उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में मत्स्य पालन से जुड़े किसानों और उद्यमियों की आय बढ़ाने तथा जलीय व्यवसाय को नया आयाम देने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। राज्य का मत्स्य पालन विभाग नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत कुल छह कल्याणकारी योजनाओं के जरिए सीधी सहायता और वित्तीय अनुदान दे रहा है। इस पहल के तहत नाव की खरीद से लेकर आधुनिक मशीनों तथा मोपेड तक पर सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए इंटरनेट के जरिए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 6 प्रमुख सरकारी योजनाएं
विभाग द्वारा संचालित की जा रही इन योजनाओं का दायरा छोटे और बड़े दोनों स्तर के मत्स्य पालकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान जिन प्रमुख छह योजनाओं में आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं, उनमें मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना और निषाद राज बोट सब्सिडी योजना विशेष रूप से शामिल हैं। इसके साथ ही सघन मत्स्य पालन को तकनीकी बढ़ावा देने के लिए एरेशन सिस्टम की स्थापना योजना चलाई जा रही है। व्यावसायिक विविधता लाने के उद्देश्य से मोती संवर्धन योजना तथा विशिष्ट प्रजाति की मत्स्य हैचरी स्थापना योजना को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया गया है। वहीं मत्स्य पालन कल्याण कोष के तहत मोपेड विद आइस बॉक्स योजना के जरिए उत्पाद को बाजार तक सुरक्षित पहुंचाने की सुविधा दी जा रही है।
बोट, मशीन और परिवहन के लिए मिलेगी सरकारी मदद
इस पहल का मुख्य उद्देश्य मछली पालकों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना और उत्पादन क्षमता में वृद्धि करना है। जो किसान बड़े पैमाने पर इस व्यवसाय से जुड़े हैं, उन्हें तालाबों में ऑक्सीजन स्तर बनाए रखने वाले एरेशन सिस्टम जैसे आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं ताजी मछलियों को बाजारों तक आसानी से पहुंचाने के लिए आइस बॉक्स से लैस मोपेड पर सब्सिडी दी जा रही है। जलग्रहण क्षेत्रों और नदियों में काम करने वाले मछुआरों के लिए नाव की खरीद में सीधी वित्तीय सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की गई है, ताकि वे सुरक्षित और प्रभावी ढंग से अपना काम कर सकें।
5 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन की अंतिम समय-सीमा
इन सभी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर डिजिटल माध्यम से फॉर्म जमा करने की व्यवस्था बनाई गई है। विभागीय पोर्टल fisheries.up.gov.in पर पंजीकरण प्रक्रिया चालू है, जहां उम्मीदवार घर बैठे आवेदन पूरा कर सकते हैं। समय-सीमा के संबंध में मत्स्य पालन अधिकारी आर्यन तिवारी ने स्पष्ट किया कि पात्र अभ्यर्थियों को 5 अगस्त से पहले अपनी प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए ताकि अंतिम समय में सर्वर या तकनीकी बाधाओं का सामना न करना पड़े।
विभागीय कार्यालय से भी प्राप्त कर सकते हैं सहायता
ऑनलाइन पोर्टल के अलावा यदि किसी मछली पालक को आवेदन दर्ज करने में परेशानी आती है या योजनाओं के नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी चाहिए, तो वे सीधे विभागीय दफ्तर आ सकते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, कार्यालय में उपस्थित कर्मचारी किसानों को फॉर्म भरने और आवश्यक दस्तावेज तैयार करने में पूरा मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों के उन आवेदकों को बड़ी राहत मिलेगी जो डिजिटल प्रक्रिया से पूरी तरह अवगत नहीं हैं।



















