जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में स्थित सेंट्रल जेल से दो कैदियों के फरार होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ये दोनों कैदी जेल की ऊंची दीवार फांदकर भागने में कामयाब रहे, जिसके बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। इस घटना के सामने आने के बाद सुरक्षा तंत्र पूरी तरह सतर्क हो गया है और पुलिस ने तुरंत प्रभाव से दोनों फरार कैदियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस के साथ पुलिस ने दोनों की तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं ताकि आम लोग इन्हें आसानी से पहचान सकें।
फरार कैदियों की पहचान और आपराधिक पृष्ठभूमि
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, पहला फरार कैदी फरमान खान है, जिसके पिता का नाम अब्दुल गनी खान है। फरमान खान मूल रूप से राजस्थान के सदनपोरा का रहने वाला है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 137(2) और 87 के अलावा गंभीर पॉक्सो एक्ट के तहत मामले दर्ज किए गए थे। वह इसी साल 23 जून 2026 को न्यायिक हिरासत के तहत जेल में लाया गया था। इस मामले में उसकी एफआईआर संख्या 19/2026 दर्ज है। वहीं, दूसरा फरार कैदी मुख्तार अहमद गुर्जर है, जिसके पिता का नाम मोहम्मद रफीक है। मुख्तार अनंतनाग जिले के संगलन चित्तरगुल का निवासी है। उसके खिलाफ BNS की धारा 137(2) और 65(1) के तहत केस दर्ज है और उसकी एफआईआर संख्या 20/2026 है। हालांकि, उसके जेल में आने की आधिकारिक तारीख का दस्तावेज में जिक्र नहीं किया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों की ताबड़तोड़ तलाश और जांच
सेंट्रल जेल से दो বন্দियों के इस तरह अचानक फरार हो जाने के बाद तमाम सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट मोड पर आ गई हैं। पुलिस महकमे ने इन दोनों की सुरागकशी के लिए संभावित ठिकानों, रास्तों और आने-जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर कड़ी निगरानी रखनी शुरू कर दी है। पूरे कश्मीर संभाग में रेड अलर्ट जैसी स्थिति के बीच दोनों को दबोचने के लिए बड़े पैमाने पर सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इसके साथ ही जेल प्रशासन ने भी आंतरिक स्तर पर जांच बिठा दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर इतनी सुरक्षित जेल की दीवार फांदकर कैदी भागने में कैसे सफल रहे और क्या जेल की सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ी चूक हुई थी।
आम जनता से पुलिस की विशेष अपील
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि ये दोनों फरार कैदी यानी फरमान खान या मुख्तार अहमद गुर्जर कहीं भी नजर आते हैं, तो कोई भी व्यक्ति खुद उन्हें पकड़ने की कोशिश न करे। इसके बजाय तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में जाकर इसकी सूचना दी जाए। इसके अलावा आपातकालीन स्थिति में 112 नंबर डायल करके भी पुलिस को इस बारे में तुरंत जानकारी दी जा सकती है। गौरतलब है कि इससे पहले भी श्रीनगर सेंट्रल जेल के भीतर डिजिटल उपकरण पहुंचने की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिनकी छापेमारी के दौरान बरामदगी हुई थी। इसके अलावा हाल ही में कुपवाड़ा जेल में गैस सिलेंडर फटने से नौ कैदियों के गंभीर रूप से जख्मी होने की घटना भी सामने आई थी।



















