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एक महिला के संकल्प से खड़ी हुई बलरामपुर चीनी मिल, आज 14000 करोड़ के कारोबार पर पहुंचा साम्राज्यव्यापार
27 सित॰ 2026, 11:40 pm (43 मिनट पहले)· 0

एक महिला के संकल्प से खड़ी हुई बलरामपुर चीनी मिल, आज 14000 करोड़ के कारोबार पर पहुंचा साम्राज्य

बेल्जियम से 300 पहियों पर भारी-भरकम वेसेल्स आने के बाद सुर्खियों में आई बलरामपुर चीनी मिल कभी एक छोटी सी इकाई थी। इस मुकाम तक पहुंचाने में एक महिला का अहम योगदान रहा है, और आज यह देश की दूसरी सबसे बड़ी चीनी मिल बन चुकी है।

इन दिनों देश के मीडिया गलियारों से लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक एक खास खबर की काफी चर्चा हो रही है। बेल्जियम से 300 पहियों पर लदकर एक भारी-भरकम वेसेल्स भारत पहुंचा है, जिसे उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध चीनी मिल के लिए मंगाया गया है। आज से इक्यावन साल पहले यह मिल महज एक छोटी सी यूनिट के रूप में अस्तित्व में आई थी और समय के साथ इसका दायरा इतना फैला कि इसका कारोबार अब लगभग चौदह हजार करोड़ रुपये के आंकड़े को छू चुका है। वर्तमान में बलरामपुर चीनी मिल को देश की दूसरी सबसे बड़ी चीनी मिल के रूप में मान्यता प्राप्त है, लेकिन इसके इस शानदार सफर के पीछे एक दूरदर्शी महिला की कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता जुड़ी हुई है।

शुरुआत से लेकर परिवार की बागडोर तक

बलरामपुर चीनी मिल लिमिटेड भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड एक प्रमुख कंपनी है। इस मिल की स्थापना चौदह जुलाई, 1975 को की गई थी। इस व्यावसायिक उपक्रम को स्थापित करने और इसके विस्तार में केएन सारोगी की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है। केएन सारोगी कंपनी के मौजूदा चेयरमैन और प्रबंध निदेशक विवेक सारोगी के पिता थे। वर्तमान समय में इस कंपनी की पूरी कमान विवेक सारोगी के हाथों में है, जबकि उनकी पत्नी सुमेधा सारोगी भी कंपनी में अच्छी खासी हिस्सेदारी रखती हैं। इसके अलावा विवेक की बेटी अवंतिका सारोगी इस प्रतिष्ठित कंपनी में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। सारोगी परिवार का पारिवारिक ट्रस्ट प्रमोटर के तौर पर इस कंपनी में एक बहुत बड़ी हिस्सेदारी का मालिक है।

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मीनाक्षी सारोगी का ऐतिहासिक योगदान

बलरामपुर चीनी मिल को फर्श से अर्श तक और सफलता की बुलंदियों तक पहुंचाने का मुख्य श्रेय विवेक सारोगी की माता मीनाक्षी सारोगी को जाता है। उन्होंने गन्ने की खरीद से लेकर किसानों को समय पर भुगतान करने और उत्पादन से लेकर सप्लाई चेन तक हर गतिविधि पर बेहद कड़ाई से नियंत्रण रखा। उनके कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में कंपनी का दायरा एक यूनिट से बढ़कर सीधे दस यूनिट्स तक पहुंच गया। आज यह कंपनी केवल चीनी ही नहीं बनाती, बल्कि एथनॉल और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी एक बड़ा नाम बन चुकी है। इस मिल ने उत्तर प्रदेश के आसपास के कई जिलों के हजारों किसानों को गन्ने की उन्नत खेती करने के लिए लगातार प्रेरित किया है और उनकी आजीविका का मुख्य आधार बनी है।

शेयरधारिता और प्रमोटर्स की स्थिति

बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की ओर से जून, 2026 में शेयर बाजार को साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस कंपनी में प्रमोटर्स और प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी लगभग बयालीस दशमलव छियासी प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस कुल हिस्सेदारी में अकेले सारोगी परिवार के ट्रस्ट का हिस्सा चौबीस दशमलव तिरासी प्रतिशत है। इसके अलावा, विवेक सारोगी की कंपनी में तीन दशमलव अड़सठ प्रतिशत व्यक्तिगत हिस्सेदारी है, जबकि सुमेधा सारोगी के पास दो दशमलव इकतालीस प्रतिशत शेयर हैं। उनकी बेटी अवंतिका सारोगी के पास भी इस उद्यम में एक दशमलव इकतालीस प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूद है, जिससे पूरे परिवार की संयुक्त पकड़ इस कारोबार पर मजबूत बनी हुई है।

क्षमता विस्तार और विशाल उत्पादन नेटवर्क

जब इस चीनी मिल की शुरुआत हुई थी, तब इसकी दैनिक पेराई क्षमता केवल अस्सी टन हुआ करती थी, लेकिन आज यह मिल रोजाना अस्सी हजार टन गन्ने की खपत करने की भारी क्षमता रखती है। अपने कारोबार को और अधिक व्यापक बनाने के लिए सारोगी परिवार ने तुलसीपुर और बभनान की मिलों का भी अधिग्रहण कर लिया था। यह मिल इकाई हर साल लगभग छह हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम राजस्व पैदा करती है और क्षेत्र के पांच लाख किसानों के लिए कमाई का सबसे बड़ा और प्रमुख जरिया साबित हो रही है। वर्तमान में कंपनी की मिलें बलरामपुर के अतिरिक्त बभनान, तुलसीपुर, हैदरगढ़, अकबरपुर, रौजागांव, मनकापुर, कुंभी, गुलरिया और मैजापुर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर पूरी क्षमता के साथ संचालित हो रही हैं।

वित्तीय प्रदर्शन और कारोबार के आंकड़े

बलरामपुर चीनी मिल का पिछले वित्तवर्ष में कुल कारोबार छह हजार दो सौ इकत्तर करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। वहीं, इसके ठीक पहले के वित्तवर्ष में कंपनी का कुल कारोबार पांच हजार चार सौ पंद्रह करोड़ रुपये के स्तर पर था। अगर इस कुल कारोबार के स्रोतों पर नजर डालें तो इसमें चीनी के व्यापार की हिस्सेदारी पांच हजार पांच सौ सात करोड़ रुपये रही, जबकि डिस्टलरी सेगमेंट से एक हजार सात सौ इक्कीस करोड़ रुपये की कमाई हुई। इसके अलावा, पीएलए से तेईस दशमलव नौ करोड़ रुपये और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से तेरह दशमलव नौ करोड़ रुपये की आय कंपनी के खाते में आई, जो इसके विविध और मजबूत वित्तीय ढांचे को दर्शाती है।

सवाल-जवाब

बलरामपुर चीनी मिल की स्थापना कब हुई थी?
इस मिल की शुरुआत 14 जुलाई, 1975 को हुई थी।
बलरामपुर चीनी मिल को ऊंचाई तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका किसकी थी?
इस मिल को ऊंचाई तक ले जाने का सबसे बड़ा श्रेय विवेक सारोगी की माता मीनाक्षी सारोगी को जाता है।
कंपनी में प्रमोटर्स की कुल हिस्सेदारी कितनी है?
जून, 2026 के आंकड़ों के मुताबिक प्रमोटर्स और प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी करीब 42.86 फीसदी है।
यह मिल रोजाना कितने गन्ने की खपत करती है?
आज यह मिल रोजाना 80 हजार टन गन्ने की खपत करने की क्षमता रखती है।
यह मिल कितने किसानों के लिए कमाई का जरिया है?
यह मिल आसपास के करीब 5 लाख किसानों के लिए कमाई का प्रमुख जरिया है।
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