आठवें वेतन आयोग को लेकर सरकारी दफ्तरों में चर्चा गरम है, और अब देश के सबसे बड़े केंद्रीय कर्मचारी संगठन ने अपनी अहम मांगें आयोग के सामने रख दी हैं। आयोग ने कर्मचारी संगठनों से 15 जून तक उनके सुझाव मंगवाए थे, और साथ ही वह खुद भी अलग-अलग राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में पहुंचकर जमीनी आंकड़े इकट्ठा कर रहा है। इन संगठनों की राय का वजन इसलिए भारी होता है क्योंकि आयोग अपनी अंतिम सिफारिश इन्हीं सुझावों को आधार बनाकर केंद्र सरकार तक पहुंचाता है।
इसी सिलसिले में नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने आयोग को कई सुझाव सौंपे हैं। यह केंद्र सरकार के कर्मचारियों का सबसे बड़ा प्रतिनिधि संगठन गिना जाता है, जिसमें रेलवे, रक्षा, डाक और केंद्रीय सचिवालय समेत कई विभागों के कर्मचारी संगठन शामिल हैं।
पे ग्रेड आपस में मिलाने की मांग
संगठन की ओर से भेजे गए सुझावों में एक बड़ी बात पे ग्रेड्स को आपस में मिला देने की है। यानी जो पे लेवल एक-दूसरे के बेहद करीब हैं, उन्हें एक कर दिया जाए। संगठन का तर्क है कि कई लेवल पर कर्मचारियों का काम लगभग एक जैसा होता है और सैलरी में भी बहुत ज्यादा फर्क नहीं रहता, फिर भी अलग-अलग लेवल होने की वजह से प्रमोशन और करियर की रफ्तार पर असर पड़ता है। इसका सीधा उदाहरण देते हुए कहा गया है कि लेवल 9 और लेवल 10 को मिलाकर एक कर दिया जाए। संगठन का मानना है कि इससे पूरा पे स्ट्रक्चर आसान होगा और एक जैसा काम करने वाले कर्मचारियों के बीच का अंतर घटेगा।
लेवल 5 में अटके कर्मचारियों के लिए राहत
इसके अलावा लेवल 5 के कर्मचारियों को अलग से राहत देने की भी मांग रखी गई है। संगठन का कहना है कि रेलवे, रक्षा, डाक और केंद्रीय सचिवालय के हजारों कर्मचारी बरसों से लेवल 5 में ही अटके पड़े हैं और आगे नहीं बढ़ पा रहे। इसीलिए मांग है कि एक बार के लिए मौजूदा सभी लेवल 5 कर्मचारियों को सीधे लेवल 6 में अपग्रेड कर दिया जाए। ऐसा होने पर इन कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए और इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उनकी तनख्वाह भी बढ़ जाएगी।
न्यूनतम वेतन और इंक्रीमेंट पर बड़ी मांग
इन दोनों मांगों के साथ संगठन ने न्यूनतम वेतन को 18,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 69,000 रुपये करने की सिफारिश की है। यह रकम बेसिक पे होगी, यानी इसके ऊपर महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) और बाकी भत्ते अलग से जुड़ेंगे। सालाना इंक्रीमेंट को भी 3 फीसदी से बढ़ाकर 6 फीसदी करने की मांग है। संगठन यह भी चाहता है कि लेवल 13 तक एक साफ-सुथरा और व्यवस्थित पे मैट्रिक्स तैयार हो, ताकि किसी भी कर्मचारी को यह समझने में दिक्कत न हो कि प्रमोशन के बाद उसकी सैलरी किस तरह बढ़ेगी। इसके साथ ही पेंशन का फॉर्मूला भी नई सैलरी के हिसाब से दोबारा तय करने की गुजारिश की गई है, ताकि रिटायर हो चुके कर्मचारियों तक भी बढ़ोतरी का फायदा पहुंचे।
क्या ये मांगें मानना जरूरी है?
अब सवाल यह उठता है कि क्या इन सुझावों को लागू करना अनिवार्य है। इसका जवाब साफ है, नहीं। संगठन ने सिर्फ सुझाव दिए हैं, जिन्हें मांग भी कहा जा सकता है। अब पूरी बात वेतन आयोग के हाथ में है कि वह इनमें से कितनी बातें स्वीकार करता है और कितनी खारिज। और आयोग के हरी झंडी दे देने के बाद भी आखिरी फैसला सरकार का ही होगा कि इन सुझावों को अमल में लाया जाए या नहीं।
कौन कर रहा है आयोग की अगुवाई
आठवें वेतन आयोग की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश के हाथ में है। आयोग के सदस्य के तौर पर प्रोफेसर पुलक घोष जुड़े हैं, जो प्रधानमंत्री की वित्तीय सलाहकार समिति के सदस्य रह चुके हैं। वहीं पंकज जैन आयोग के सदस्य सचिव हैं, जो एक पूर्व आईएएस अधिकारी हैं।



















