देश की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया में डोप टेस्ट की प्रक्रिया के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। कंपनी के तीन और पायलट जांच में असफल पाए गए हैं, जिससे विमानन महकमे में खलबली मच गई है। इन सभी के शुरुआती सैंपल में दिक्कत आने के बाद अब इनका दूसरा परीक्षण कराया जा रहा है, ताकि यह पूरी तरह स्पष्ट हो सके कि ये गांजा या भांग जैसे मादक पदार्थों का सेवन करते हैं या फिर किसी अन्य चिकित्सीय दवा की वजह से रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
फुकेट उड़ान की घटना के बाद उठा कदम
यह पूरा मामला तब तूल पकड़ा जब फुकेट से दिल्ली आ रही एक उड़ान के दौरान विमान गंभीर एयर टर्बुलेंस का शिकार हो गया था। उस घटना की जब आंतरिक जांच की गई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। शुरुआती पड़ताल के दौरान इस बात के संकेत मिले कि विमान उड़ाने वाले कुछ चालक दल के सदस्य गांजे के नशे में थे। इस खुलासे के बाद एयरलाइन प्रबंधन ने अपने सभी पांच हजार से अधिक पायलटों की अनिवार्य रूप से डोप जांच कराने का कड़ा निर्णय लिया था।
जांच का दायरा और पहले चरण के नतीजे
इस बड़े अभियान के तहत कंपनी ने शुरुआती चरण में करीब तीन सौ पायलटों के सैंपल लेकर उनकी जांच कराई। इसी प्रक्रिया में तीन पायलट तय मानकों पर खरे नहीं उतर पाए और डोप टेस्ट में फेल हो गए। अब नियमों के मुताबिक इन तीनों का दोबारा टेस्ट किया जा रहा है, ताकि यह पुख्ता किया जा सके कि कहीं वे सूखे नशे की गिरफ्त में तो नहीं हैं। एयर इंडिया की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि अंतिम जांच में भी नशा करने की पुष्टि होती है, तो दोषी पायलटों के खिलाफ बेहद सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, शुरुआती रिपोर्ट संदिग्ध आने के बाद दूसरे चरण की पुष्टि के बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जाता है।
छुट्टियों पर जाने लगे पायलट और बाकी जांच
मौजूदा समय में एयरलाइन के कुल पांच हजार में से करीब तीन सौ पायलटों का परीक्षण पूरा हो चुका है, जबकि लगभग सैंतालीस सौ पायलटों की जांच अभी बाकी है। इस ताबड़तोड़ और सख्त जांच अभियान के कारण पायलटों में हड़कंप मचा हुआ है और बचने के लिए कई लोग अचानक छुट्टी पर जा रहे हैं। इसके अलावा चालकों में इस बात का भी डर है कि कहीं उनके द्वारा ली जाने वाली कोई पेनकिलर यानी दर्दनिवारक या डिप्रेशन रोधी दवा डोप टेस्ट को प्रभावित न कर दे।



















