शाहजहांपुर क्षेत्र के अन्नदाताओं के लिए खेती के जरिए तगड़ा मुनाफा कमाने का बेहतरीन दौर आ चुका है। यदि सही वक्त पर फूलगोभी की फसल की रोपाई कर दी जाए, तो बाजार में उपज उतरते ही सबसे ऊंचे दाम हासिल किए जा सकते हैं। इस तरीके से केवल बंपर कमाई ही नहीं होती, बल्कि फसल जल्दी कटने के बाद खेत भी अगली बुआई के वास्ते समय से पहले खाली हो जाता है। आधुनिक और वैज्ञानिक तौर-तरीकों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य आसानी से पूरा कर सकते हैं।
क्षेत्र के जाने-माने युवा प्रगतिशील किसान रनजोद सिंह ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि फूलगोभी की अगेती फसल लगाना किसानों के लिए किसी सुनहरे अवसर से कम नहीं है। अनुकूल मौसम में नर्सरी तैयार करने, खेत की गहरी जुताई करने और गोबर की खाद का सही इस्तेमाल करने से पौधों की ग्रोथ बहुत तेजी से होती है। इसके अलावा पौधों के बीच तय फासला बनाए रखना और खेतों में पानी जमा न होने देना बेहद जरूरी है। इन सभी वैज्ञानिक पैंतरों को आजमाने से फसल कीटों के हमलों से महफूज रहती है और कम खर्च में बंपर पैदावार मिलती है।
फूलगोभी की शुरुआती किस्मों को जमीन में उतारने के लिए वर्तमान समय सबसे मुफीद माना गया है। इस अवधि में पौधे लगाने से फसल तय वक्त से पहले ही मंडियों तक पहुंच जाती है। जुलाई महीने में तैयार की गई पौध को अगस्त या सितंबर के दौरान खेतों में स्थापित करना सबसे सही रहता है। शुरुआती दिनों में उचित तापमान मिलने की वजह से पौधों का विकास शानदार होता है और फूल भी काफी बड़े तथा आकर्षक आकार के निकलते हैं।
फसल की शुरुआत करने से पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए खेत की दो से तीन बार ठीक प्रकार से जुताई करनी चाहिए। जुताई के वक्त प्रति एकड़ के हिसाब से 8 से 10 टन पुरानी और सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिला देनी चाहिए। खेत में जल निकासी का मजबूत इंतजाम होना अनिवार्य है ताकि बारिश का अतिरिक्त पानी वहां टिक न सके। इसके बाद खेत के अंदर 45 से 60 सेमी की दूरी पर मेड़ या बैड तैयार किए जाते हैं, जिन पर पौधे लगाने से जड़ें सड़ने से बच जाती हैं।
पौधों को खेत में स्थापित करते समय कुछ खास बातों का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। रोपाई का कार्य हमेशा शाम के वक्त ही करना चाहिए ताकि तेज धूप के कारण कोमल पौधे मुरझा न जाएं। पौधे लगाने के फौरन बाद उनमें हल्का पानी देना आवश्यक होता है। एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच 30 से 40 सेमी की दूरी और एक कतार से दूसरी कतार के बीच 45 सेमी का फासला होना चाहिए। पौधे जमीन में उतारने से पहले उनकी जड़ों को फंगीसाइड के घोल में जरूर डुबोना चाहिए, जिससे फंगस और शुरुआती बीमारियों का खतरा लगभग समाप्त हो जाता है।
अगेती फसल उगाने के कई बड़े और स्पष्ट फायदे देखने को मिलते हैं। इस दौरान मंडियों में फूलगोभी की मांग काफी ज्यादा होती है जबकि आवक कम बनी रहती है। इसी असंतुलन के कारण किसानों को अपनी फसल के बहुत ऊंचे और प्रीमियम दाम मिलते हैं। चूंकि फसल तय समय से पहले ही कटकर बाजार में बिक जाती है, इसलिए खेत समय पर खाली हो जाता है और किसान बिना किसी देरी के अगली रबी फसल की तैयारी शुरू कर सकते हैं। कम अवधि में ज्यादा मुनाफा कमाने की चाह रखने वालों के लिए यह तकनीक बेहद कारगर साबित होती है।


















