बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेले जा रहे दलीप ट्रॉफी के एक मुकाबले में भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास का एक नया अध्याय लिखा गया। सेंट्रल जोन के खिलाफ चल रहे इस सेमीफाइनल मैच के दौरान एक ऐसा वाकया सामने आया जिसने सबको चौंका दिया। महज़ 15 साल की उम्र में फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में कदम रखने वाले युवा खिलाड़ी ने अचानक अपनी टीम की बागडोर संभाल ली। इस असाधारण घटना ने साबित कर दिया कि भारतीय क्रिकेट में किस तरह युवा प्रतिभाओं को बड़े मौकों पर परखा जा रहा है।
ईशान किशन की चोट से बदला मैच का रुख
मुकाबले के दौरान 19वां ओवर चल रहा था जब ईस्ट जोन के नियमित कप्तान और अनुभवी खिलाड़ी ईशान किशन मैदान पर विकेटकीपिंग कर रहे थे। इसी दौरान एक गेंद उनकी दाहिनी कलाई पर जा लगी जिससे वे बेहद दर्द में नजर आए। फिजियो के आने और प्राथमिक उपचार के बाद भी जब उन्हें राहत नहीं मिली, तो उन्हें मजबूरन मैदान से बाहर जाना पड़ा। बाद में उन्हें कलाई पर बैंडेज बांधे हुए देखा गया। उनके जाने के बाद झारखंड के कुमार कुशाग्र ने विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह था कि मैदान पर कप्तानी कौन करेगा।
वैभव सूर्यवंशी का कप्तानी संभालना
नियमित कप्तान के मैदान से बाहर जाने के बाद उप-कप्तान की भूमिका निभा रहे 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने बिना किसी देरी के नेतृत्व की कमान अपने हाथों में ले ली। उन्होंने मैदान पर फील्डिंग सेट की और गेंदबाजों को दिशा निर्देश दिए। यह पल इस युवा खिलाड़ी के करियर में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जिन्होंने कम उम्र में ही घरेलू क्रिकेट के इस बड़े मंच पर कप्तानी का जिम्मा उठा लिया। इससे पहले मैच में ईस्ट जोन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था और तेज गेंदबाज अभिजीत सरकार ने शुरुआती झटके देकर टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई थी। अभिजीत ने अमन मोखाड़े को 8 रन और कुणाल चंदेला को 6 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन वापस भेज दिया था, जिससे सेंट्रल जोन का स्कोर 36 रन पर 2 विकेट हो गया था।
चयनकर्ताओं के फैसले पर लगी मुहर
वैभव सूर्यवंशी का ईस्ट जोन का उप-कप्तान बनना और फिर जरूरत पड़ने पर कप्तानी संभालना कोई इत्तेफाक नहीं था। जब इस टूर्नामेंट के लिए टीम की घोषणा हुई थी और इस युवा बल्लेबाज को उप-कप्तान बनाया गया था, तब क्रिकेट हलकों में काफी बहस छिड़ गई थी। कई जानकारों का मानना था कि इतनी कम उम्र के खिलाड़ी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपना जल्दबाजी भरा फैसला हो सकता है। हालांकि, चयनकर्ताओं ने उस समय अपने निर्णय का खुलकर समर्थन किया था।
दूरदर्शी सोच का परिणाम
चयन समिति में शामिल झारखंड के पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता मनीष वर्धन ने उस समय स्पष्ट किया था कि वे सिर्फ वर्तमान पर नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले ले रहे हैं। उनका तर्क था कि इस खिलाड़ी में नेतृत्व के विशेष गुण मौजूद हैं और उन्हें बड़े स्तर पर तैयार करना देश के क्रिकेट हित में है। रविवार के मैच की परिस्थितियों ने चयनकर्ताओं के इस दूरदर्शी और साहसिक निर्णय को बिल्कुल सही साबित कर दिखाया।
फर्स्ट-क्लास करियर का सफर और आंकड़े
साल 2024 की शुरुआत में रणजी ट्रॉफी के जरिए बेहद कम उम्र में डेब्यू करने वाले वैभव सूर्यवंशी का अब तक का सफर काफी संघर्षपूर्ण और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। यह दलीप ट्रॉफी मुकाबला उनके फर्स्ट-क्लास करियर का केवल 10वां मैच है। उनके शुरुआती 9 मैचों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उन्होंने 16.53 की औसत से कुल 215 रन बनाए हैं, जिसमें उनके बल्ले से एक अर्धशतक निकला है। रेड-बॉल क्रिकेट का यह स्तर उनके लिए नया है और आंकड़े बताते हैं कि लंबी पारियां खेलने के लिए उन्हें अभी अपनी तकनीक में और परिपक्वता लानी होगी।
दलीप ट्रॉफी का शुरुआती सफर
इस टूर्नामेंट में उनका आगाज बहुत शानदार नहीं रहा था। नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ अपने पहले दलीप मैच की पहली पारी में यह बाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए थे। हालांकि, उन्होंने बल्ले की असफलता की भरपाई अपनी गेंदबाजी से की थी। उन्होंने अपनी उपयोगी स्पिन गेंदबाजी का जौहर दिखाते हुए 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए और टीम को एक पारी से बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। अब कप्तानी का यह नया अनुभव उनके करियर को एक नई दिशा दे सकता है।



















