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सिंगापुर के निर्यात ने तोड़े 38 साल के रिकॉर्ड, क्या भारत भी अपना व्यापार इसी तरह चमका सकता हैव्यापार
17 सित॰ 2026, 11:37 pm (39 मिनट पहले)· 0

सिंगापुर के निर्यात ने तोड़े 38 साल के रिकॉर्ड, क्या भारत भी अपना व्यापार इसी तरह चमका सकता है

सिंगापुर का सालाना निर्यात 46 फीसदी तक बढ़कर 38 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक सामानों की भारी मांग मुख्य वजह रही है। इस बीच, भारत के निर्यात आंकड़ों में भी मुक्त व्यापार समझौतों के बाद जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है।

वैश्विक बाजार में अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने की होड़ में सभी देश जुटे हैं, लेकिन हाल ही में सिंगापुर ने जो आर्थिक रफ्तार पकड़ी है, उसने वैश्विक विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। इस देश के कुल विदेशी शिपमेंट में पिछले एक साल के दौरान लगभग 46 फीसदी की अभूतपूर्व तेजी दर्ज की गई है, जो बीते 38 वर्षों का सबसे शानदार रिकॉर्ड है। इस ताबड़तोड़ ग्रोथ के पीछे मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक सामानों की बिक्री में आया 132 फीसदी का उछाल है, जबकि गैर-इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के क्षेत्र में भी 12 फीसदी की ठोस वृद्धि देखने को मिली है। दूसरी ओर, भारत की स्थिति का आकलन करें तो देश ने पिछले दो वर्षों में कई महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते किए हैं, और अब इन मुक्त व्यापार समझौतों के सकारात्मक परिणाम मैदानी स्तर पर दिखाई देने लगे हैं।

वाणिज्य मंत्रालय के नए आंकड़े

केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए ताजा आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि एफटीए लागू होने के बाद भारतीय निर्यात में तेज गति से उछाल आया है। विशेष तौर पर सिंगापुर को भेजे जाने वाले भारतीय सामानों में ढाई गुना तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा अमेरिका और चीन जैसे दुनिया के बड़े बाजारों में भी भारत का निर्यात काफी मजबूत हुआ है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि अगस्त के महीने में देश ने अपने प्रमुख व्यापारिक साझीदारों के साथ कारोबार का दायरा काफी ज्यादा फैला लिया है।

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प्रमुख देशों के साथ कारोबार का हाल

आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त के दौरान सिंगापुर के साथ भारत का निर्यात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 160.96 फीसदी बढ़कर 1.9 अरब डॉलर यानी 17 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा के स्तर को छू गया। इसी तरह, अमेरिकी बाजार में भी भारतीय उत्पादों की खेप लगभग 22 फीसदी के उछाल के साथ 8.4 अरब डॉलर पर पहुंच गई। चीन के मोर्चे पर भी तस्वीर काफी बेहतर रही है, जहां अगस्त महीने में कुल निर्यात में 52 फीसदी से अधिक की तेजी आई और यह आंकड़ा 1.9 अरब डॉलर दर्ज किया गया।

सिंगापुर ने कैसे हासिल की यह ग्रोथ

इस एशियाई देश ने अपनी निर्यात क्षमता को आसमान पर पहुंचाने के लिए मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक और उससे जुड़े साजो-सामान पर पूरा फोकस किया। दुनिया भर में एआई से जुड़े उपकरणों की बढ़ती मांग का फायदा उठाते हुए वहां के निर्माताओं ने अपने इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को कई गुना बढ़ा लिया। इस दौरान सिंगापुर ने चीन और अमेरिका को होने वाली सप्लाई में भारी इजाफा किया है। आंकड़े बताते हैं कि अगस्त महीने में अमेरिका को होने वाले निर्यात में 91 फीसदी, चीन को भेजने वाली खेप में 70 फीसदी और दक्षिण कोरिया को होने वाले निर्यात में 87 फीसदी की शानदार तेजी आई है। गौर करने वाली बात यह है कि इस देश के शीर्ष दस व्यापारिक साझीदारों में से नौ के साथ उसके निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई है।

चालू वित्त वर्ष में सिंगापुर को निर्यात

वाणिज्य मंत्रालय के विवरण के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से लेकर अगस्त तक की अवधि के दौरान सिंगापुर को भेजे जाने वाले निर्यात में 96.56 फीसदी का बड़ा उछाल आया है, जिसका सीधा अर्थ है कि यह कारोबार लगभग दोगुना हो चुका है। इन पांच महीनों के भीतर कुल निर्यात का यह आंकड़ा बढ़कर 9.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। केवल सिंगापुर ही नहीं, बल्कि अगस्त के महीने में जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, श्रीलंका और इटली जैसे देशों में भी भारत के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

द्विपक्षीय कारोबार और आयात का संतुलन

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा पहले साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान दोनों देशों के बीच कुल व्यापार का आकार 35.6 अरब डॉलर था। इसमें भारत की तरफ से 14.4 अरब डॉलर का निर्यात किया गया था, जबकि 21.2 अरब डॉलर का आयात दर्ज किया गया था। इस हिसाब से तब भारत का व्यापार घाटा करीब 7 अरब डॉलर के आसपास था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है और भारतीय निर्यात लगातार ऊपर जा रहा है। वर्तमान में भारत से सिंगापुर को पेट्रोलियम उत्पादों, दवाओं, रसायनों, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग से जुड़े सामानों की आपूर्ति की जाती है।

भारत और सिंगापुर का आपसी निवेश

दूसरी तरफ, भारत आज भी सिंगापुर से बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम, रिफाइंड ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मशीनरी, रसायन, सोना और अन्य औद्योगिक उत्पाद आयात करता है। कारोबारी संबंधों के अलावा वित्तीय मोर्चे पर भी यह देश भारत के लिए बहुत अहम है, क्योंकि सिंगापुर ने भारतीय अर्थव्यवस्था में कुल 14.94 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष निवेश किया हुआ है। साल 2000 से लेकर 2025 यानी करीब ढाई दशकों के लंबे अंतराल में इस देश ने भारत के भीतर कुल 175 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश किया है, जिससे वह भारत में सबसे बड़ा निवेशक देश भी बना हुआ है।

सवाल-जवाब

सिंगापुर के निर्यात में कितने फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है?
सिंगापुर का सालाना निर्यात करीब 46 फीसदी बढ़ गया है जो पिछले 38 साल में सबसे तेज ग्रोथ है।
सिंगापुर के निर्यात में किस सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही है?
सिंगापुर के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में लगभग 132 फीसदी का भारी उछाल आया है।
अगस्त महीने में सिंगापुर के लिए भारत का निर्यात कितना बढ़ा है?
अगस्त में सिंगापुर के साथ भारत का निर्यात पिछले साल के मुकाबले 160.96 फीसदी बढ़कर 1.9 अरब डॉलर पहुंच गया।
भारत का कुल द्विपक्षीय कारोबार सिंगापुर के साथ कितना था?
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान दोनों देशों का कुल कारोबार 35.6 अरब डॉलर दर्ज किया गया था।
सिंगापुर ने भारत में कुल कितना निवेश किया है?
सिंगापुर ने साल 2000 से 2025 के बीच भारत में कुल 175 अरब डॉलर का निवेश किया है।
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