आज के दौर में बड़ी संख्या में युवा नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय स्वरोजगार और नए व्यावसायिक अवसरों को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। किसी भी व्यापार का बुनियादी नियम यही माना जाता है कि उसमें शुरुआती पूंजी न्यूनतम हो और कमाई की गुंजाइश अधिक से अधिक बने। हालांकि बाजार में रणनीति की कमी और जल्दबाजी के कारण कई स्टार्टअप शुरू होते ही बंद हो जाते हैं। ऐसे माहौल में यदि आप किसी ऐसे व्यावसायिक विचार की खोज कर रहे हैं जिसकी मांग साल के बारह महीने बनी रहे और जिसमें आर्थिक नुकसान की आशंका बहुत कम हो, तो पौधों की नर्सरी का काम एक बेहद आकर्षक विकल्प बनकर उभरता है। भागलपुर जिले में नर्सरी के इस कारोबार से जुड़कर लोग बेहद कम लागत में हर महीने शानदार मुनाफा कमा रहे हैं। इस पूरे मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक नया पौधा या कलम तैयार करने में महज 2 से 3 रुपये की मामूली रकम खर्च होती है, जबकि बाजार में वही पौधा 10 रुपये से लेकर 100 रुपये तक की कीमत पर आसानी से बिक जाता है।
स्वयं कलम तैयार करने से बढ़ता है मुनाफा
नर्सरी के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय स्थानीय विशेषज्ञ अशोक चौधरी के अनुसार, इस बिजनेस में बड़ी सफलता हासिल करने का सबसे महत्वपूर्ण मंत्र अपना खुद का उत्पाद तैयार करना है। यदि कोई व्यवसायी बाहरी मंडियों या दूसरी जगहों से तैयार पौधे खरीदकर उन्हें बेचने का प्रयास करता है, तो उसका लाभ सीमित रह जाता है। इसके विपरीत, यदि आप स्वयं ग्राफ्टिंग यानी कलम बांधने की तकनीक का उपयोग करके पौधे तैयार करते हैं, तो आपकी उत्पादन लागत न के बराबर रह जाती है। अशोक चौधरी बताते हैं कि एक साधारण कलम या पौधा तैयार करने का खर्च 2 से 3 रुपये के बीच आता है। यदि आप शुरुआती चरण में इस पौधे को बाजार में केवल 10 रुपये की न्यूनतम दर पर भी बेचते हैं, तो भी प्रति पौधा सीधे 7 से 8 रुपये का शुद्ध मुनाफा प्राप्त होता है।
व्यापार के गणित को समझें तो यदि कोई व्यक्ति रोजाना मात्र 100 पौधे बेचने में भी सफल हो जाता है, तो उसकी दैनिक बचत काफी अच्छी हो जाती है। इसके अतिरिक्त, इस कारोबार में समय के साथ पौधों का मूल्य भी तेजी से बढ़ता है। जब वही छोटा पौधा सही देखरेख और पोषण के साथ बढ़कर दो से ढाई फीट की ऊंचाई प्राप्त कर लेता है, तो बाजार में उसकी मांग और कीमत दोनों में उछाल आ जाता है। दो से ढाई फीट का यही पौधा ग्राहकों को 75 रुपये से लेकर 100 रुपये तक में बेचा जाता है, जिससे मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है।
नर्सरी के तीन मुख्य प्रकार और जोखिम का गणित
नर्सरी व्यवसाय की संरचना को स्पष्ट करते हुए अशोक चौधरी ने जानकारी दी कि बाजार में मुख्य रूप से तीन अलग-अलग श्रेणियों की नर्सरी लगाई जाती हैं। पहली श्रेणी फूलों और बागवानी से संबंधित नर्सरी की है, जिसके अंतर्गत रंग-बिरंगे फूलों के साथ-साथ कई तरह के सजावटी पौधे शामिल किए जाते हैं। दूसरी श्रेणी फलदार पौधों की नर्सरी होती है, जिसमें आम, अमरूद और नींबू जैसे सदाबहार और लोकप्रिय फलों के पौधे तैयार किए जाते हैं। तीसरी श्रेणी मौसमी सब्जियों और फलों की नर्सरी की है, जिसमें मिर्च, पपीता तथा अन्य मौसमी फसलों की पौध तैयार की जाती है।
इन तीनों श्रेणियों में जोखिम का स्तर बिल्कुल अलग-अलग होता है। अशोक चौधरी के मुताबिक, मौसमी सब्जियों तथा पपीते की नर्सरी में नुकसान की संभावना थोड़ी अधिक बनी रहती है। इसका मुख्य कारण यह है कि यदि मौसमी पौधे सही समय पर नहीं बिक पाते हैं, तो वे खेत या गमले में ही खराब हो जाते हैं। इसके उलट, फलदार और सजावटी पौधों की नर्सरी में आर्थिक नुकसान का जोखिम न के बराबर माना जाता है। यदि फल और फूलों के पौधे निर्धारित समय के भीतर नहीं भी बिक पाते, तो वे समय के साथ बड़े और मजबूत होते जाते हैं, जिससे भविष्य में उनकी बिक्री दर और अधिक ऊंची हो जाती है। यदि सही तकनीक, निरंतर देखरेख और योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाए, तो यह बिजनेस कम समय में किसी भी व्यक्ति को लखपति बना सकता है।



















