उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में रेशम की खेती अब किसानों की कमाई का नया जरिया बनती जा रही है। केंद्रीय रेशम बोर्ड, भारत सरकार ने जिले में 'मेरा रेशम, मेरा अभिमान' नाम से एक खास मुहिम शुरू की है, जिसका मकसद किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक तरीकों से रेशम कीट पालन सिखाकर उनकी आमदनी बढ़ाना है। इस मुहिम के जरिए रेशम और कोकून उत्पादन में इजाफा करने की कोशिश हो रही है।
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा
इस अभियान के तहत किसानों को रेशम कीट पालन की नई और आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे पहले से बेहतर क्वालिटी के कोकून तैयार कर सकें। खास बात यह है कि किसान अपनी सामान्य खेती के साथ-साथ रेशम कीट पालन का काम भी कर सकते हैं, यानी उन्हें अलग से समय निकालने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा यह पूरी ट्रेनिंग किसानों को बिल्कुल मुफ्त में दी जा रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर किसान भी इससे जुड़ सकें।
महिलाओं को मिलेगी नई पहचान
अभियान में महिलाओं के नेतृत्व वाले रेशम उत्पादन उद्यमों को बढ़ावा देने पर खास जोर दिया जा रहा है। इसका मकसद गांवों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है, ताकि वे घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ रेशम उत्पादन से भी कमाई कर सकें। इसी सोच के साथ जिले में महिलाओं को लगातार रेशम कीट पालन के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
बीमारियों से बचाव की भी ट्रेनिंग
सिर्फ उत्पादन बढ़ाना ही मकसद नहीं है, किसानों को रेशम कीटों में लगने वाली बीमारियों की पहचान और उनके नियंत्रण के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं। इसके साथ ही स्वच्छ पालन-पोषण की तकनीक और कीटों के बेहतर रखरखाव की जानकारी भी दी जा रही है, जिससे नुकसान कम हो और किसानों को ज्यादा मुनाफा मिल सके।
3800 किसान जुड़े, जिला बना राज्य में पांचवें नंबर पर
खीरी जिले में फिलहाल 3800 किसान रेशम कीट उत्पादन के काम से जुड़े हुए हैं। इसी वजह से खीरी जिला अब उत्तर प्रदेश में रेशम उत्पादन के मामले में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। जिले में लगातार नए किसानों को इस काम से जोड़ने की कोशिश हो रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग रेशम कीट उत्पादन शुरू करें और अच्छी कमाई कर सकें। रेशम की बाजार में मांग होने के चलते किसानों को इसे बेचने में भी कोई परेशानी नहीं होती।
उप निदेशक ने बताई अभियान की पूरी योजना
उप निदेशक अरविंद कुमार ने बताया कि खीरी जिले में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ही 'मेरा रेशम, मेरा अभिमान' अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत किसानों को न सिर्फ ट्रेनिंग दी जा रही है, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों से भी जोड़ा जा रहा है, ताकि रेशम और कोकून का उत्पादन बढ़े और किसानों की आय में इजाफा हो। यह ट्रेनिंग सैदापुर देवकली राजकीय रेशम फॉर्म पर दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से उन्हें रेशम उत्पादन के प्रति खासतौर पर जागरूक किया जा रहा है, जिससे वे घर के काम के साथ-साथ अच्छी कमाई भी कर सकें।
कितने में बिकता है रेशम
उप निदेशक रेशम ने कीमतों की जानकारी देते हुए बताया कि अच्छी क्वालिटी का रेशम बाजार में करीब ₹400 प्रति किलो के भाव से बिकता है। वहीं मध्यम क्वालिटी के रेशम कोकून की कीमत ₹200 से ₹250 प्रति किलो के बीच रहती है। उनके मुताबिक बिक्री में किसानों को किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता, यही वजह है कि खीरी जिले में रेशम उत्पादन का काम लगातार बढ़ता जा रहा है।



















