देश की ताकत आज रक्षा मोर्चे से लेकर आर्थिकी के हर स्तर पर लगातार ऊंचाइयों को छूती नजर आ रही है। एक तरफ जहां अमेरिकी सेना भारत के साथ मिलकर साझा सैन्य अभ्यास कर रही है, वहीं दूसरी तरफ चीन भी देश की बढ़ती ताकत और रणनीतिक स्थिति को नजरअंदाज नहीं कर पा रहा है। इस बढ़ती ताकत के पीछे सबसे बड़ा आधार देश की तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जहां अप्रैल से जून तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.8 फीसदी दर्ज की गई है। इसके अलावा फिच, एसएंडपी, ओईसीडी, एडीबी और मूडीज जैसी तमाम बड़ी वैश्विक एजेंसियों ने भारत के विकास अनुमानों में सकारात्मक सुधार किया है। रक्षा क्षेत्र में भी देश पूरी तरह आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसका ताजा उदाहरण पोखरण में लंबी दूरी के केएएल ड्रोन का सफल फ्लाइट परीक्षण है। साथ ही भारतीय वायुसेना के लिए 160 स्वदेशी सैट-साव स्मार्ट बमों की खरीद की जा रही है, जो बंकरों, रनवे और रडार जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखते हैं।
अर्थव्यवस्था की रफ्तार और राजनीतिक सवाल
विकास की इन बयार के बीच यह बहस भी लगातार जारी है कि क्या यह तरक्की केवल कागजों तक सीमित है या इसका वास्तविक असर जमीन पर भी दिख रहा है। देश के सामने एक तरफ अप्रैल से जून तिमाही के आर्थिक आंकड़े हैं, तो दूसरी तरफ औली में चल रहे सैन्य अभ्यास और साणंद में तैयार हो रही चिप की तस्वीरें हैं। जब वैश्विक मंचों पर भारत की 7.8 फीसदी की जीडीपी ग्रोथ की चर्चा हुई, तो विपक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि इससे आम आदमी के जीवन में क्या बदलाव आया, क्या लोगों की आय बढ़ी और क्या युवाओं को पर्याप्त नौकरियां मिलीं। हालांकि, आंकड़े गवाही देते हैं कि तमाम वैश्विक अस्थिरताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद देश के कारखानों में उत्पादन की रफ्तार तेज रही और नई मशीनों की स्थापना का सिलसिला जारी रहा।
वैश्विक एजेंसियों का भरोसा और जीडीपी के आंकड़े
चालू वित्त वर्ष की पहली यानी अप्रैल से जून तिमाही में देश की वास्तविक जीडीपी में 7.8 फीसदी की जोरदार बढ़ोत्तरी दर्ज की गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 6.9 फीसदी पर था। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस तिमाही के लिए लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान जताया था, जिसे पीछे छोड़ते हुए वास्तविक आंकड़े उम्मीदों से कहीं बेहतर निकले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया इस समय अनिश्चितता और टकराव के दौर से गुजर रही है, ऐसे में भारत का 7.8 फीसदी की दर से आगे बढ़ना पूरी दुनिया को एक मजबूत और नया भरोसा देता है। फिच, एसएंडपी, ओईसीडी, एडीबी और मूडीज जैसी साख निर्धारण करने वाली प्रतिष्ठित एजेंसियों ने भी देश की विकास गाथा को मजबूत करार दिया है और कई मंचों पर अपने अनुमानों को ऊपर संशोधित किया है।
औली में भारत और अमेरिका का साझा सैन्य अभ्यास
आर्थिक मोर्चे के साथ-साथ देश रक्षा क्षेत्र में भी भविष्य की बड़ी रणनीतिक तैयारियों को अंजाम दे रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और नीतियों के बावजूद अमेरिकी सैनिक भारत की धरती पर पहुंचकर भारतीय जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्धाभ्यास कर रहे हैं। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ों के बीच औली में दोनों देशों की सेनाओं का यह संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है, जो इस द्विपक्षीय सैन्य मेलजोल की 22वीं कड़ी है। पिछले करीब दो सप्ताह से चल रहे इस अभ्यास के दौरान पर्वतीय युद्ध कौशल, कड़ाके की ठंड में संचालन, कमांड पोस्ट के संचालन और ड्रोन खतरों से निपटने का कड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हिमालय की इन ऊंचाइयों पर दो बड़ी सेनाओं का एक साथ अभ्यास करना केवल सैन्य तैयारी नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा कूटनीतिक संदेश भी है जो दुनिया को भारत के सामर्थ्य से परिचित कराता है।
स्वदेशी केएएल ड्रोन का सफल परीक्षण
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए देश ने अपने पहले स्वदेशी लंबी दूरी के हमलावर ड्रोन केएएल का सफल परीक्षण राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में पूरा कर लिया है। इस परीक्षण के दौरान ड्रोन के मुख्य ढांचे, अत्याधुनिक इंजन, एवियॉनिक्स और मिशन सिस्टम की एक साथ गहन जांच की गई। रूस-यूक्रेन संघर्ष और अन्य वैश्विक संघर्षों के दौरान जिस तरह से किफायती ड्रोन ने अपनी युद्धक क्षमता का लोहा मनवाया है, उसी कड़ी में भारत ने भी अपना यह मारक ड्रोन तैयार कर लिया है। इस अत्याधुनिक ड्रोन को उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित रक्षा तकनीक से जुड़ी कंपनी आईजी डिफेंस द्वारा विकसित किया गया है, जो देश की घरेलू रक्षा निर्माण क्षमता को एक नई ऊंचाई देता है।
ड्रोन की तकनीकी क्षमता और भविष्य की योजनाएं
इस स्वदेशी केएएल ड्रोन की मारक क्षमता बेहद व्यापक है, जिसकी रेंज एक हजार किलोमीटर तक है और यह हवा में लगातार सात से आठ घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम है। यह ड्रोन अपने साथ पचास किलोग्राम तक का उच्च विस्फोटक वारहेड ले जा सकता है और दो सौ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सीधे अपने लक्ष्य पर हमला बोल सकता है। समुद्र तल से पांच हजार मीटर की ऊंचाई पर भी इसका सफलतापूर्वक संचालन किया जा सकता है और यह ऑटोनॉमस उड़ान के लिए मल्टी-बैंड जीएनएसएस व इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम से पूरी तरह लैस है। यह ड्रोन दुश्मन की सीमा में गहरे उतरकर उनके रडार, एयर डिफेंस सिस्टम और सामरिक ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर सकता है और अपना मिशन पूरा करने के बाद खुद को नष्ट कर लेता है ताकि इसकी गोपनीय तकनीक विरोधियों के हाथ न लग सके। भारत सरकार दो अरब डॉलर यानी लगभग बीस हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सैन्य ड्रोन की बड़ी खरीद की योजना पर काम कर रही है, और देश में इस समय छह सौ से अधिक कंपनियां इस सेक्टर में सक्रिय हैं जिनमें से सौ से ज्यादा सिर्फ रक्षा ड्रोन पर केंद्रित हैं।
















