फिल्म उद्योग में आमतौर पर किसी भी नई रिलीज को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा दिए जाते हैं। बड़े-बड़े सुपरस्टार्स देश के कोने-कोने में जाकर प्रचार करते हैं, रियलिटी शोज में हाजिरी लगाते हैं और सोशल मीडिया पर महंगे कैंपेन चलाए जाते हैं। लेकिन साल 2026 में भारतीय सिनेमा के परिदृश्य में एक ऐसी फिल्म सामने आई है, जिसने इन तमाम स्थापित परंपराओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। बिना किसी तामझाम, भारी प्रचार और विज्ञापनों के रिलीज हुई इस फिल्म ने मुनाफे के मामले में बड़े-बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है।
उद्योग के लिए मिसाल बनी 'हनुमान अंश' की सफलता
इस अप्रत्याशित सफलता पर बात करते हुए जाने-माने फिल्ममेकर मधुर भंडारकर ने इसे पूरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बेहद अहम केस स्टडी करार दिया है। उनके अनुसार, यह एक ऐसी सफलता है जिससे पूरी इंडस्ट्री को सीख लेनी चाहिए और इसके हर पहलू को गहराई से समझना चाहिए। रिलीज के शुरुआती दौर में जिस फिल्म को थिएटर मालिकों और समीक्षकों ने पूरी तरह नकार दिया था, उसने तीसरे हफ्ते में ऐसा कमाल दिखाया कि हर कोई हैरान रह गया। पहले फ्लॉप मानी जा रही यह फिल्म पहले एक सरप्राइज हिट बनी, फिर सुपरहिट और अब 2026 की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर में शुमार हो चुकी है।
2 करोड़ के बजट से 50 करोड़ की कमाई का गणित
निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी फिल्म 'हनुमान अंश' का कुल बजट महज 2 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। सीमित संसाधनों में बनी इस फिल्म ने अब तक 50 करोड़ रुपये की बम्पर कमाई कर ली है। अगर मुनाफे के आंकड़े पर नजर डालें तो इस फिल्म ने मेकर्स को 2000 प्रतिशत से भी ज्यादा का सूखा मुनाफा दिया है। शुरुआती दो हफ्तों में फिल्म का बिजनेस बेहद सुस्त था और कमाई महज कुछ लाख रुपयों तक ही सीमित रही थी। थिएटर मालिकों ने भी इसे एक सस्ती और छोटी-मोटी फिल्म समझकर बहुत कम शोज दिए थे। लेकिन तीसरे हफ्ते में जब दर्शकों की भीड़ उमड़ी और कमाई करोड़ों में पहुंचने लगी, तब डिस्ट्रीब्यूटर्स को मजबूरन शोज की संख्या बढ़ानी पड़ी। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से इस फिल्म को 'U' प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है, जिससे हर उम्र के लोग इसे देखने परिवार के साथ पहुंच रहे हैं।
कैंची धाम वाले नीम करोली बाबा पर आधारित बायोग्राफिकल ड्रामा
'हनुमान अंश' मूल रूप से एक बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म है, जिसमें उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम वाले नीम करोली बाबा के जीवन, उनके निस्वार्थ प्रेम, जनसेवा और मानवता के पावन संदेश को बहुत ही बारीकी और संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा गया है। इस अभूतपूर्व सफलता को देखते हुए मेकर्स ने इसके सीक्वल पर भी काम शुरू कर दिया है और इसके दूसरे भाग की आधिकारिक पुष्टि भी कर दी गई है। देश भर में यह फिल्म फिलहाल 700 से अधिक स्क्रीनों पर सफलतापूर्वक चल रही है। सिनेमाघरों से आ रही तस्वीरें बताती हैं कि दर्शक इस फिल्म को देखकर बेहद भावुक हो रहे हैं। कई स्थानों पर लोग सिनेमा हॉल के भीतर अपने जूते-चप्पल उतारकर फिल्म देख रहे हैं, तो वहीं कुछ थिएटरों में दर्शक भक्तिभाव में डूबकर हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए भी नजर आ रहे हैं।
प्रेमानंद जी महाराज का मार्गदर्शन और कास्टिंग में बदलाव
फिल्म के निर्माण की प्रक्रिया भी बेहद आध्यात्मिक और अनुशासित रही। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले प्रोड्यूसर्स ने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया था। उस मुलाकात के दौरान महाराज जी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जो भी व्यक्ति फिल्म में नीम करोली बाबा का किरदार निभाएगा, उसे अपने निजी जीवन में अत्यंत सख्त नियमों और संयम का पालन करना होगा। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में नीम करोली बाबा के रोल के लिए जिस अभिनेता का चयन किया गया था, वह शूटिंग से ठीक पहले अचानक बीमार पड़ गए। इसके बाद मेकर्स ने शोभिनव सत्या को इस मुख्य भूमिका के लिए चुना, जिन्होंने इस किरदार में प्राण फूंक दिए।
हनुमान चालीसा के पाठ से लेकर सेट के सख्त नियम
फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर सात्विकता और अनुशासन का बेहद कड़ाई से पालन किया गया। निर्देशक के अनुसार, सेट पर किसी भी व्यक्ति को गाली-गलौज, लड़ाई-झगड़े या किसी भी तरह की बुरी आदत की सख्त मनाही थी। पूरे शूटिंग शेड्यूल के दौरान केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही परोसा जाता था। शराब, मांस और मछली का सेवन पूरी तरह से प्रतिबंधित था। प्रत्येक दिन की शूटिंग की शुरुआत पूरी यूनिट द्वारा एक साथ मिलकर हनुमान चालीसा का पाठ करने के बाद ही होती थी, और दिन के अंत में भी इसी तरह हनुमान चालीसा पढ़कर काम समाप्त किया जाता था। जब भी शूटिंग के दौरान कोई तकनीकी या व्यावहारिक रुकावट आती, तो पूरी टीम बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगती थी।
पारंपरिक प्रचार के बजाय 8 भंडारों से जन-जन तक पहुंच
प्रचार-प्रसार की रणनीति को लेकर मेकर्स ने बेहद अनूठा रास्ता अपनाया। उनके पास न तो विज्ञापनों के लिए बड़े फंड थे और ना ही किसी बड़े स्टार से प्रमोशन कराने का बजट। लेकिन मेकर्स का दृष्टिकोण एकदम साफ था कि नीम करोली बाबा के पावन संदेश को लोगों तक पहुंचाने के लिए किसी महंगे कमर्शियल कैंपेन की आवश्यकता नहीं है। इसलिए उन्होंने प्रचार का सारा पैसा धार्मिक आयोजनों पर खर्च किया। मेकर्स ने कुल 8 स्थानों पर विशाल भंडारों का आयोजन किया, जहां आए श्रद्धालुओं को भोजन कराने के साथ-साथ फिल्म के बारे में जानकारी दी गई। इसी जमीनी जुड़ाव और जन-सामान्य के विश्वास के बल पर 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता की एक नई इबारत लिख दी है।



















