड में शानदार कदम रखा था। इस क्राइम थ्रिलर फिल्म में उन्होंने गैंगस्टर चंद्रकांत यानी 'चंदू' नागरे की भूमिका अदा की थी, जिसके लिए उन्हें दर्शकों और समीक्षकों से जबरदस्त सराहना मिली थी।
बेटे को पहला मौका दिलाने के लिए मेकर्स के चक्कर काटे
इस बीच, विवेक के पिता और जाने-माने अभिनेता सुरेश ओबेरॉय ने उस कड़े संघर्ष का जिक्र किया है जो उनके बेटे को सिनेमा जगत में पहला बड़ा ब्रेक दिलाने में लगा था। एक इंटरव्यू के दौरान सुरेश ओबेरॉय ने बताया कि कैसे वह अपने जमाने की तरह ही बेटे विवेक की तस्वीरें लेकर अलग-अलग फिल्म निर्माताओं के घरों के चक्कर काटते थे ताकि उसे एक मौका मिल सके। अपने शुरुआती दिनों में उन्होंने खुद के लिए भी ठीक ऐसा ही संघर्ष किया था। सुरेश ओबेरॉय का कहना है कि बेटे के फिल्मी सफर की शुरुआत का मतलब एक बार फिर से कड़ा संघर्ष था, लेकिन इस बार यह सब अपने जिगर के टुकड़े के भविष्य को संवारने के लिए था। उन्होंने याद करते हुए बताया कि उन्हें विवेक के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी और वह बिल्कुल वैसे ही निर्देशकों के पास जाते थे जैसे कभी वे अपनी तस्वीरें लेकर जाया करते थे।
ऐसे तय हुआ राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'कंपनी' का सफर
बातचीत के दौरान सुरेश ओबेरॉय ने उस दिलचस्प वाकये का भी खुलासा किया जिसके जरिए विवेक को उनकी पहली फिल्म मिली। उन दिनों सुरेश ओबेरॉय खुद राम गोपाल वर्मा के साथ किसी अन्य प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे, तभी उन्हें 'कंपनी' फिल्म के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने तुरंत राम गोपाल वर्मा से बातचीत करके विवेक को उस फिल्म में कास्ट करने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, निर्देशक शुरुआत में यह देखना चाहते थे कि एक कलाकार के तौर पर विवेक अभिनय का हुनर जानते हैं या नहीं। उस वक्त विवेक के पास उनके एक्टिंग इंस्टीट्यूट का एक रिकॉर्डिंग टेप मौजूद था, जिसे सुरेश ओबेरॉय ने राम गोपाल वर्मा को दिखाया। आरजीवी उस वीडियो को देखने के बाद सीधे सुरेश ओबेरॉय के घर पहुंचे और विवेक की लाजवाब अदाकारी से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उसे फिल्म में साइन कर लिया। इस तरह 'कंपनी' विवेक ओबेरॉय की पहली फिल्म बन गई, जिसमें उनके साथ अजय देवगन, मनीषा कोइराला, मोहनलाल और अंतरा माली जैसे दिग्गज कलाकार भी शामिल थे।
पहली बार परदे पर बेटे को देख भावुक हो गए थे पिता
सुरेश ओबेरॉय ने साझा किया कि जब उन्होंने बड़े परदे पर पहली बार अपने बेटे को अभिनय करते देखा तो वे इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों से आंसू छलक आए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'कंपनी' में विवेक का काम भले ही शानदार था, लेकिन वह उनकी पसंदीदा परफॉर्मेंस नहीं है। एक अभिनेता के रूप में सुरेश ओबेरॉय को अपने बेटे का काम साल 2002 की रोमांटिक फिल्म 'साथिया' में सबसे ज्यादा पसंद आया, जो 'कंपनी' के रिलीज होने के कुछ ही महीनों बाद सिनेमाघरों में आई थी। अगर विवेक ओबेरॉय के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह हाल ही में रोहित शेट्टी के ओटीटी एक्शन प्लेटफॉर्म पर आई सीरीज 'इंडियन पुलिस फोर्स' और फिल्म 'मस्ती 4' में दिखाई दिए थे। अब दर्शक उन्हें नितेश तिवारी की भव्य फिल्म 'रामायण' में देखेंगे, जो भारत में दिवाली के खास मौके पर और दुनियाभर में 6 नवंबर को रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है।



















