अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाले बेहद संवेदनशील बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से भारत का एक तेल टैंकर पूरी तरह सुरक्षित निकल गया है। इस जलमार्ग को ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां इन दिनों समुद्री डकैतों और अन्य खतरों के कारण जहाजों की आवाजाही बेहद जोखिम भरी हो चुकी है।
ऊर्जा आपूर्ति के लिए क्यों अहम है बाब अल-मंदेब
होर्मुज स्ट्रेट के बाधित होने के बाद से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की धुरी बन गया है। इस रास्ते से दुनिया भर के देशों को तेल और गैस की सप्लाई होती है। भारत की बात करें तो देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए खाड़ी देशों के साथ-साथ रूस से आने वाली तेल की खेप भी इसी प्रमुख समुद्री मार्ग से होकर गुजरती है। ऐसे में इस मार्ग की सुरक्षा भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक रूप से बहुत मायने रखती है।
तुर्की के जहाजों को बनाया जा रहा निशाना
एक तरफ जहां भारतीय जहाजों ने इस खतरनाक रास्ते से बिना किसी रुकावट के अपनी यात्रा पूरी की है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात काफी अलग हैं। समुद्री डकैतों और सशस्त्र समूहों द्वारा तुर्की समेत कई अन्य देशों के जहाजों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। तुर्की के नौसैनिक जहाजों और व्यावसायिक पोतों को इस क्षेत्र में भारी जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है।
मध्यपूर्व में संघर्ष और सुरक्षा चिंताएं
इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के पीछे यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब तथा अन्य देशों के बीच चल रहा संघर्ष भी एक बड़ा कारण है। सऊदी अरब के विभिन्न शहरों पर यमन से होने वाले हमलों और लाल सागर के जलमार्गों पर सुलगती अशांति के कारण वैश्विक शिपिंग कंपनियां चिंतित हैं। इसके बावजूद भारतीय तेल टैंकर का इस हाई-रिस्क जोन से सुरक्षित निकलना देश की मजबूत भू-राजनीतिक स्थिति और सुरक्षित समुद्री प्रबंधन को दर्शाता है।



















