हवाई सफर करने वालों के लिए एक अच्छी खबर है। एयर इंडिया समूह आने वाले 18 महीनों के भीतर अपने बेड़े में 50 से 60 नए विमान जोड़ने की योजना पर काम कर रहा है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक एयरलाइन का कायाकल्प करने वाला अभियान अपनी तय दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है, हालांकि इस दौरान विमानन कारोबार को कई ऐसी मुश्किलों से गुजरना पड़ा जिनका पहले से अंदाजा लगाना मुमकिन नहीं था। एयर इंडिया के चीफ कमर्शियल ऑफिसर और एयर इंडिया एक्सप्रेस के चेयरमैन निपुण अग्रवाल का कहना है कि बीते कुछ बरसों में कंपनी ने कई अहम सबक सीखे हैं।
अग्रवाल के अनुसार यह पूरी बदलाव प्रक्रिया बेहद पेचीदा और चुनौतियों से भरी रही है। घाटे में डूबी इस सरकारी एयरलाइन को जनवरी 2022 में टाटा समूह ने अपने हाथ में लिया था। उन्होंने बताया कि सप्लाई चेन की अड़चनें, हवाई क्षेत्र से जुड़ी दिक्कतें, ईंधन की कीमतों में लगातार घटती-बढ़ती चाल और दुनिया भर की भू-राजनीतिक हलचल जैसी कई वजहों ने इस उद्योग की राह मुश्किल बनाई। इन तमाम रुकावटों के बावजूद कंपनी अपने तय खाके के मुताबिक कदम बढ़ा रही है।
600 विमानों का ऑर्डर, अभी 10 फीसदी से भी कम डिलीवरी
अग्रवाल ने जानकारी दी कि एयर इंडिया समूह ने करीब 600 विमानों का ऑर्डर दे रखा है और इनमें से अब तक 10 प्रतिशत से भी कम विमान ही कंपनी को मिल पाए हैं। उनका कहना है कि आने वाले सालों में डिलीवरी की रफ्तार तेज होगी। अगले सात से आठ साल तक हर साल तकरीबन 50 से 60 नए विमान बेड़े में शामिल होने की उम्मीद है। इनमें 10 से 15 बड़े आकार वाले विमान होंगे, जबकि 45 से 50 छोटे आकार के विमान रहेंगे। उन्होंने माना कि पुराने पड़ चुके विमानों और पुराने केबिन की वजह से परिचालन में दिक्कतें आईं, लेकिन अब हालात सुधर रहे हैं। बेड़े को आधुनिक बनाने और विमानों को अपग्रेड करने का काम अब पहले से कहीं तेज गति पकड़ चुका है।
बेड़े को एक जैसा बनाने की तैयारी
एयर इंडिया एक्सप्रेस अगले साल मार्च तक अपने सभी विमानों को एक समान बेड़े में ढालने की योजना पर आगे बढ़ रही है। दूसरी तरफ, एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमानों को नए सिरे से संवारने का काम अगले साल के मध्य तक पूरा हो जाने की उम्मीद है, जबकि बोइंग 777 विमानों में इससे ज्यादा वक्त लग सकता है। अग्रवाल ने बताया कि बोइंग मैक्स-8 विमानों की डिलीवरी तय समय-सारणी के हिसाब से चल रही है। वहीं मैक्स-10 विमान प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी होते ही कंपनी के बेड़े में आने शुरू हो जाएंगे।
नेटवर्क को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश
पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट और ईंधन के दामों के दबाव के चलते एयर इंडिया को कुछ उड़ानें घटानी पड़ी थीं। अब कंपनी इस साल की दूसरी छमाही से अपने नेटवर्क को दोबारा मजबूत करने में जुट गई है। एयरलाइन का कहना है कि अगले कुछ महीनों में वह अपनी सेवाओं को युद्ध से पहले वाले स्तर पर लौटा लेगी। इसके साथ ही यात्रियों का सफर और सुखद बनाने के मकसद से कंपनी फ्लाइट क्रू तथा हवाई अड्डे के कर्मचारियों की ट्रेनिंग, नई सेवा प्रणालियों और तकनीकी सिस्टम पर बड़ा निवेश कर रही है।



















