कच्चे तेल में भारी उथल-पुथल: मिडिल ईस्ट सप्लाई और ग्लोबल तनाव के बीच ऊर्जा बाजार में दबावबिस्किट का क्रंच बरकरार रखने के स्मार्ट किचन नुस्खे, नमी से बचाने के आसान नियमअमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में किया 0.25% का इजाफा, 2023 के बाद पहली बार सख्त हुआ रुखअमेरिकी ब्याज दरों पर फेड अधिकारी बार्किन ने दिया बयान, वैश्विक मुद्राओं और सोने में हलचलहैदराबाद के होटल में विशाखापत्तनम की युवती की संदिग्ध मौत, साथी युवक अस्पताल में छोड़कर फरारडीसीयू की क्लेफेस में मुख्य खलनायक का असली डरावना रूप केवल सिनेमाघरों में ही दिखेगावित्तीय संकट में घिरी एयर इंडिया, सालाना घाटा बढ़कर ₹22,238 करोड़ के पार पहुंचामध्य प्रदेश में गरबा प्रवेश और टिप्पणी पर विवाद के बाद रामेश्वर शर्मा और कैलाश विजयवर्गीय ने दी सफाईअयोध्या के संग्रहालय में सुरक्षित हुई वाल्मीकि रामायण की दुर्लभ पांडुलिपि, 1792 ईस्वी की विरासत का हुआ हस्तांतरणऋषि और नीतू कपूर की शादी में नुसरत ने छेड़ी थी जो तान, कैसे बना था कोयला का वह यादगार नगमा
कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ा, सरकार ने अनिवार्य ईपीएफओ वेतन सीमा को ₹25,000 कियाव्यापार
22 सित॰ 2026, 11:31 pm (31 मिनट पहले)· 0

कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ा, सरकार ने अनिवार्य ईपीएफओ वेतन सीमा को ₹25,000 किया

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारियों को पीएफ, पेंशन और बीमा का लाभ मिलेगा।

संगठित क्षेत्र के वेतनभोगी कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा ढांचे में एक बड़ा विस्तार करते हुए केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अनिवार्य कवरेज नियमों में अहम संशोधन किया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में अनिवार्य ईपीएफओ सदस्यता के लिए मासिक वेतन सीमा को मौजूदा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई है। इस नीतिगत निर्णय का सीधा प्रभाव देश के उन लाखों वेतनभोगियों पर पड़ेगा, जो अब तक वैधानिक पीएफ व्यवस्था की अनिवार्य परिधि से बाहर रह जाते थे। इस कदम से 51 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के अंतर्गत शामिल हो सकेंगे, जिससे उनके भविष्य की वित्तीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

नए वेतनभोगियों को मिलेगा अनिवार्य सुरक्षा तंत्र

इस फैसले का प्राथमिक असर ₹15,000 से लेकर ₹25,000 के वेतन दायरे में नौकरी शुरू करने वाले कामगारों पर दिखेगा। अब तक लागू व्यवस्था के तहत, यदि किसी नए कर्मचारी का शुरुआती मूल वेतन ₹15,000 प्रति माह से अधिक होता था, तो कंपनी के लिए उसे अनिवार्य भविष्य निधि योजना में शामिल करना कानूनन बाध्यकारी नहीं रहता था। इस कारण ₹15,001 से ₹25,000 के बीच वेतन पाने वाले अनेक कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा का वैधानिक लाभ नहीं मिल पाता था। वेतन सीमा बढ़कर ₹25,000 होने के बाद कंपनियों को इस श्रेणी के सभी नए कर्मचारियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा तंत्र में अनिवार्य रूप से जोड़ना होगा।

पीएफ के साथ पेंशन और जीवन बीमा की तिहरी सुविधा

ईपीएफओ की सदस्यता केवल सामान्य भविष्य निधि (ईपीएफ) में मासिक जमा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह कामगारों को तीन स्तरीय वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। नई वेतन सीमा के तहत शामिल होने वाले कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के माध्यम से अपनी सेवानिवृत्ति के लिए नियमित बचत का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही, वे कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के अंतर्गत जीवन भर के लिए पेंशन लाभ के पात्र बनेंगे। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना (ईडीएलआई) के तहत उन्हें अनिवार्य जीवन बीमा कवर भी प्राप्त होगा, जिससे किसी अप्रत्याशित संकट की स्थिति में कर्मचारी के परिवार को मजबूत वित्तीय आधार मिल सके।

सरकारी खजाने पर खर्च का विवरण

अनिवार्य वेतन सीमा में ₹10,000 की इस वृद्धि का सीधा असर केंद्र सरकार के वार्षिक वित्तीय बजट पर भी देखने को मिलेगा। आधिकारिक वित्तीय अनुमानों के मुताबिक, इस बदलाव को लागू करने के कारण सरकार का वार्षिक खर्च लगभग ₹11,339 करोड़ तक पहुंच जाएगा। वर्तमान में ईपीएफओ योजनाओं के लिए सरकार की ओर से दी जाने वाली वार्षिक बजटीय सहायता लगभग ₹10,250 करोड़ है। आगामी पांच वर्षों की अवधि में इस फैसले को क्रियान्वित करने के लिए सरकारी खजाने से करीब ₹56,696 करोड़ की कुल राशि खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।

औपचारिक रोजगार और ईपीएफओ का मौजूदा दायरा

इस नए फैसले से करीब 51 लाख नए कर्मचारियों के जुड़ने के साथ ही देश में औपचारिक रोजगार के आंकड़ों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी। ईपीएफओ भारत के सबसे विशाल सामाजिक सुरक्षा संगठनों में से एक है। संगठन के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में ईपीएफओ के पास लगभग 7.98 करोड़ नियमित अंशदान करने वाले सदस्य पंजीकृत हैं। वहीं, इस व्यवस्था के तहत लगभग 7.68 लाख व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपने कर्मचारियों का अंशदान नियमित तौर पर जमा कर रहे हैं। इसके अलावा, कर्मचारी पेंशन योजना के अंतर्गत वर्तमान में लगभग 82 लाख सेवानिवृत्त नागरिकों को हर महीने पेंशन लाभ प्रदान किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

ईपीएफओ की अनिवार्य वेतन सीमा को कितना बढ़ाया गया है?
ईपीएफओ के तहत अनिवार्य कवरेज की मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया गया है।
इस फैसले से कितने अतिरिक्त कर्मचारियों को लाभ पहुंचने का अनुमान है?
सरकारी अनुमान के अनुसार, इस बदलाव से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफओ कवरेज के दायरे में आ सकेंगे।
ईपीएफओ में शामिल होने पर कर्मचारियों को कौन-कौन से लाभ मिलते हैं?
कर्मचारियों को ईपीएफ के तहत रिटायरमेंट बचत, ईपीएस के तहत मासिक पेंशन और ईडीएलआई योजना के तहत जीवन बीमा की सुरक्षा मिलती है।
इस फैसले से केंद्र सरकार के वार्षिक खर्च में कितनी बढ़ोतरी होगी?
इस नीतिगत बदलाव के बाद सरकार का वार्षिक खर्च करीब ₹11,339 करोड़ रहने का अनुमान है, जो पहले लगभग ₹10,250 करोड़ था।
पांच वर्षों में इस योजना पर सरकारी खजाने से कितना खर्च होने का अनुमान है?
उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगले पांच वर्षों में इस फैसले पर अनुमानित खर्च करीब ₹56,696 करोड़ रहेगा।
वर्तमान में ईपीएफओ के सक्रिय सदस्यों और पेंशनभोगियों की संख्या कितनी है?
वर्तमान में ईपीएफओ में करीब 7.98 करोड़ योगदान देने वाले सदस्य और ईपीएस के तहत लगभग 82 लाख पेंशनभोगी जुड़े हुए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp