भारत में रेल यात्रा के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। 17 जुलाई से हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन शुरू होने वाला है। इस महत्वपूर्ण परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा। फिलहाल, इस ट्रेन को एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जा रहा है। यदि यह परीक्षण सफल रहता है और अपेक्षित परिणाम प्राप्त होते हैं, तो आने वाले समय में इसे देश के अन्य रेल मार्गों पर भी विस्तारित करने की योजना पर काम किया जाएगा।
तकनीकी कार्यप्रणाली और पर्यावरण पर प्रभाव
यह ट्रेन पारंपरिक डीजल या बिजली के इंजनों से बिल्कुल अलग है। इसमें 1,200 किलोवाट क्षमता वाला हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम लगाया गया है। ट्रेन का संचालन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रिया से उत्पन्न बिजली के माध्यम से होता है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें निकास के रूप में हानिकारक धुएं के बजाय केवल जलवाष्प उत्पन्न होती है। यह तकनीक रेलवे को एक स्वच्छ और हरित परिवहन नेटवर्क बनाने में बड़ी मदद करेगी, जिससे प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय कमी आएगी।
रूट, क्षमता और परिचालन विवरण
यह हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच स्थित 89 किलोमीटर लंबे रेल सेक्शन पर दौड़ती हुई दिखाई देगी। परिचालन की बात करें तो यह ट्रेन प्रतिदिन दो फेरे लगाएगी और कुल 356 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। यात्री क्षमता के दृष्टिकोण से, ट्रेन में 682 यात्रियों के एक साथ बैठने की व्यवस्था मौजूद है, जबकि इसकी कुल क्षमता लगभग 2,600 यात्रियों को लाने-ले जाने की है। रेलवे ने इस रूट को विशेष रूप से नई तकनीक के परीक्षण और उसके प्रदर्शन के मूल्यांकन के लिए चुना है।
निवेश और आधारभूत संरचना
रेलवे ने इस महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट के लिए 111.83 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इस प्रोजेक्ट के तहत मौजूदा डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) को आधुनिक हाइड्रोजन ट्रेन के रूप में परिवर्तित किया गया है। ट्रेन के सफल संचालन के लिए न केवल इंजन में बदलाव किए गए हैं, बल्कि हाइड्रोजन उत्पादन, गैस भंडारण, रीफ्यूलिंग स्टेशन और सुरक्षा उपकरणों जैसी आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का भी विकास किया गया है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
हाइड्रोजन एक अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, जिसके कारण यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने विशेष ध्यान दिया है। ट्रेन में अत्याधुनिक सुरक्षा सेंसर लगाए गए हैं जो किसी भी संभावित हाइड्रोजन रिसाव का तुरंत पता लगा लेंगे। इसके अलावा, आग की निगरानी प्रणाली और निरंतर सुरक्षा मॉनिटरिंग के इंतजाम भी किए गए हैं। इसमें इस्तेमाल किए गए विशेष स्टोरेज टैंक अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किए गए हैं, और किसी भी आपात स्थिति या असामान्य घटना के दौरान सिस्टम स्वतः सुरक्षा प्रक्रियाओं को सक्रिय कर देगा।











