राष्ट्रीय राजधानी में आगामी राजनीतिक हलचलों और विपक्षी दलों के शक्ति प्रदर्शन से पहले सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पुलिस मुख्यालय पहुंचकर एक व्यापक सुरक्षा समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि आगामी 1 नवंबर को होने वाले विपक्षी प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करने वाले किसी भी अराजक तत्व से बेहद सख्ती से निबटा जाए।
शीर्ष अधिकारियों के साथ सुरक्षा रणनीति पर मंथन
इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, खुफिया ब्यूरो प्रमुख महेश दीक्षित सहित गृह मंत्रालय और नगर पुलिस के आला अधिकारी शामिल हुए। बैठक का प्राथमिक एजेंडा राष्ट्रीय राजधानी के भीतर शांति व्यवस्था बनाए रखना और प्रस्तावित राजनीतिक जमावड़ों के दौरान किसी भी आकस्मिक अप्रिय घटना को रोकने की पूर्व तैयारी सुनिश्चित करना था।
संवेदनशील इलाकों में निगरानी और तकनीकी बंदोबस्त
विगत समय में विरोध प्रदर्शनों को संयमित तरीके से संभालने के लिए पुलिस तंत्र की भूमिका की सराहना की गई। साथ ही यह साफ रेखांकित किया गया कि किसी भी समूह अथवा व्यक्ति को कानून व्यवस्था हाथ में लेने की छूट नहीं दी जा सकती। पुलिस तंत्र को निर्देशित किया गया है कि वे शहर के संवेदनशील हिस्सों में अपनी गश्त बढ़ाएं और सार्वजनिक परिसरों में महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें। संदिग्ध गतिविधियों और चेहरों की पहचान के लिए सीसीटीवी कैमरों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI आधारित तकनीकों के व्यापक इस्तेमाल पर बल दिया गया।
सीमाओं पर सख्त पहरा और सुरक्षा बलों का भारी जमावड़ा
बाहरी अराजक तत्वों को राजधानी में प्रवेश करने से रोकने के लिए दिल्ली के सभी सीमावर्ती प्रवेश द्वारों पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। शहर की आंतरिक और सीमा सुरक्षा को पुख्ता करने के उद्देश्य से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों यानी सीएपीएफ की 250 से अधिक कंपनियां तैनात की जा चुकी हैं। इस तैनाती में सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ और रैपिड एक्शन फोर्स यानी आरएएफ की टुकड़ियां शामिल हैं। महिला कर्मियों से लैस इन सुरक्षा दस्तों की ड्यूटी अवधि को 31 अक्टूबर तक बढ़ाया गया है, जिसकी समीक्षा कर जरूरत पड़ने पर इसे आगे भी जारी रखा जाएगा।
विपक्षी कार्यक्रम और व्यापारिक संगठनों की चिंता
कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी इंडिया गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव से जुड़े मुद्दे पर 30 अक्टूबर को एक प्रतीकात्मक संसदीय सत्र आयोजित करने की योजना बनाई है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए 1 नवंबर को रामलीला मैदान तक एक विशाल मार्च निकालने का कार्यक्रम तय किया गया है। दूसरी तरफ, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी सीटीआई सहित दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने 1 नवंबर को होने वाले इस जमावड़े को टालने की अपील की है। व्यापारियों ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बाकायदा पत्र भेजकर रैली को 10 नवंबर के बाद रखने का आग्रह किया है, क्योंकि उनका मानना है कि त्योहारी सीजन में ऐसे बड़े आयोजनों से उनके कारोबार पर विपरीत आर्थिक प्रभाव पड़ेगा। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन जारी रहेगा।



















