बैंकों और कर्जदारों की साठगांठ पर Supreme Court सख्त, कहा टैक्सपेयर्स का पैसा ऐसे डूबने नहीं दे सकतेव्यापार
2 घंटे पहले· 3

बैंकों और कर्जदारों की साठगांठ पर Supreme Court सख्त, कहा टैक्सपेयर्स का पैसा ऐसे डूबने नहीं दे सकते

Supreme Court ने बैंकों, ARCs और कर्जदारों के बीच कथित मिलीभगत पर चिंता जताई है, जिसके कारण सरकारी बैंकों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सरकारी पैसे के नुकसान पर Supreme Court की चिंता

क्या आपको कभी यह लग सकता है कि कर्ज देने वाले बैंक ही अपना पैसा वापस पाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं? देश की सबसे बड़ी अदालत, यानी Supreme Court, ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कुछ ऐसी ही गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने बैंकों, Asset Reconstruction Companies (ARCs) और कर्जदारों के बीच होने वाली संदिग्ध साठगांठ पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

Chief Justice Surya Kant और Justice V Mohan की पीठ ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आम जनता और टैक्सपेयर्स के पैसे को कर्ज के तौर पर बांटकर उसकी वसूली के लिए गंभीर प्रयास न करना बेहद चिंताजनक है। अदालत ने साफ किया कि वह सार्वजनिक धन के इस तरह के दुरुपयोग को लेकर चिंतित है, क्योंकि इस पैसे का उपयोग लोगों के कल्याणकारी कार्यों में होना चाहिए था। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार, Reserve Bank of India (RBI) और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर इस पर जवाब मांगा है।

करोड़ों का कर्ज कौड़ियों के भाव निपटाया

इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकारी बैंकों का कुल 1,537 crore रुपये का कर्ज दो ARCs के माध्यम से केवल 73.50 crore रुपये में सेटल कर दिया गया। यह राशि कुल कर्ज का केवल 4.5% ही है, जिसका मतलब है कि बैंकों ने 95% से अधिक की रकम को छोड़ दिया। कर्ज वसूली के नाम पर इतने बड़े पैमाने पर 'हेयरकट' (छूट) दिए जाने के कारण बैंकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए Supreme Court की पीठ ने कर्ज के निपटारे के इस तरीके पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने कहा कि यह मामला कर्जदारों, ARCs और बैंकों के बीच एक गहरी साठगांठ की तरफ इशारा करता है। हालांकि अदालत ने स्वीकार किया कि बैंकों के व्यावसायिक फैसलों में न्यायपालिका के हस्तक्षेप की एक सीमा होती है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यावसायिक सूझबूझ का मतलब यह नहीं हो सकता कि आप करदाताओं के पैसे को लापरवाही से कर्ज के रूप में बांट दें और फिर उसे वापस पाने की कोशिश ही न करें।

गहरे घोटाले की जांच की मांग

याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश हुए वकील Ashwini Kumar Upadhyay ने दलील दी कि बड़े-बड़े कर्ज भारी छूट पर ट्रांसफर किए जा रहे हैं, जिससे सरकारी खजाने को सीधा नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यह सिर्फ एक अकेला मामला नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़े संकट का छोटा सा हिस्सा है। Supreme Court ने भी माना कि इन Asset Reconstruction Companies के कामकाज के तरीकों की जांच होना जरूरी है और इस मामले की अगली सुनवाई के लिए चार सप्ताह बाद की तारीख तय की गई है।

दाखिल याचिका में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, ARCs और Noida की एक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के बीच हुए कथित बैंकिंग घोटाले की जांच की मांग की गई है। इस कंपनी ने साल 2012 से 2015 के बीच State Bank of India (SBI) के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह से लगभग 912 crore रुपये का लोन लिया था। बाद में इस कर्ज का 10% हिस्सा भी बैंकों को वापस नहीं मिला।

सवाल-जवाब

Supreme Court ने बैंकों और ARCs को लेकर क्या चिंता जताई है?
कोर्ट ने बैंकों, Asset Reconstruction Companies (ARCs) और कर्जदारों के बीच गहरे स्तर की साठगांठ पर चिंता जताई है, जिसके कारण सरकारी पैसे का नुकसान हो रहा है।
याचिका में किस कथित बड़े समझौते का उल्लेख किया गया है?
याचिका में आरोप है कि सरकारी बैंकों का 1,537 crore रुपये का कर्ज दो ARCs के जरिए केवल 73.50 crore रुपये (लगभग 4.5 प्रतिशत) में ही निपटा दिया गया।
Noida की इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी से जुड़ा क्या मामला है?
इस कंपनी ने 2012 से 2015 के बीच SBI के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह से करीब 912 crore रुपये का कर्ज लिया था, लेकिन इसका 10 प्रतिशत भी वापस नहीं चुकाया।
Supreme Court ने इस मामले में आगे क्या कदम उठाया है?
कोर्ट ने केंद्र सरकार, RBI और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की है।
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