देश की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले सेवा क्षेत्र की सेहत अब हर महीने एक नए पैमाने पर नापी जाएगी। भारत जुलाई 2026 में Index of Services Production (ISP) यानी सेवा उत्पादन सूचकांक की शुरुआत करने जा रहा है, जो मासिक आधार पर बताएगा कि देश का सर्विस सेक्टर किस रफ्तार से बढ़ रहा है।
अभी तक फैक्ट्री और कारखानों के उत्पादन को मापने के लिए IIP यानी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक का इस्तेमाल होता है। ISP ठीक उसी तर्ज पर काम करेगा, बस फर्क इतना होगा कि यह औद्योगिक नहीं बल्कि सेवा क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखेगा। मकसद साफ है, जिस तरह IIP कारखानों के कामकाज में होने वाले छोटे से छोटे बदलाव को पकड़ता है, उसी तरह ISP सेवाओं की अल्पकालिक हलचल को सामने लाएगा।
कब आएगा पहला आंकड़ा
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस सूचकांक का पहला रिलीज जुलाई 2026 में आने की उम्मीद है। इससे पहले 14 जुलाई 2026 को वित्त वर्ष 2025-26 और अप्रैल 2026 के लिए ट्रायल मासिक सूचकांक जारी किए जाएंगे, ताकि असल लॉन्च से पहले व्यवस्था को परखा जा सके।
कैसे तैयार होगा यह इंडेक्स
ISP के लिए आधार वर्ष 2024-25 रखा गया है। इसे हर महीने जारी किया जाएगा, लेकिन शुरुआत में आंकड़े करीब 60 दिन की देरी से आएंगे। यानी हर महीने की 29 तारीख के आसपास इसका डेटा प्रकाशित होगा।
इस सूचकांक की रीढ़ GSTN का डेटा होगा। इसके साथ ही अलग-अलग मंत्रालयों और नियामकों के प्रशासनिक रिकॉर्ड का भी इस्तेमाल किया जाएगा। मंत्रालय इस पूरे ढांचे में Annual Survey of Incorporated Services Sector Enterprises (ASISSE) यानी निगमित सेवा क्षेत्र उद्यमों के वार्षिक सर्वेक्षण को भी शामिल करने की योजना बना रहा है।
किन क्षेत्रों पर रहेगी नजर
शुरुआती दौर में यह सूचकांक औपचारिक यानी फॉर्मल सेवाओं को कवर करेगा। इनमें ये क्षेत्र शामिल हैं:
- थोक और खुदरा व्यापार
- परिवहन
- बैंकिंग
- बीमा
- दूरसंचार
- होटल और रेस्तरां
- रियल एस्टेट
- पेशेवर, वैज्ञानिक और तकनीकी सेवाएं
- कला, मनोरंजन और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां
स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं फिलहाल इस सूची से बाहर हैं। जैसे-जैसे इनसे जुड़ा पर्याप्त डेटा उपलब्ध होगा, इन दोनों क्षेत्रों को बाद में जोड़ने की योजना है।
कौन से क्षेत्र रहेंगे बाहर
मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि कुछ क्षेत्रों को इस सूची में जगह नहीं दी गई है। इसकी वजह यह है कि ये या तो सरकार की मुख्य गतिविधियों से जुड़े हैं, या फिर इन पर गैर-बाजार गतिविधियों और अनौपचारिक क्षेत्र का दबदबा है। जिन उप-क्षेत्रों को बाहर रखा गया है, वे हैं:
- लोक प्रशासन और रक्षा
- बैंकिंग और बीमा को छोड़कर वित्तीय सेवाएं (जैसे केंद्रीय बैंक की गतिविधियां, मनी मार्केट फंड)
- बिना आवास वाली सामाजिक कार्य गतिविधियां
- सदस्यता आधारित संगठनों की सेवाएं
- व्यक्तिगत सेवाएं
- कर्मचारियों को रखने वाले निजी परिवारों की गतिविधियां
- राज्यक्षेत्र से बाहर के संगठनों की गतिविधियां
- सरकार द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं
- जुआ और सट्टेबाजी से जुड़ी गतिविधियां













