वर्ष 1993 में निर्देशक सुभाष घई की बहुचर्चित फिल्म खलनायक सिनेमाघरों में उतारी गई थी। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बंपर कमाई की थी और व्यावसायिक रूप से बेहद सफल रही थी। फिल्म में संजय दत्त, माधुरी दीक्षित और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। हालांकि, इस बड़ी सफलता के साथ ही फिल्म को कड़े विवादों का भी सामना करना पड़ा था। आज जिस गाने को एक ब्लॉकबस्टर के रूप में याद किया जाता है, उस समय उस पर जबरदस्त हंगामा हुआ था।
माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया गाना चोली के पीछे क्या है रिलीज के समय भारी विवाद के घेरे में आ गया था। इस गाने पर अश्लीलता फैलाने का गंभीर आरोप लगाया गया था। इसके विरोध में देश भर में कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया था, जिससे माहौल काफी गरमा गया था। अब इतने वर्षों बाद खुद निर्देशक सुभाष घई ने उस दौर को याद करते हुए खुलासा किया है कि किस प्रकार उस संकट की घड़ी में शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने उनकी मदद की थी।
32 से अधिक संगठनों ने किया था कड़ा विरोध
सुभाष घई ने हाल ही में याद किया कि फिल्म खलनायक के सिनेमाघरों में आने से पहले 32 से अधिक विभिन्न संगठनों ने इसका तीव्र विरोध किया था। चारों तरफ भारी हंगामा मचा हुआ था और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो रही थी। शिवसेना भी इस फिल्म और इसके लोकप्रिय गाने के खिलाफ खड़ी थी। हर तरफ लोग इस गीत को लेकर बेहद गुस्से में थे और निर्देशक के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। ऐसी स्थिति में सुभाष घई ने खुद आगे बढ़कर बाल ठाकरे से संपर्क किया और उनसे एक बार फिल्म देखने का व्यक्तिगत आग्रह किया।
एक मीडिया साक्षात्कार में इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए सुभाष घई ने बताया कि 32 से ज्यादा संगठनों ने उस गाने को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे। उन सभी की एकमात्र मांग थी कि इस फिल्म को किसी भी कीमत पर रिलीज नहीं होने दिया जाए। उन्होंने बताया कि फिल्म को सिनेमाघरों तक पहुंचाने के लिए उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ा था। वे पुणे से लेकर दिल्ली तक फैले विरोध प्रदर्शनों के बीच सभी 32 संगठनों के प्रतिनिधियों से मिले थे। खासतौर पर महिला संगठनों का गुस्सा सातवें आसमान पर था और वे बेहद गुस्से में थीं। उन्होंने सभी से केवल एक ही निवेदन किया था कि वे रिलीज से पहले एक बार पूरी फिल्म जरूर देख लें। जैसा लोग सोच रहे थे, फिल्म में वैसा कुछ भी आपत्तिजनक नहीं था, लेकिन इसके बावजूद हर कोई उस गाने को अश्लील करार दे रहा था।
बालासाहेब ठाकरे के हस्तक्षेप से बदला था माहौल
उस दौर के तनावपूर्ण पलों को याद करते हुए सुभाष घई ने साझा किया कि जब शिवसेना के लोग भी फिल्म के विरोध में उतर आए थे, तब वे सीधे बालासाहेब ठाकरे के पास पहुंचे थे। उन्होंने उनसे कहा था कि उनकी फिल्म रिलीज होने वाली है और वे कृपया एक बार इसे खुद देख लें। बालासाहेब ठाकरे ने उनकी बात मानकर फिल्म देखी। इसके ठीक अगले ही दिन शिवसेना के मुखपत्र सामना अखबार में फिल्म के समर्थन में एक लेख प्रकाशित हुआ। उस लेख में स्पष्ट लिखा गया था कि फिल्म बहुत खूबसूरत है और जो उस गीत में है, वही उसमें है। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी के लोगों को भी इस विरोध के लिए डांटा और रातोंरात पूरा माहौल बदल गया।
लोकगीत पर आधारित था यह चर्चित गाना
सुभाष घई चोली के पीछे क्या है गाने को कभी भी अश्लील नहीं मानते हैं। उनका मानना है कि यह एक पारंपरिक लोकगीत है। निर्देशक ने यह भी स्वीकार किया कि रिलीज से पहले उन्हें इस बात का गहरा डर सता रहा था कि सेंसर बोर्ड इस गाने को काट देगा या इस पर प्रतिबंध लगा देगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के गीत भारत के कई हिस्सों, विशेषकर बिहार के कुछ इलाकों में पारंपरिक रूप से गाए जाते हैं।



















