हर साल 15 अगस्त के पावन अवसर पर समूचे भारत में देशभक्ति के तरानों की गूंज सुनाई देने लगती है और इसके साथ ही सिनेमा प्रेमियों में राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत फिल्मों को देखने का उत्साह बढ़ जाता है। जब भी भारतीय सिनेमा में देशभक्ति, संघर्ष और दृढ़ संकल्प की बात होती है, तब महानायक अमिताभ बच्चन का योगदान सर्वोपरि नजर आता है। अपनी गंभीर आवाज, प्रभावशाली संवाद अदायगी और बेजोड़ अभिनय कला के दम पर उन्होंने दशकों तक दर्शकों के दिलों में देशप्रेम की अलख जगाई है। स्वतंत्रता दिवस के इस विशेष मौके पर उनकी 10 ऐसी ऐतिहासिक फिल्मों का ब्योरा प्रस्तुत है, जो आज भी हर भारतीय में गर्व का अहसास कराती हैं।
स्वाधीनता संग्राम और मानवीय मूल्यों की मिसाल
अमिताभ बच्चन के अभिनय सफर की शुरुआत ही देशभक्ति के एक अध्याय से हुई थी। उनके करियर की पहली फिल्म गोवा की आजादी के ऐतिहासिक संघर्ष की पृष्ठभूमि पर तैयार की गई थी। इस फिल्म में उन्होंने एक मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानी का किरदार निभाकर अपनी अभिनय प्रतिभा का लोहा मनवाया था। फिल्म की कथावस्तु और उसमें दिया गया राष्ट्रीय एकता का संदेश इतना प्रभावी था कि इसने सिनेमाघरों में दर्शकों के भीतर देशप्रेम का नया जज्बा भर दिया था। इस शुरुआती अभिनय से ही उन्होंने यह साबित कर दिया था कि वे भारतीय सिनेमा में एक नई क्रांति लेकर आ रहे हैं।
इसके पश्चात आई फिल्म ‘आनंद’ मुख्य रूप से दो आत्मीय दोस्तों के भावनात्मक संबंधों पर केंद्रित थी, लेकिन इसके भीतर देशभक्ति और जीवन जीने के सकारात्मक दृष्टिकोण को अत्यंत गहराई से पिरोया गया था। इस फिल्म में प्रसिद्ध अभिनेता राजेश खन्ना के साथ अमिताभ बच्चन ने डॉक्टर भास्कर का यादगार किरदार साकार किया था। डॉक्टर भास्कर के माध्यम से फिल्म ने हर नागरिक को यह संदेश दिया कि अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर देश, समाज और मानव कल्याण के लिए जीवन समर्पित करना ही सच्ची देशभक्ति है।
सिस्टम की कमियों और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध बिगुल
सत्तर के दशक के दौर में प्रदर्शित हुई फिल्म ‘दीवार’ ने भारतीय सिनेमा में एक नया मोड़ ला दिया। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने एक उग्र और असंतुष्ट युवक यानी एंग्री यंग मैन का किरदार निभाया था, जो समाज में फैले अन्याय, विषमता और प्रशासनिक व्यवस्था की खामियों के खिलाफ सीधे टकराता है। आम जनता के अधिकारों और उनके हक की आवाज बुलंद करने वाला उनका यह आक्रामक तेवर हर आम नागरिक के मन में सामाजिक बुराइयों से मुकाबला करने का साहस भर देता है।
इसी प्रकार, ‘शोले’ जैसी कालजयी कृति को केवल मारधाड़ या मनोरंजन के नजरिये से देखना पर्याप्त नहीं होगा। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन द्वारा अभिनीत जय का किरदार जहां एक ओर मित्रता की मिसाल पेश करता है, वहीं दूसरी ओर गांव की सुरक्षा और वहां के निर्दोष निवासियों को अत्याचार से बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने का जज्बा भी दिखाता है। अपने प्रियजनों और अपनी माटी की रक्षा के लिए सर्वस्व न्योछावर करने का यह भाव दर्शकों को राष्ट्र रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहने की प्रेरणा प्रदान करता है।
इसी क्रम में एक और महत्वपूर्ण फिल्म में अमिताभ बच्चन ने एक ऐसे स्वाभिमानी व्यक्ति की भूमिका निभाई, जो समाज की संकीर्ण सोच और रूढ़िवादी धारणाओं को खुली चुनौती देता है। अपनी अनवरत मेहनत, ईमानदारी और सत्य के मार्ग पर चलते हुए अपनी अलग पहचान बनाने की यह कथा हर भारतीय को निष्ठापूर्वक देश के नवनिर्माण में योगदान देने का संदेश देती है।
भ्रष्टाचार के अंत और जुर्म के खिलाफ संघर्ष
राजनैतिक भ्रष्टाचार और अपराध मुक्त समाज की अवधारणा पर बनी फिल्म ‘इंकलाब’ में बिग बी का एक अलग ही अवतार देखने को मिला था। इस फिल्म में उन्होंने एक कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई थी, जो शासन और राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने के लिए संकल्पबद्ध है। देश की व्यवस्था को स्वच्छ और पारदर्शी बनाने का उनका यह संघर्ष हर सजग नागरिक के भीतर प्रशासनिक व्यवस्था को सुधारने का नया जोश जगाता है।
इसके अलावा, ‘अंधेरी रातों में, सुनसान राहों पर’ जैसे सर्वकालिक लोकप्रिय संवाद से सजी फिल्म को आज भी दर्शक बड़े चाव से याद करते हैं। इस फिल्म में उन्होंने रात के सन्नाटे में अपराध का खात्मा करने वाले एक रक्षक की भूमिका निभाई थी। उनका यह चरित्र समाज से अपराध, भय और अन्याय को समाप्त करने का स्पष्ट संदेश देता है, जो आज भी दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देता है।
सैन्य अनुशासन और खाकी के प्रति अटूट निष्ठा
भारतीय थल सेना के कठोर अनुशासन, शौर्य और देशभक्ति की भावना को उजागर करने वाली फिल्म आज भी दर्शकों की पहली पसंद बनी हुई है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन ने मेजर जसबीर सिंह राणा का रोबदार किरदार निभाया था। उनका अनुशासित अंदाज, कड़क आवाज और मातहत जवानों में देश के लिए बलिदान देने का उत्साह भरने का तरीका हर देशवासी के सीने को गर्व से चौड़ा कर देता है।
इसके साथ ही, कारगिल युद्ध की यथार्थवादी पृष्ठभूमि पर आधारित और युवा अभिनेता ऋतिक रोशन के साथ बनी फिल्म में अमिताभ बच्चन ने कर्नल सुनील दामले का अत्यंत प्रभावशाली पाठ अदा किया था। युद्ध के मैदान में उनके प्रेरक संवाद, सटीक दिशा-निर्देश और सैन्य रणनीति युवाओं के दिलों में भारत मां की रक्षा के लिए सर्वस्व समर्पित करने की ज्वाला प्रज्वलित कर देती है।
अंत में, पुलिस बल के समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और देश सेवा के जज्बे पर केंद्रित फिल्म ‘खाकी’ में अमिताभ बच्चन ने डीसीपी अनंत श्रीवास्तव का कालजयी रोल निभाया था। अपनी अधिक उम्र और शारीरिक सीमाओं के बावजूद कानून व्यवस्था की मर्यादा बनाए रखने और देश के दुश्मनों से डटकर मुकाबला करने का उनका यह किरदार यह साबित करता है कि देशभक्ति की कोई उम्र नहीं होती। उनका यह अभूतपूर्व अभिनय हर नागरिक को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर देता है।



















