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सोशल मीडिया पर राजनीतिक लेबल और फिल्मों पर लगे आरोपों पर आर माधवन का रुख साफ, दी अपनी रायबॉलीवुड
5 अग॰ 2026, 3:21 pm (1 दिन पहले)· 0

सोशल मीडिया पर राजनीतिक लेबल और फिल्मों पर लगे आरोपों पर आर माधवन का रुख साफ, दी अपनी राय

अभिनेता आर माधवन ने खुद को राजनीतिक दल से जोड़े जाने और फिल्मों पर लगे प्रोपेगैंडा के आरोपों पर अपनी बात रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी पार्टी के समर्थक नहीं हैं और केवल किरदारों की सच्चाई को पर्दे पर उतारते हैं।

साउथ सिनेमा से लेकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री तक अपनी बेहतरीन अदाकारी का लोहा मनवाने वाले अभिनेता आर माधवन इन दिनों अपनी आगामी फिल्म को लेकर चर्चा में हैं। बहुप्रतीक्षित फिल्म धुरंधर में शानदार अभिनय करने के बाद अब वह प्रसिद्ध भारतीय नवप्रवर्तक गोपालस्वामी दोराईस्वामी नायडू की बायोपिक में मुख्य भूमिका निभाते नजर आएंगे। इस नई फिल्म के प्रचार अभियान के दौरान अभिनेता ने उन तमाम आलोचकों को आड़े हाथों लिया, जो उन पर राजनीतिक ठप्पा लगाने की कोशिश कर रहे थे। खुद पर लगने वाले संघी लेबल और फिल्मों पर उठने वाले राजनीतिक विवादों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी राजनीतिक दल से संबंध नहीं रखते हैं और हमेशा देशहित की भावना से काम करते हैं।

सोशल मीडिया ट्रोलिंग और राजनीतिक लेबल पर दिया स्पष्टीकरण

गलाटा प्लस मंच को दिए एक विस्तृत साक्षात्कार के दौरान जब कार्यक्रम के होस्ट ने आर माधवन से सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और संघी कहे जाने को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने बहुत ही सहजता से अपनी बात रखी। अभिनेता का कहना था कि हर व्यक्ति का व्यवहार और उसकी सोच उसकी पारिवारिक परवरिश और संस्कारों पर निर्भर करती है। उन्हें बचपन से ही अपने देश पर गर्व करना सिखाया गया है। आज के दौर में इंटरनेट और सोशल मीडिया के माहौल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल दुनिया में यह पहचानना अब बिल्कुल भी मुश्किल नहीं रह गया है कि कौन सा अकाउंट किसी वास्तविक यूजर का है और कौन महज पैसे देकर चलवाया जा रहा पेड बॉट है।

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हाल के दिनों में जब देश में विभिन्न छात्र प्रदर्शन आयोजित हुए थे, तब आर माधवन की चुप्पी पर कई लोगों ने सवाल खड़े किए थे और उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल भी किया था। इस साक्षात्कार में जब इन सवालों का सामना हुआ तो उन्होंने साफ शब्दों में अपनी स्थिति स्पष्ट की। अभिनेता ने बताया कि वे न तो किसी राजनीतिक दल का समर्थन करते हैं और न ही किसी राजनेता के प्रचार में शामिल होते हैं। उनका मानना है कि यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में अच्छा काम कर रहा है, तो उसकी सराहना की जानी चाहिए। जनता द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को देशहित में समर्थन देना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे सोशल मीडिया पर आने वाली टिप्पणियों को पढ़ते जरूर हैं, लेकिन इन प्रतिक्रियाओं से उनके निजी विचार या फैसले कभी प्रभावित नहीं होते।

धुरंधर और रॉकेट्री पर लगे प्रोपेगैंडा के आरोपों पर कही यह बात

आर माधवन को केवल सोशल मीडिया टिप्पणियों ही नहीं, बल्कि अपनी पिछली फिल्मों को लेकर भी तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा है। हाल ही में आई फिल्म धुरंधर को लेकर कुछ आलोचकों ने इसे सरकार समर्थक और प्रोपेगैंडा करार दे दिया था। इसके अलावा, पूर्व इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन के जीवन पर आधारित फिल्म रॉकेट्री के निर्देशन और अभिनय के लिए नेशनल अवॉर्ड जीतने वाले माधवन पर उस समय भी सवाल उठाए गए थे, जब फिल्म में वैज्ञानिक को पूजा-अर्चना करते हुए दिखाया गया था। तब कुछ लोगों ने उन पर जरूरत से ज्यादा राष्ट्रवादी होने का ठप्पा लगा दिया था।

इन तमाम आरोपों को खारिज करते हुए आर माधवन ने आश्चर्य जताया कि जब वे अपनी आम जिंदगी में कोई राजनीतिक बयानबाजी नहीं करते, तो उन्हें इस तरह की आलोचना का शिकार क्यों बनाया जाता है। अपनी फिल्म धुरंधर का पक्ष रखते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फिल्म की कहानी पाकिस्तान की पृष्ठभूमि पर आधारित थी, जिसमें यह दर्शाया गया था कि वहां की घटनाओं का असर भारत पर किस तरह पड़ता है। ऐसे में इसे प्रोपेगैंडा कहना पूरी तरह से समझ से परे है।

सिनेमा और किरदारों की ईमानदारी पर अभिनेता का नजरिया

फिल्म निर्माण की अपनी प्रक्रिया और कहानी की सत्यता पर बात करते हुए आर माधवन ने कहा कि एक कलाकार के रूप में उनका प्राथमिक कर्तव्य हर कहानी और किरदार के साथ पूरी ईमानदारी बरतना है। जब बात पूर्व इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन की बायोपिक की आई, तो उन्होंने वही दिखाया जो वास्तविक जीवन में सच था। चूंकि नंबी नारायणन अपने निजी जीवन में धार्मिक थे और मंदिर जाया करते थे, इसलिए उन्हें पूजा करते हुए दिखाना पूरी तरह से स्वाभाविक और सत्य पर आधारित था।

माधवन ने कहा, "मुझे हर कहानी के साथ ईमानदार होना है, मैं पर्दे पर वही दिखाऊंगा जो सच है।" इसके विपरीत, अपनी आगामी बायोपिक का उदाहरण देते हुए अभिनेता ने बताया कि भारतीय नवप्रवर्तक जीडी नायडू अपने जीवन में नास्तिक विचारों के थे। इसलिए फिल्म में उन्हें किसी मंदिर में जाते हुए नहीं दिखाया जाएगा। माधवन का मानना है कि एक अभिनेता का काम चरित्र को उसके वास्तविक रूप में पेश करना है। अपनी बात समाप्त करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की उपलब्धियों और अच्छी बातों को दुनिया के सामने लाना कोई अपराध नहीं है और वे एक नागरिक के रूप में देश का गौरव बढ़ाना हमेशा पसंद करेंगे।

सवाल-जवाब

आर माधवन ने 'संघी' लेबल पर क्या सफाई दी है?
आर माधवन ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी राजनीतिक दल या नेता का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने बताया कि वे बचपन से ही देशहित में सोचते आए हैं और जनता द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री का समर्थन करना स्वाभाविक है।
फिल्म 'धुरंधर' को लेकर क्या विवाद हुआ था?
आलोचकों ने फिल्म 'धुरंधर' को 'प्रोपेगैंडा' और 'सरकार समर्थक' करार दिया था। इस पर माधवन ने कहा कि फिल्म की कहानी पाकिस्तान की पृष्ठभूमि पर बनी थी और भारत पर उसके असर को दिखाती थी, जिसमें कोई प्रोपेगैंडा नहीं था।
आर माधवन की फिल्म 'रॉकेट्री' पर क्या आरोप लगे थे?
फिल्म 'रॉकेट्री' में पूर्व इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन को पूजा करते हुए दिखाने पर कुछ लोगों ने माधवन को 'जरूरत से ज्यादा राष्ट्रवादी' कहा था। माधवन ने इसका जवाब देते हुए कहा कि वे केवल वही दिखाते हैं जो असल जिंदगी में सच है।
आर माधवन अब किस नई फिल्म में नजर आने वाले हैं?
आर माधवन भारतीय नवप्रवर्तक गोपालस्वामी दोराईस्वामी नायडू (जीडी नायडू) की बायोपिक में मुख्य भूमिका निभाने जा रहे हैं।
जीडी नायडू की बायोपिक में किरदार निभाने को लेकर माधवन ने क्या कहा?
माधवन ने कहा कि चूंकि जीडी नायडू नास्तिक थे, इसलिए फिल्म में उन्हें मंदिर जाते नहीं दिखाया जाएगा। वे हर कहानी और किरदार की सच्चाई के प्रति ईमानदार रहना पसंद करते हैं।
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