देशभर के बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी पुरानी और लंबित मांगों को मनवाने के लिए कड़ा कदम उठाया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने आगामी 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल पर जाने का स्पष्ट ऐलान किया है। यूनियनों का कहना है कि उनकी कई जायज मांगें लंबे समय से प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर अटकी पड़ी हैं, जिन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस हड़ताल के चलते बैंकिंग सेक्टर में बड़ा व्यवधान आने की पूरी संभावना जताई जा रही है, जिससे आम ग्राहकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
लगातार छुट्टियों के कारण बढ़ सकती है समस्या
बैंक कर्मचारियों का यह संयुक्त संगठन कुल नौ अलग-अलग यूनियनों को मिलाकर बना है। इन यूनियनों ने सरकार और बैंक प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि वे उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं। चूंकि 11 सितंबर को शुक्रवार का दिन है, इसलिए इस हड़ताल के तुरंत बाद शनिवार और रविवार की साप्ताहिक छुट्टियां आ जाएंगी। इसके अलावा कुछ चुनिंदा राज्यों में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का अवकाश भी रहेगा। इन सभी छुट्टियों और हड़ताल के आपस में मिलने से कई क्षेत्रों में बैंक लगातार कई दिनों तक पूरी तरह बंद रह सकते हैं, जिससे वित्तीय कामकाज पर गहरा असर पड़ेगा।
सप्ताह में पांच दिन काम की मांग सबसे अहम
बैंक यूनियनों की सबसे प्रमुख और पुरानी मांग सप्ताह में केवल पांच दिन ही बैंक खोलने की है। इसके तहत सोमवार से शुक्रवार तक कामकाज और शनिवार-रविवार को पूर्ण अवकाश रखे जाने की बात कही जा रही है। यूनियनों का यह भी तर्क है कि पिछले साल 8 मार्च 2024 को संपन्न हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते और 9वें संयुक्त नोट के दौरान इस पांच दिवसीय कार्य प्रणाली पर आपसी सहमति बन चुकी थी। इस व्यवस्था के अंतर्गत सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन काम के घंटों में 40 मिनट की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। हालांकि, इस प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी के लिए भेजे जाने के बावजूद पिछले दो साल से ज्यादा वक्त से फाइल अटकी हुई है और इसे अब तक हरी झंडी नहीं मिली है।
पीएलआई योजना के नियमों पर भी असंतोष
कर्मचारी और अधिकारी संगठन सरकार द्वारा लागू की गई परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के मौजूदा प्रावधानों से भी खासे नाराज हैं। उनका कहना है कि इस नई व्यवस्था के तहत बैंक अधिकारियों के विभिन्न वर्गों के बीच इंसेंटिव के मामलों में बहुत बड़ा अंतर रखा गया है। यूनियनों के आंकड़ों के अनुसार, स्केल IV और उससे ऊपर के उच्च अधिकारियों को व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 365 दिनों के मूल वेतन के बराबर पीएलआई मिल सकती है, जबकि सामान्य कर्मचारियों और स्केल-3 तक के अधिकारियों के लिए यह सीमा महज 15 दिनों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते तक ही सीमित है। इसी असमानता को लेकर कर्मचारियों में गहरा रोष व्याप्त है।
पेंशन सुधार और पुरानी पेंशन योजना की बहाली
इन तमाम मुद्दों के अलावा बैंक यूनियनों ने पेंशन प्रणाली में सुधार करने, उसका अपडेशन करने तथा सभी पेंशनभोगियों के लिए एक समान महंगाई भत्ता फॉर्मूला लागू करने की पुरजोर मांग उठाई है। इसके साथ ही, नई पेंशन योजना (NPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का विकल्प चुनने की सुविधा दिए जाने की भी मांग की जा रही है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि सरकार और बैंक प्रबंधन ने उनकी इन मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया, तो 28 सितंबर से तीन दिन की और बड़ी देशव्यापी हड़ताल की जाएगी। इसके बाद भी बात न बनने पर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का भी कड़ा रुख अपनाया जा सकता है, जिससे बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।
इस बीच, ग्राहकों की सुविधा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा समय-समय पर नए दिशा-निर्देश और डिपॉजिट नियम भी जारी किए जाते हैं, जिन पर बैंक ग्राहकों को पैनी नजर रखनी चाहिए ताकि वित्तीय योजनाओं में किसी प्रकार की असुविधा न हो।



















