यदि आप मुरादाबाद में किसी नए और लाभदायक कारोबार की तलाश कर रहे हैं, तो टोफू यानी सोया पनीर का उत्पादन एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। इस व्यवसाय को स्थापित करने के लिए आपको विशेष मशीनों की आवश्यकता होगी, जिनकी खरीद और स्थापना में उद्यान विभाग आपकी पूरी सहायता करता है। विभाग की ओर से इस स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए सरकारी सब्सिडी का लाभ भी प्रदान किया जाता है, जिससे शुरुआती वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हो जाता है।
टोफू बनाने की पूरी प्रक्रिया
इस कारोबार की निर्माण प्रक्रिया बहुत कुछ पारंपरिक डेयरी पनीर जैसी ही होती है, लेकिन इसमें पशुओं के दूध का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता वाले सोयाबीन को पीसकर उसका दूध निकाला जाता है। इसके बाद इस दूध को फाड़कर छेना तैयार किया जाता है। इस ठोस हिस्से को सांचों में दबाकर और अच्छी तरह सेट करके सोया पनीर यानी टोफू का रूप दिया जाता है। चूंकि लोग अब स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं, इसलिए बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
पोषण और मांग के मामले में आगे
उद्यान विभाग में डीआरपी के पद पर कार्यरत विमल कुमार तोमर के अनुसार, यह उद्यम बेहद कम लागत में शुरू किया जा सकता है। सोयाबीन से तैयार होने वाले इस उत्पाद की पोषण गुणवत्ता सामान्य दूध से बने पनीर की तुलना में काफी बेहतर मानी जाती है। यही वजह है कि आज के समय में शहर के बड़े रेस्टोरेंट और होटलों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि इसका स्वाद और टेक्सचर बिल्कुल पारंपरिक पनीर जैसा ही होता है, लेकिन इसके स्वास्थ्य लाभ और कम उत्पादन लागत इसे बाजार में बेहद लोकप्रिय बना रहे हैं।
मुरादाबाद में वर्तमान स्थिति और सरकारी मदद
स्थानीय स्तर पर इस व्यवसाय की संभावनाओं को देखें तो यह अभी अपने शुरुआती चरण में है। मुरादाबाद जिले में इस समय केवल तीन इकाइयां ही सफलतापर्वक संचालित हो रही हैं, जबकि कई अन्य नए प्रोजेक्ट अभी पाइपलाइन में हैं और जल्द शुरू होने वाले हैं। इस उद्योग को लगाने वाले उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार की तरफ से कुल प्रोजेक्ट लागत पर 35 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दी जा रही है।
लागत और संभावित मासिक मुनाफा
विमल कुमार तोमर ने जानकारी दी है कि इस पूरे प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए लगभग 5 से 7 लाख रुपये के शुरुआती निवेश की जरूरत पड़ती है। इस व्यवसाय से होने वाली आय पूरी तरह से बाजार में टोफू की मांग पर टिकी हुई है। जितनी अधिक मांग होगी, मुनाफा उतना ही अधिक होगा। अनुमान के मुताबिक, 5 से 7 लाख रुपये के इस प्रोजेक्ट से हर महीने लगभग 50,000 से 55,000 रुपये तक का शुद्ध लाभ आसानी से कमाया जा सकता है।



















