बिहार में पशुपालन के क्षेत्र में लगातार नई संभावनाएं बन रही हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में लोग अब पारंपरिक खेती के अलावा बकरी पालन, मुर्गी पालन और गौ पालन जैसे व्यवसायों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। इस बदलते परिवेश में राज्य सरकार पशुपालकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। सरकार द्वारा कई ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य कम लागत में पशुपालन को एक सफल व्यवसाय के रूप में स्थापित करना है। इन महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक 'समेकित बकरी एवं भेड़ विकास योजना' है, जो राज्य के निवासियों के लिए एक शानदार अवसर लेकर आई है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
समेकित बकरी एवं भेड़ विकास योजना राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के इच्छुक किसानों और पशुपालकों को अनुदानित दरों पर बकरियां प्रदान की जाती हैं। योजना के नियमों के अनुसार, हर पात्र व्यक्ति को स्वरोजगार के लिए तीन बकरियां दी जाती हैं। यह सब्सिडी जातिगत वर्ग के आधार पर तय की जाती है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के आवेदकों को 90 प्रतिशत तक का अनुदान मिलता है, जबकि सामान्य वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए यह अनुदान राशि 80 प्रतिशत निर्धारित की गई है। जिलेवार हर साल एक निश्चित लक्ष्य तय किया जाता है, जिसके तहत पात्र लोगों को लाभ दिया जाता है।
आवेदन और चयन की प्रक्रिया
जहानाबाद पशुपालन कार्यालय में पदस्थ सहायक कुक्कट पदाधिकारी डॉक्टर रानी के अनुसार, इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है। हर साल योजना के लिए जिले को एक विशिष्ट लक्ष्य प्राप्त होता है। इच्छुक उम्मीदवार विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक विभागीय स्क्रीनिंग होती है, जिसके आधार पर लाभुकों का चयन किया जाता है। एक बार चयन प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद, सरकार द्वारा अधिकृत एजेंसी के माध्यम से पशुपालकों को बकरियां उपलब्ध कराई जाती हैं। उम्मीदवार सुविधा के लिए किसी भी नजदीकी साइबर कैफे से भी अपना आवेदन दर्ज करा सकते हैं।
लागत और अनुदान का गणित
योजना के आर्थिक पहलुओं पर रोशनी डालते हुए बताया गया कि 2025-26 के सत्र में जिले को कुल 85 का लक्ष्य मिला था, जिसमें से उपलब्ध आवंटन के आधार पर 56 लाभार्थियों को लाभ दिया गया। इन 56 लाभार्थियों में से 39 अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से थे, जबकि 17 सामान्य वर्ग से चुने गए थे। वित्तीय दृष्टिकोण से देखें तो, यदि तीन बकरियों की आधिकारिक कीमत 15000 रुपये तय की गई है, तो सामान्य वर्ग के लाभार्थी को अपनी हिस्सेदारी के रूप में 3000 रुपये देने होते हैं। वहीं, अनुसूचित जाति वर्ग के लाभार्थी को रियायती दर पर मात्र 1500 रुपये में ही ये तीन बकरियां प्राप्त हो जाती हैं। हालांकि, अभी 2026-27 के सत्र के लिए आवंटन आना बाकी है।











