वैश्विक वित्तीय बाजारों में जारी उथल-पुथल, आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों और अंतरराष्ट्रीय तनाव के दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती का परिचय दिया है। एक तरफ जहां दुनिया भर के बाजारों में अनिश्चितता के कारण सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर भारत के आर्थिक आंकड़े घरेलू खपत, औद्योगिक विकास और विदेशी मुद्रा प्रवाह के मोर्चे पर असाधारण प्रदर्शन दर्शा रहे हैं। दुनिया के कई देश जहां मुद्रास्फीति और आर्थिक मंदी का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत ने अपनी घरेलू नीतियों और वित्तीय प्रबंधन के बल पर तीव्र विकास दर बरकरार रखी है।
सोने और चांदी की कीमतों में तूफानी तेजी
कीमती धातुओं के अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में पिछले एक महीने के दौरान अभूतपूर्व तेजी दर्ज की गई है। जुलाई 2026 में जो सोना एक सीमित दायरे में कारोबार करता दिख रहा था, उसने अचानक अपनी गति बदल ली। प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत 24 जुलाई को 1,42,757 रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो 25 अगस्त तक उछलकर 1,62,344 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर पर पहुंच गई। इस प्रकार केवल एक महीने के भीतर 24 कैरेट सोने के मूल्य में 19,587 रुपये प्रति 10 ग्राम की भारी बढ़ोतरी हुई है।
इसी अवधि में चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है। एक महीने के भीतर चांदी के दाम 23,890 रुपये प्रति किलोग्राम चढ़कर 2,43,446 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गए हैं। बाजार विश्लेषकों के अनुसार सोने और चांदी की कीमतों में आई इस तूफानी तेजी का मुख्य कारण वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका एवं ईरान के बीच गहराया युद्ध संकट है। जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध या अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न होती है, तो निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे वित्तीय साधनों से अपनी पूंजी निकालकर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश करते हैं, जिससे इनकी कीमतों में तेजी आती है।
मजबूत घरेलू मांग और वाहन बिक्री में रिकॉर्ड उछाल
वैश्विक स्तर पर छाई आर्थिक सुस्ती के विपरीत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बुलेटिन के नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि देश की आंतरिक अर्थव्यवस्था की गति बेहद तेज है। जुलाई 2026 में कुल रिटेल ऑटोमोबाइल बिक्री में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 25.9% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि देश के ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की क्रय क्षमता और मांग का स्तर बेहद ऊंचा बना हुआ है।
विभिन्न वाहन खंडों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि कृषि क्षेत्र में सकारात्मक गतिविधियों के चलते ट्रैक्टर की बिक्री में 28.1% का उछाल आया है। इसके साथ ही टू-व्हीलर्स की बिक्री में 28.3% तथा पैसेंजर वाहनों की बिक्री में 19.1% की बढ़त दर्ज की गई है। देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) भी 7.3% की दर से बढ़ा है। यह सकारात्मक आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भारत की औद्योगिक और व्यावसायिक इकाइयां पूर्ण क्षमता के साथ परिचालन कर रही हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार में 73 अरब डॉलर की ऐतिहासिक बढ़ोतरी
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में आई अभूतपूर्व तेजी ने वैश्विक वित्तीय जगत को विस्मित कर दिया है। 8 जून के बाद से महज 11 सप्ताह की अवधि में भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 73 अरब डॉलर (लगभग 7 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम इजाफा हुआ है। इस अल्प समय में हुई वृद्धि की कुल राशि पड़ोसी देश पाकिस्तान के कुल विदेशी मुद्रा भंडार से तीन गुना से भी ज्यादा है, जिसका कुल फॉरेक्स रिजर्व लगभग 22 अरब डॉलर के स्तर पर सीमित है।
विदेशी मुद्रा के इस विशाल प्रवाह के पीछे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की USD-INR Forex Swap व्यवस्था ने केंद्रीय भूमिका निभाई है। इस वित्तीय योजना के तहत विदेशों में रह रहे गैर-निवासी भारतीयों (NRIs) ने 'फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट' (FCNR) खातों के जरिए भारतीय बैंकों में बिना किसी विनिमय दर जोखिम के बड़ी मात्रा में डॉलर जमा किए हैं। इसी कारण देश में विदेशी पूंजी का एक बड़ा भंडार जमा हो गया।
वैश्विक मंच पर भारत की आर्थिक कूटनीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विजन के तहत भारत सरकार के प्रमुख कैबिनेट मंत्री वैश्विक स्तर पर देश के व्यापारिक और रणनीतिक हितों को साध रहे हैं। इसी क्रम में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अमेरिका और कनाडा की यात्रा पर हैं, जहां वे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ आर्थिक सहयोग पर वार्ता कर रही हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 200 भारतीय उद्योगपतियों और कारोबारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ जापान में मौजूद हैं। वहां हुए एक ताजा सर्वे में 65% जापानी कंपनियों ने भारत को दुनिया का सबसे बेहतरीन और आकर्षक बाजार माना है।
रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस के दौरे पर हैं, जहां राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को आवश्यक खादों और उर्वरकों की निरंतर आपूर्ति का पूरा भरोसा दिया है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल चीन में द्विपक्षीय वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां सीमा विवाद के समाधान और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की जा रही है।
यूपीआई के 10 वर्ष और डिजिटल पेमेंट में वैश्विक दबदबा
भारत की स्वदेशी डिजिटल भुगतान प्रणाली UPI ने सफलता के 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं। वर्ष 2016-17 में जब डिजिटल इंडिया और UPI की शुरुआत हुई थी, तब विपक्षी दलों और कांग्रेस नेताओं द्वारा इसका कड़ा विरोध और उपहास किया गया था। उस समय यह सवाल उठाए गए थे कि देश के गरीब नागरिक, रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे व्यापारी डिजिटल माध्यमों का उपयोग कैसे कर पाएंगे। हालांकि, बीते एक दशक के आंकड़ों ने इन सभी आशंकाओं का जवाब दे दिया है।
वर्ष 2016-17 में जहां रोजाना केवल 3 हजार ट्रांजैक्शन होते थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर प्रतिदिन 66 करोड़ ट्रांजैक्शन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है। केवल जुलाई 2026 के महीने में 29.88 लाख करोड़ रुपये का डिजिटल लेन-देन संपन्न हुआ। वर्तमान में दुनिया भर में होने वाले कुल रियल-टाइम डिजिटल भुगतानों का लगभग 49% हिस्सा अकेले भारत के UPI नेटवर्क के माध्यम से होता है। आज देश के छोटे से गांव में चाय और गोलगप्पे बेचने वाले विक्रेता से लेकर बड़े कारोबारी भी QR कोड स्कैन कराकर सहजता से भुगतान प्राप्त कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने अतीत का स्मरण कराते हुए कहा कि जिस डिजिटल इंडिया मॉडल का कभी मजाक उड़ाया जाता था, आज दुनिया के 11 देश उसी मॉडल को अंगीकार कर रहे हैं और भारत के रेहड़ी-पटरी वाले भी देश की इकॉनमी को आगे बढ़ा रहे हैं।



















