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आईपीओ से पहले एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट ने स्वीकार की दस्तावेजों की कमी, निवेशकों की चिंता बढ़ीव्यापार
11 जुल॰ 2026, 12:57 pm (45 दिन पहले)· 1

आईपीओ से पहले एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट ने स्वीकार की दस्तावेजों की कमी, निवेशकों की चिंता बढ़ी

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड के आगामी आईपीओ के ठीक पहले कंपनी ने खुलासा किया है कि उनके तीन दशक पुराने कुछ महत्वपूर्ण रिकॉर्ड्स गुम हो गए हैं। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इन दस्तावेजों को लेकर किसी भी नियामकीय कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड का आईपीओ अगले सप्ताह बाजार में प्रवेश करने वाला है। हालांकि, इश्यू की घोषणा से ठीक पहले कंपनी ने अपने रेड हेयरिंग प्रोस्पेक्टस (RHP) में कुछ ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने बाजार के जानकारों को चौंका दिया है। कंपनी ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि उनके पास पिछले तीन दशकों से संबंधित कुछ बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। एसबीआई फंड्स ने साफ कहा है कि दस्तावेजों के गायब होने के कारण वे निवेशकों को भविष्य में किसी भी तरह की कानूनी या नियामकीय बाधाओं से पूर्ण सुरक्षा का भरोसा नहीं दे सकते हैं।

आईपीओ की प्रमुख जानकारियां

आम निवेशकों के लिए एसबीआई फंड्स का आईपीओ 14 जुलाई से 16 जुलाई के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा। कंपनी ने इसके लिए ₹545 से ₹574 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। कुल इश्यू का आकार ₹11,693 करोड़ रखा गया है। यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है, जिसका सीधा मतलब है कि इसमें कंपनी के मौजूदा प्रमोटर्स अपनी हिस्सेदारी बाजार में बेच रहे हैं और नई पूंजी कंपनी के खजाने में नहीं जाएगी।

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दस्तावेजों को खोजने के लिए की गई कोशिशें

गायब हुए रिकॉर्ड्स का संबंध लगभग 30 साल पुरानी गतिविधियों से है। विशेष रूप से 30 जून, 1992 को जारी किए गए एडिशनल इश्यू और 7 नवंबर, 1997 को लाए गए राइट्स इश्यू से संबंधित ऑफर लेटर और अलॉटमेंट लेटर्स का पता नहीं लग पा रहा है। इन दस्तावेजों को ढूंढने के लिए कंपनी ने हर संभव प्रयास किए, जिसमें मनीष घिया एंड एसोसिएट्स नामक एक स्वतंत्र कंपनी सेक्रेटरी फर्म को भी जांच का जिम्मा सौंपा गया था। इस फर्म ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) के पास उपलब्ध फाइलों, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय के डिजिटल रिकॉर्ड्स और कंपनी के अपने दफ्तरों में गहन छानबीन की, लेकिन वांछित दस्तावेज कहीं नहीं मिले।

नियामकीय अनिश्चितता का खतरा

कंपनी ने आरएचपी के माध्यम से निवेशकों को आगाह किया है कि वर्तमान में इन गुमशुदा दस्तावेजों को लेकर उनके खिलाफ कोई भी कानूनी कार्यवाही या पेनाल्टी नहीं चल रही है। इसके बावजूद, एसबीआई फंड्स ने ईमानदारी से माना है कि भविष्य के लिए वे कोई गारंटी नहीं दे सकते। कंपनी का कहना है, हम यह आश्वासन देने की स्थिति में नहीं हैं कि भविष्य में गुम या अनुपलब्ध दस्तावेजों के चलते कंपनी के विरुद्ध कोई कानूनी या रेगुलेटरी कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी।

एसबीआई फंड्स ने यह भी जोड़ा है कि यदि भविष्य में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) या अन्य नियामक संस्थाएं इस मामले में कोई कार्रवाई करती हैं, तो कंपनी पर कितना आर्थिक दंड लगाया जाएगा या कितना नुकसान होगा, इसका सटीक अनुमान लगाना असंभव है। ऐसी स्थिति न केवल कंपनी की वित्तीय सेहत पर असर डाल सकती है, बल्कि बाजार में उसकी साख और प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा सकती है।

सवाल-जवाब

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ कब खुला रहेगा?
यह आईपीओ निवेशकों के लिए 14 जुलाई से 16 जुलाई तक खुला रहेगा।
आईपीओ के लिए प्राइस बैंड क्या है?
कंपनी ने इसके लिए ₹545 से ₹574 प्रति शेयर का प्राइस बैंड निर्धारित किया है।
कौन से दस्तावेज गायब हैं?
कंपनी के 30 जून, 1992 के एडिशनल इश्यू और 7 नवंबर, 1997 के राइट्स इश्यू से संबंधित ऑफर और अलॉटमेंट लेटर गायब हैं।
क्या इन दस्तावेजों को खोजने की कोशिश की गई थी?
हां, कंपनी ने एक स्वतंत्र फर्म मनीष घिया एंड एसोसिएट्स के माध्यम से रिकॉर्ड्स खोजने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं मिले।
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