उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के अंतर्गत आने वाले विकासखंड रुपईडीह के एक युवक ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर लगन सच्ची हो, तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है। आईटीआई की पढ़ाई पूरी करने के बाद भी जब मनमुताबिक रोजगार नहीं मिला, तो उन्होंने पारंपरिक व्यवस्था के आगे घुटने टेकने के बजाय खेती को ही अपनी आजीविका का मुख्य जरिया बना लिया। आज वह भिंडी की बंपर पैदावार लेकर हर साल अच्छी खासी रकम कमा रहे हैं और अपने इलाके के अन्य किसानों के लिए एक मजबूत मिसाल पेश कर रहे हैं।
युवा किसान की जुबानी, संघर्ष से सफलता तक का सफर
प्रगतिशील किसान संजय मौर्य ने साझा किया कि रोजगार की तलाश में उन्होंने काफी वक्त गंवाया, लेकिन हाथ निराशा ही लगी। आखिरकार परिवारजनों के सुझाव पर उन्होंने आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए बागवानी और सब्जियों की खेती में उतरने का मानस बनाया। शुरुआत में छोटे भूभाग पर हाथ आजमाया गया, लेकिन जब उपज शानदार रही और बाजार में भाव भी अच्छे मिले, तो खेती के दायरे को साल-दर-साल बढ़ाया गया।
तकनीक और सूझबूझ से खेती को बनाया आसान
आईटीआई डिप्लोमा धारक संजय मौर्य ने बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद जब नौकरी के रास्ते बंद दिखे, तो उन्होंने किसानी की तरफ कदम बढ़ाए। वर्तमान में वह करीब एक से डेढ़ बीघा जमीन पर भिंडी की फसल ले रहे हैं। उन्हें यह विचार यूट्यूब वीडियोज देखने और आसपास के तजुर्बेकार किसानों से चर्चा करने के बाद सूझा। पहले वे पारंपरिक तौर-तरीकों से खेती करते थे, लेकिन अब उन्होंने बेड विधि को अपना लिया है। इस उन्नत तकनीक से सिंचाई करने और फसल की निराई-गुड़ाई करने में बहुत आसानी होती है, क्योंकि क्यारियों के बीच में पर्याप्त खाली जगह छोड़ी जाती है।
लागत कम, मुनाफा बंपर और बलरामपुर मंडी में सप्लाई
संजय मौर्य के अनुसार, एक से डेढ़ बीघा के रकबे में लगभग आठ से दस हजार रुपये की कुल लागत आती है। इसके बदले में उन्हें वर्तमान समय में साठ से सत्तर हजार रुपये तक की शुद्ध आमदनी हो रही है, हालांकि यह मुनाफा बाजार के उतार-चढ़ाव और तय होने वाले भावों के मुताबिक कम या ज्यादा भी हो सकता है। वे अपनी उगाई गई सब्जियों की बिक्री के लिए उपज को नजदीकी बलरामपुर सब्जी मंडी में सप्लाई करते हैं। भविष्य में इस खेती के दायरे को और अधिक विस्तार देने की उनकी पूरी योजना है, क्योंकि इस क्षेत्र से उन्हें एक मजबूत और संतोषजनक आर्थिक सहारा मिल रहा है।



















