नई दिल्ली। सरकार ने हाल ही में पेट्रोल में एथनॉल मिलाने के अपने ईबीपी कार्यक्रम के फायदों को विस्तार से साझा किया है। खाद्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव के अनुसार, यह योजना न केवल भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दे रही है, बल्कि देश के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है। इस नीति के जरिए वित्तवर्ष 2014-15 से अब तक देश ने 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत करने में सफलता हासिल की है।
कच्चे तेल पर निर्भरता में कमी
अश्विनी श्रीवास्तव ने बताया कि एथनॉल अब देश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। इस कार्यक्रम के कारण हमें कच्चे तेल के आयात पर अपनी निर्भरता कम करने में बड़ी मदद मिली है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तवर्ष 2014-15 से 2026 के बीच एथनॉल की आपूर्ति से 31 करोड़ टन से अधिक कच्चे तेल की आवश्यकता कम हुई है, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव हमारे विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा है। इसके अलावा, इस पहल से पर्यावरण को भी बड़ा लाभ मिला है, क्योंकि इस अवधि में लगभग 93 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम दर्ज किया गया है।
चीनी उद्योग और किसानों के लिए वरदान
एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम ने गन्ना किसानों की स्थिति में व्यापक सुधार किया है। अश्विनी श्रीवास्तव ने रेखांकित किया कि अब गन्ना किसानों को भुगतान का इंतजार नहीं करना पड़ता, और बकाया राशि अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। चीनी उद्योग की वित्तीय स्थिति भी पहले से काफी सुदृढ़ हुई है। उल्लेखनीय है कि वित्तवर्ष 2014-15 से 2020-21 के दौरान केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 14,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की थी, लेकिन 2021-22 के बाद से स्थिति बदल गई है। अब अतिरिक्त चीनी का उपयोग एथनॉल बनाने में हो रहा है, जिससे निर्यात सब्सिडी की आवश्यकता पूरी तरह खत्म हो गई है।
मक्का और चावल की नई भूमिका
एथनॉल उत्पादन में मक्का एक प्रमुख कच्चा माल बनकर उभरा है। वित्तवर्ष 2024-25 में तेल मार्केटिंग कंपनियों को हुई एथनॉल आपूर्ति में मक्का की हिस्सेदारी 47 फीसदी रही, और वर्तमान आपूर्ति वर्ष में यह 36 फीसदी का योगदान दे रहा है, जिससे मक्का उगाने वाले किसानों को उनकी फसल का बेहतर दाम मिल रहा है। इसके अतिरिक्त, देश की कुल एथनॉल उत्पादन क्षमता 2013-14 में मात्र 21 करोड़ लीटर हुआ करती थी, जो अब बढ़कर लगभग 2,000 करोड़ लीटर के स्तर पर पहुंच गई है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत चावल में टूटे हुए दानों की सीमा को 25 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी किए जाने का निर्णय भी महत्वपूर्ण है। इससे उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाला चावल मिलेगा और अतिरिक्त टूटे हुए चावल का उपयोग एथनॉल के औद्योगिक उत्पादन में किया जा सकेगा।
तकनीकी शोध पर आधारित नीति
जीईएमए के अध्यक्ष सीके जैन ने स्पष्ट किया कि एथनॉल मिश्रण का निर्णय कोई जल्दबाजी में लिया गया कदम नहीं है। ई20 मिश्रण को अपनाने से पहले 2014 से 2018 के बीच पूरे चार साल तक गहन शोध और व्यापक अध्ययन किए गए हैं। इस दौरान वाहनों को लंबी दूरी तक चलाकर इनका परीक्षण किया गया और पाया गया कि ई20 ईंधन सभी तरह के इंजनों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। सीके जैन ने वाहनों के खराब होने संबंधी दावों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले पर होने वाली चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, न कि किसी तरह की भ्रांतियों पर।











