शुरुआती चरण में नर्सरी का इस तरह करें प्रबंधन
बरसात के मौसम में फूलगोभी की अगेती खेती के लिए नर्सरी तैयार करना सबसे नाजुक काम होता है। शाहजहांपुर जनपद के जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने TrendKia से बातचीत में बताया कि जुलाई महीने में फूलगोभी की नर्सरी तैयार करते समय पौधों को जमीन की सतह से करीब 15 सेंटीमीटर ऊपर उठी हुई क्यारियों में या फिर प्रो-ट्रे के भीतर ही उगाना चाहिए। वर्षा ऋतु में क्यारियों में जलभराव होने से नन्हे पौधे गलने लगते हैं, इसलिए जल निकासी की बेहतरीन व्यवस्था होना अनिवार्य है। क्यारी तैयार करते समय मिट्टी में आधी मात्रा सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट और थोड़ी मात्रा में कोकोपीट मिलाना फायदेमंद रहता है। इसके अलावा, शुरुआती अवस्था में फंगस जनित रोगों से सुरक्षा के लिए बीजों को हमेशा फंगीसाइड से उपचारित करने के बाद ही बोना चाहिए।
तेज धूप और मूसलाधार बारिश से पौधों का बचाव
मानसून के दौरान होने वाली मूसलाधार बारिश की सीधी बौछारों से कोमल पौधों को सुरक्षित रखने के लिए नर्सरी के ऊपर 50 प्रतिशत वाली शेड नेट या पारदर्शी पॉलिथीन की चादर का शेड जरूर बनाना चाहिए। अत्यधिक गर्मी और उमस वाले वातावरण के कारण पौधे अक्सर पतले और लंबे हो जाते हैं, इससे बचने के लिए सुबह और शाम के समय ही बेहद हल्की सिंचाई करें। इस वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए गए अगेती किस्म के पौधे महज 20 से 25 दिनों के भीतर मुख्य खेत में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं।
खेत की तैयारी और मिट्टी का चयन
फूलगोभी की अच्छी पैदावार के लिए पानी की उत्तम निकासी वाली बलुई दोमट या गहरी दोमट मिट्टी को सबसे बढ़िया माना जाता है। खेत की तैयारी के लिए सबसे पहले कल्टीवेटर से पहली जुताई करें। इसके बाद प्रति एकड़ खेत में कम से कम 8 से 10 टन अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद समान रूप से फैला दें। खाद डालने के बाद रोटावेटर चलाकर मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरा और समतल बना लें। खेत में पानी रुकने की समस्या से बचने के लिए मेढ़ या ऊंची कतारें बनाना सबसे उपयुक्त तरीका है।
रोपाई का सही तरीका और कतारों की दूरी
अगेती फूलगोभी की रोपाई हमेशा खेतों में बनाई गई मेढ़ों या कतारों पर ही की जानी चाहिए, ताकि बारिश का पानी सीधे पौधों के तने को छूकर उन्हें सड़ा न सके। रोपाई के दौरान कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे के बीच की दूरी लगभग 45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। पौधों की रोपाई का काम हमेशा दोपहर के बाद या शाम के समय ही करें, ताकि तेज धूप के कारण पौधे झुलसकर नष्ट न हों। रोपाई संपन्न होने के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करना आवश्यक है ताकि जड़ें मिट्टी को मजबूती से पकड़ सकें।
संतुलित पोषण और मुख्य रोगों से बचाव
बेहतर फसल के लिए गोभी को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित खुराक मिलना जरूरी है। रोपाई करते समय प्रति एकड़ की दर से 50 किलो DAP, 40 किलो म्यूटेट ऑफ पोटाश (MOP) और 25 किलो यूरिया का प्रयोग करें। फूलगोभी में अक्सर होने वाले 'ब्राउनिंग' रोग (जिसमें फूल भूरा हो जाता है) से बचाव के लिए 5 किलो बोरॉन का इस्तेमाल करें। इसके साथ ही 'विपटेल' नामक बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी में अमोनियम मोलिब्डेट मिलाना या उसका छिड़काव करना अत्यंत आवश्यक है।
बरसात में जल प्रबंधन और निराई-गुड़ाई
चूंकि जुलाई के दौरान लगातार बारिश होती है, इसलिए खेत में सिंचाई केवल तभी करें जब सूखा जैसी स्थिति दिखे। ध्यान रहे कि किसी भी परिस्थिति में खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए, अन्यथा पौधों में जड़ गलन और तना सड़न जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। अतिरिक्त पानी को तुरंत बाहर निकालने के लिए खेत के चारों कोनों पर गहरी नालियां बनाना सुरक्षित रहता है।
डॉ. पुनीत कुमार पाठक के अनुसार, रोपाई के 15 से 20 दिनों के भीतर पहली निराई-गुड़ाई जरूर कर देनी चाहिए ताकि अनावश्यक खरपतवार पौधों का भोजन न छीनें। गुड़ाई करने से जड़ों में हवा का आवागमन सुधरता है और पौधों का विकास तेजी से होता है। जब दूसरी निराई-गुड़ाई करें, तो पौधों की जड़ों पर हल्की मिट्टी अवश्य चढ़ा दें, इससे तेज हवाओं और बारिश के थपेड़ों के बीच पौधे सीधे खड़े रहते हैं और गिरते नहीं हैं।
हानिकारक कीटों और फंगस का नियंत्रण
बरसाती सीजन में फूलगोभी की फसल पर डायमंड बैक मोथ (DBM), तना छेदक और माहू जैसे कीटों का प्रकोप सबसे अधिक होता है। इनसे बचाव के लिए नियमित अंतराल पर नीम के तेल का छिड़काव करना चाहिए। यदि कीटों का हमला गंभीर रूप ले ले, तो विशेषज्ञों द्वारा अनुशंसित कीटनाशक का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, झुलसा और डाउनी मिल्ड्यू जैसे फफूंद जनित रोगों से फसल की रक्षा करने के लिए हर 12 से 15 दिनों के अंतराल पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड या SAAF फंगीसाइड का छिड़काव करते रहना चाहिए।













