नई दिल्ली। सरकारी सेवा पूरी करने के बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले लीव इनकैशमेंट यानी अर्जित अवकाश के बदले नकद भुगतान के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले आठवें वेतन आयोग के दौरान इस विषय पर एक खास प्रस्ताव पर विचार चल रहा है, जिसके तहत छुट्टियों के इनकैशमेंट की अधिकतम सीमा को मौजूदा 300 दिनों से बढ़ाकर सीधे 450 दिन तक किए जाने की तैयारी है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के ठीक बाद मिलने वाले एकमुश्त वित्तीय लाभ में लाखों रुपये की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
क्या है नया प्रस्ताव और कैसे बढ़ेगा लाभ
मौजूदा व्यवस्था के नियमों के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों को रिटायरमेंट के वक्त अधिकतम 300 दिनों तक की बची हुई छुट्टियों का ही नकद भुगतान मिल पाता है। लेकिन नए प्रस्ताव के सामने आने के बाद इसमें 150 दिनों की और अतिरिक्त छुट्टी जोड़ने की मांग की गई है, जिससे कुल सीमा बढ़कर 450 दिनों तक पहुंच जाएगी। हालांकि अभी इस मामले में किसी प्रकार की आधिकारिक अंतिम मुहर नहीं लगी है, लेकिन यदि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत इस पर सकारात्मक फैसला आता है, तो कर्मचारियों के हाथ में रिटायरमेंट के समय एक बड़ी रकम आएगी जो उनके भविष्य को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाएगी।
मौजूदा लीव इनकैशमेंट की कार्यप्रणाली
सरकारी नियमों के तहत कर्मचारियों को उनकी पात्र अर्न्ड लीव यानी ईएल के बदले में यह सुविधा प्रदान की जाती है। पूरी नौकरी के दौरान कर्मचारियों को अपने कोटे से कुल 300 ईएल तक जमा करने की अनुमति मिलती है, और इन छुट्टियों के एवज में उनकी आखिरी मूल वेतन के अनुसार भुगतान किया जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान समय में रिटायरमेंट के वक्त अधिकतम 300 दिनों के बेसिक वेतन के बराबर राशि मिल जाती है। मगर आठवें वेतन आयोग के अंतर्गत इसे संशोधित करके छुट्टियों के इस आंकड़े को 450 दिन तक पहुंचाने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि कर्मचारियों को उनकी लंबी सेवा का और अधिक बेहतर आर्थिक परिणाम मिल सके।
कर्मचारी संगठनों की तरफ से रखी गई मांग
इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कर्मचारी संगठनों ने भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने वेतन आयोग के तमाम सम्मानित सदस्यों के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठकों में यह विशेष मांग जोर-शोर से उठाई है कि लीव इनकैशमेंट के कुल दिनों की संख्या को 300 से बढ़ाकर 450 किया जाना चाहिए। संगठन का तर्क है कि इससे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन में बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान प्रावधानों के तहत सिर्फ 300 दिनों की छुट्टी के बराबर ही पैसा मिल पाता है, लेकिन यदि इन 150 दिनों की संख्या में बढ़ोतरी होती है तो रिटायरमेंट के वक्त हाथ आने वाली कुल राशि में भी बड़ा उछाल आएगा।
किस तरह से की जाती है इनकैशमेंट की गणना
यदि बात की जाए लीव इनकैशमेंट के कैलकुलेशन की, तो इसकी पूरी गणना मूल वेतन यानी बेसिक पेमेंट और महंगाई भत्ता यानी डीए के आधार पर तय की जाती है। जब कोई कर्मचारी सेवा निवृत्त होता है, उस वक्त उसका जितना भी बेसिक वेतन और डीए बन रहा होता है, उसे कुल पात्र छुट्टी के दिनों की संख्या से गुणा करके अंतिम राशि निकाली जाती है। मौजूदा समय में लगभग 10 महीने की छुट्टी के बराबर का पैसा रिटायरमेंट के समय दिया जाता है, जिसे अब कर्मचारी संगठनों ने बढ़ाकर 15 महीने के बराबर करने की पुरजोर मांग रखी है। सबसे बड़ी राहत की बात यह होती है कि इस तरह मिलने वाले पैसों पर किसी भी प्रकार की टैक्स की देनदारी नहीं बनती है, जिसकी वजह से लीव इनकैशमेंट रिटायरमेंट के वक्त एकमुश्त मोटी रकम हासिल करने का सबसे बड़ा और सुरक्षित जरिया साबित होता है।


















