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पूर्वी चंपारण में विजय यादव की अनोखी पहल: ट्रिपल क्रॉस खेती से बदल रही है किसानों की तकदीरव्यापार
11 जुल॰ 2026, 11:59 am (45 दिन पहले)· 3

पूर्वी चंपारण में विजय यादव की अनोखी पहल: ट्रिपल क्रॉस खेती से बदल रही है किसानों की तकदीर

बिहार के पूर्वी चंपारण में एक किसान ने नींबू, ओल और मिर्च की एक साथ खेती कर नई मिसाल कायम की है। यह मॉडल कम जमीन और कम लागत में बंपर कमाई का जरिया बन गया है।

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में खेती की एक नई तस्वीर उभर रही है। पारंपरिक खेती के बजाय अब किसान आधुनिक तकनीकों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे कम खर्च और सीमित जमीन से भी बेहतर लाभ मिल सके। इसी दिशा में कदम उठाते हुए, तुरकौलिया प्रखंड के अमवा गांव निवासी किसान विजय यादव ने कृषि का एक नवाचारी मॉडल पेश किया है, जिसे वह 'ट्रिपल क्रॉस खेती' के नाम से संबोधित करते हैं।

खाली खेत का कुशल प्रबंधन

विजय यादव ने अपने पांच कट्ठा के भूखंड पर एक प्रयोग किया है। उन्होंने इस एक ही जमीन पर नींबू, ओल और मिर्च की फसल एक साथ उगाई है। विजय यादव के अनुसार, उनका मुख्य लक्ष्य नींबू का बगीचा तैयार करना था। उन्होंने अपने खेत में 100 नींबू के पौधे लगाए, जिसके लिए प्रत्येक पौधे के बीच 10x8 फीट की दूरी निर्धारित की। इस अंतराल में जो जमीन खाली बची, उसका सदुपयोग करने के लिए उन्होंने वहां ओल और मिर्च की खेती शुरू की।

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मुनाफे का गणित

खेती के लिए विजय यादव ने 'बनारसी कागजी नींबू' का चयन किया है। नींबू का यह बागान पूरी तरह विकसित होने और फल देने में लगभग डेढ़ साल का समय लेगा। इस दौरान, वे सिर्फ नींबू के पेड़ तैयार होने का इंतजार नहीं कर रहे, बल्कि बीच की फसल से भी मुनाफा सुनिश्चित कर रहे हैं। योजना के अनुसार, नवंबर में ओल की खुदाई करके उसे बाजार में बेचा जाएगा, जबकि मिर्च की तुड़ाई का सिलसिला जनवरी तक चलता रहेगा। इस तरह, नींबू की पहली फसल आने से पहले ही उन्हें इन दो अतिरिक्त फसलों से अच्छी कमाई प्राप्त हो जाएगी।

ट्रिपल क्रॉस खेती के महत्वपूर्ण टिप्स

विजय यादव का मानना है कि अन्य किसान भी इस पद्धति को अपनाकर लाभ उठा सकते हैं, लेकिन उन्हें कुछ तकनीकी बिंदुओं का ध्यान रखना चाहिए। उनके अनुसार, बहुफसली खेती के लिए हल्की बलुई मिट्टी सबसे उत्तम होती है। खेत का चयन करते समय यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि जमीन थोड़ी ऊंची हो, ताकि बरसात या सिंचाई के दौरान जलजमाव की समस्या न हो। साथ ही, वे रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खाद के उपयोग पर जोर देते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता बनाए रखने के लिए आवश्यक है। विजय यादव साल 2005 से सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपने खेतों में नीम की खली के साथ वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करते हैं। उनके इस सफल प्रयास को देखने के लिए अब क्षेत्र के अन्य किसान भी उनके खेतों तक पहुंचने लगे हैं।

सवाल-जवाब

ट्रिपल क्रॉस खेती क्या है?
यह एक ऐसी खेती पद्धति है जिसमें एक ही प्लॉट पर तीन अलग-अलग फसलों को एक साथ उगाया जाता है, जैसा कि विजय यादव ने नींबू, ओल और मिर्च के साथ किया है।
विजय यादव ने कौन सी नींबू की किस्म का उपयोग किया है?
उन्होंने अपने बगीचे में बनारसी कागजी नींबू की किस्म लगाई है।
इस खेती के लिए कौन सी मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है?
हल्की बलुई मिट्टी को इस तरह की बहुफसली खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
विजय यादव खेत में किस प्रकार के खाद का उपयोग करते हैं?
वे रसायनों के बजाय जैविक खाद जैसे नीम की खली और केंचुए से तैयार वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करते हैं।
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